मोतियाबिंद ऑपरेशन में संक्रमण
सिकरीगंज के न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद गंभीर संक्रमण की वजह से मरीजों की आंखें खोने की घटनाएं अब सनसनी बन गई हैं। एक फरवरी को हुए मोतियाबिंद सर्जरी के बाद कई मरीजों में पोस्ट-ऑपरेटिव इंफेक्शन फैल गया, जिसका असर इतना गंभीर हुआ कि अब तक दो मरीजों की आंख निकालनी पड़ चुकी है और एक मरीज की पूरी रोशनी चली गई है। रविवार को 70 वर्षीय रामदरश की बाईं आंख एम्स दिल्ली में निकाल दी गई। रामदरश के भाई भी इसी संक्रमण से पीड़ित हैं और उनकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। यह मामला अब उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल काउंसिल के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में क्या हुआ?
सिकरीगंज स्थित न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में 1 फरवरी को कई मरीजों का मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के कुछ दिनों बाद ही मरीजों की आंखों में तेज दर्द, सूजन, लालिमा और धुंधलापन शुरू हो गया। डॉक्टरों ने शुरू में सामान्य एंटीबायोटिक ड्रॉप्स और दवाएं दीं, लेकिन संक्रमण बढ़ता ही चला गया। जांच में पता चला कि यह एंडोफ्थैल्माइटिस (एंडोफ्थाल्माइटिस) नामक गंभीर संक्रमण था, जो सर्जरी के दौरान या बाद में बैक्टीरिया के कारण होता है।
संक्रमण इतना खतरनाक साबित हुआ कि दो मरीजों की आंख बचाना संभव नहीं रहा। 70 वर्षीय रामदरश को एम्स दिल्ली रेफर किया गया, जहां रविवार को उनकी बाईं आंख निकालनी पड़ी। रामदरश के छोटे भाई भी इसी हॉस्पिटल में ऑपरेशन करा चुके हैं और उनका इलाज अभी चल रहा है। उनकी रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। एक अन्य मरीज की आंख में रोशनी पूरी तरह चली गई है, जबकि उसकी आंख अभी निकाली नहीं गई है।
मरीजों और परिवार का गुस्सा, आरोप लगे
परिवार वालों का कहना है कि हॉस्पिटल में सर्जरी के दौरान साफ-सफाई का पूरा ध्यान नहीं रखा गया। कई मरीजों ने बताया कि ऑपरेशन थिएटर में स्टेरिलाइजेशन की कमी थी और एक ही उपकरण कई मरीजों पर इस्तेमाल किया गया। रामदरश के परिवार ने कहा, “हमने आंखें ठीक कराने के लिए हजारों रुपये खर्च किए, लेकिन अब पूरी आंख ही चली गई। हॉस्पिटल ने पहले बताया कि सब सामान्य है, लेकिन अब स्थिति बहुत खराब हो गई।”
परिवार ने हॉस्पिटल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है और मुआवजे की मांग की है।
कई मरीजों ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से शिकायत की है।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्रवाई
घटना के बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने हॉस्पिटल का निरीक्षण किया।
अस्पताल के रजिस्ट्रेशन और सर्जरी रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने एम्स दिल्ली और
अन्य बड़े अस्पतालों से संपर्क कर बाकी मरीजों का तुरंत इलाज कराने के
निर्देश दिए हैं। हॉस्पिटल संचालक ने कहा कि
वे सभी मरीजों का इलाज कर रहे हैं और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।
मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है,
जो यह तय करेगी कि संक्रमण की वजह क्या थी और किसकी लापरवाही थी।
मोतियाबिंद सर्जरी में संक्रमण का खतरा: लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
मोतियाबिंद सर्जरी सामान्यतः सुरक्षित होती है, लेकिन पोस्ट-ऑपरेटिव इंफेक्शन का
खतरा हमेशा रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन थिएटर की
साफ-सफाई, स्टेराइल उपकरण और एंटीबायोटिक प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन जरूरी है।
मरीजों को ऑपरेशन के बाद डॉक्टर की सलाह का पूरी तरह पालन करना चाहिए।
यह घटना उत्तर प्रदेश में निजी अस्पतालों की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
लोग अब बड़े अस्पतालों और सरकारी संस्थानों को प्राथमिकता देने लगे हैं।
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