GDA की आय में 97.7 फीसदी की बढ़ोतरी, पांच महीने में जुटे 33.99 करोड़ रुपये

गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) के राजस्व संग्रह में चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच मानचित्र स्वीकृति और शमन यानी कंपाउंडिंग शुल्क से प्राधिकरण को कुल 33.99 करोड़ रुपये की आय हुई है। इस अवधि में औसत मासिक राजस्व करीब 6.80 करोड़ रुपये रहा।

पिछले साल के मुकाबले मासिक आय लगभग दोगुनी

आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में मानचित्र स्वीकृति से औसतन करीब 3.44 करोड़ रुपये प्रतिमाह राजस्व प्राप्त हुआ था। इसके मुकाबले चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में औसत मासिक आय करीब 6.80 करोड़ रुपये रही।

इस तरह औसत मासिक आय में लगभग 3.36 करोड़ रुपये, यानी करीब 97.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।

ऑनलाइन व्यवस्था से 27.99 करोड़ रुपये की आय

जीडीए के अनुसार अगस्त तक ऑनलाइन माध्यमों से 349 मानचित्रों का निस्तारण किया गया। उत्तर प्रदेश ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम (UP OBPAS) और फास्टपास के जरिए निस्तारित इन मानचित्रों से करीब 27.99 करोड़ रुपये का राजस्व मिला।

इसके अलावा 68 शमन मामलों से करीब 6 करोड़ रुपये की आय हुई। दोनों मदों को मिलाकर पांच महीनों में कुल राजस्व 33.99 करोड़ रुपये पहुंच गया।

पूरे वित्त वर्ष के पुराने रिकॉर्ड से भी आगे

जीडीए के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में केवल मानचित्र स्वीकृति से 31.94 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व प्राप्त हुआ था। मौजूदा वित्त वर्ष में सिर्फ पांच महीनों में ही 33.99 करोड़ रुपये की आय हो चुकी है।

यानी पांच महीने का राजस्व वित्त वर्ष 2024-25 के पूरे साल के आंकड़े से करीब 2.05 करोड़ रुपये अधिक है।

वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में मानचित्र स्वीकृति और शमन से कुल 41.31 करोड़ रुपये की आय हुई थी। चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में ही पिछले वर्ष की कुल आय का करीब 82.3 फीसदी हिस्सा प्राप्त हो चुका है।

समाधान शिविर से निस्तारण में तेजी

प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक ऑनलाइन प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ हर

शुक्रवार मानचित्र समाधान शिविर और पाक्षिक समाधान दिवस आयोजित किए जा रहे हैं।

इन माध्यमों से लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके अलावा मानचित्र मित्र एआई पोर्टल के जरिए एलटीपी और आर्किटेक्ट मानचित्र जमा करने से

पहले बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार उसकी जांच कर रहे हैं। इससे तकनीकी गलतियां कम करने और

आवेदन प्रक्रिया में लगने वाला समय घटाने का प्रयास किया जा रहा है।

आगे और बढ़ सकती है GDA की आय

जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल के अनुसार यदि राजस्व संग्रह की मौजूदा गति बनी रहती है तो

वित्त वर्ष 2026-27 में पिछले साल के 41.31 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार किया जा सकता है।

हालांकि पूरे वित्त वर्ष का वास्तविक राजस्व आगे होने वाले मानचित्र स्वीकृति और शमन मामलों पर निर्भर करेगा।

मुख्य आंकड़े

  • अप्रैल से अगस्त 2026 तक राजस्व: 33.99 करोड़ रुपये
  • औसत मासिक आय: करीब 6.80 करोड़ रुपये
  • मासिक आय में वृद्धि: लगभग 97.7 फीसदी
  • ऑनलाइन निस्तारित मानचित्र: 349
  • ऑनलाइन मानचित्रों से आय: 27.99 करोड़ रुपये
  • शमन मामलों की संख्या: 68
  • शमन से आय: 6 करोड़ रुपये
  • वित्त वर्ष 2025-26 में कुल आय: 41.31 करोड़ रुपये

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में जीडीए का

राजस्व संग्रह पिछले वर्ष की तुलना में तेज गति से आगे बढ़ा है।

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