अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
Donald Trump स्टेट ऑफ दी यूनियन में ट्रंप का संबोधन, ईरान पर सख्त बयान
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टेट ऑफ दी यूनियन को संबोधित किया। इस संबोधन में ट्रंप ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का बखान किया और भावी नीतियां तथा अमेरिकी सरकार की योजनाओं को साझा किया। संबोधन के दौरान ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया और कहा, “हम ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने देंगे।” यह बयान वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। ट्रंप का यह संबोधन चुनावी माहौल में उनकी सख्त विदेश नीति को रेखांकित करता है।
ट्रंप का संबोधन: सरकार की उपलब्धियां और प्रमुख हाइलाइट्स
ट्रंप ने संबोधन की शुरुआत में अपनी सरकार की आर्थिक उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था अभूतपूर्व गति से बढ़ रही है, बेरोजगारी दर ऐतिहासिक निचले स्तर पर है और स्टॉक मार्केट रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। ट्रंप ने टैक्स कटौती, व्यापार समझौतों और ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि को अपनी सफलताओं के रूप में गिनाया। उन्होंने मैक्सिको और कनाडा के साथ नए व्यापार समझौते (USMCA) का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे अमेरिकी नौकरियां सुरक्षित हुई हैं।
संविदान और अमेरिकी मूल्यों पर जोर देते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ने सैन्य ताकत बढ़ाई है और आईएसआईएस को हराया है। उन्होंने आप्रवासन नीति पर बात की और कहा कि अवैध प्रवास पर रोक लगाने के लिए बॉर्डर वॉल का निर्माण जारी है। ट्रंप ने स्वास्थ्य सेवा, दवा कीमतों में कमी और वैटरन्स के लिए सुधारों का भी जिक्र किया। संबोधन में उन्होंने डेमोक्रेट्स पर निशाना साधा और कहा कि विपक्षी दल अमेरिका की सफलता में बाधा डाल रहे हैं।
ईरान पर सख्त रुख: परमाणु हथियार नहीं होने देंगे
संविदान के दौरान ट्रंप का सबसे चर्चित बयान ईरान को लेकर आया। उन्होंने कहा, “हम ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने देंगे।” ट्रंप ने ईरान पर अधिकतम दबाव की नीति को सही ठहराया और कहा कि ओबामा प्रशासन के दौरान हुआ न्यूक्लियर डील गलत था, जिसे उन्होंने रद्द कर दिया। उन्होंने ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी को मार गिराने का जिक्र किया और कहा कि इससे अमेरिका सुरक्षित हुआ है। ट्रंप ने उत्तर कोरिया और
अफगानिस्तान पर भी बात की, जहां उन्होंने शांति प्रयासों का उल्लेख किया।
मध्यावधि चुनाव से पहले का संदेश: अमेरिका फर्स्ट
मध्यावधि चुनाव नजदीक होने के कारण ट्रंप का संबोधन चुनावी रंग में रंगा नजर आया। उन्होंने “अमेरिका फर्स्ट”
नीति को दोहराया और कहा कि उनकी सरकार ने अमेरिकियों के हितों को प्राथमिकता दी है। ट्रंप ने कोविड-
19 वैक्सीन विकास और आर्थिक रिकवरी का जिक्र किया, हालांकि विपक्ष इसे विवादास्पद मानता है।
उन्होंने पर्यावरण, शिक्षा और अपराध नियंत्रण पर भावी योजनाएं साझा कीं।
संबोधन में ट्रंप ने महिलाओं, अल्पसंख्यकों और श्रमिकों के लिए किए गए कार्यों का बखान किया।
संबोधन का प्रभाव और प्रतिक्रियाएं
ट्रंप का संबोधन सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। रिपब्लिकन समर्थकों ने इसे शानदार बताया,
जबकि डेमोक्रेट्स ने इसे झूठ और प्रोपेगैंडा करार दिया। ईरान पर बयान से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ सकता है।
अमेरिकी मीडिया ने ट्रंप की बॉडी लैंग्वेज और आत्मविश्वास की सराहना की।
मध्यावधि चुनाव में यह संबोधन ट्रंप के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।
ट्रंप का संबोधन अमेरिकी राजनीति के एक महत्वपूर्ण मोड़ को दर्शाता है। ईरान पर सख्ती से
वैश्विक कूटनीति प्रभावित होगी। अमेरिका की भावी नीतियां चुनाव परिणाम पर निर्भर करेंगी।