गोरखपुर के प्रेस क्लब गोरखपुर सभागार में एक महत्वपूर्ण पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व विश्वविजय सिंह ने किया।
सम्मेलन में पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मुख्य उद्देश्य पूर्वांचल की नदियों और जलाशयों को बचाने के लिए ठोस रणनीति बनाना और जनजागरूकता फैलाना रहा।
आमी नदी समेत कई जल स्रोतों पर संकट
सम्मेलन में खासतौर पर आमी नदी और अन्य प्रमुख नदियों की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताई गई।
वक्ताओं ने बताया कि औद्योगिक कचरा, सीवेज का अनियंत्रित प्रवाह और नदी किनारों पर बढ़ते अतिक्रमण ने जल स्रोतों को गंभीर रूप से प्रदूषित कर दिया है।
इसका असर न सिर्फ जलजीवों पर पड़ रहा है, बल्कि इंसानों के स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है।

विशेषज्ञों ने जताई गहरी चिंता
सम्मेलन में मौजूद विशेषज्ञों और समाजसेवियों ने कहा कि नदियों के संरक्षण के लिए कई सरकारी योजनाएं मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।
प्रशासनिक लापरवाही और जनभागीदारी की कमी के कारण स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि अब केवल सरकार के
भरोसे रहने से काम नहीं चलेगा, बल्कि आम लोगों को भी आगे आना होगा।

जनआंदोलन का संकल्प
इस सम्मेलन का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह रहा कि पूर्वांचल की नदियों को बचाने के लिए
एक व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा।
इसके तहत गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। साथ ही, अतिक्रमण हटाने,
प्रदूषण रोकने और जल संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की जाएगी।
समाधान के लिए सुझाव
विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए
नदी किनारों पर हरित पट्टी विकसित की जाए
औद्योगिक इकाइयों की सख्त निगरानी हो
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को प्रभावी बनाया जाए
स्कूल और कॉलेजों में पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए
इन उपायों से नदियों को बचाने की दिशा में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
यह सम्मेलन एक चेतावनी और एक अवसर दोनों है। पूर्वांचल की नदियों को बचाने के
लिए अब निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है।
अगर समाज और प्रशासन मिलकर काम करें, तो जल संकट को टाला जा सकता है।
जनआंदोलन का यह संकल्प आने वाले समय में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।
