फिल्म ‘धुरंधर 2’ अपने एक डायलॉग को लेकर विवादों में घिरती नजर आ रही है। फिल्म में इस्तेमाल किए गए “बरेली का पॉकेटमार” डायलॉग पर शहर के लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस मुद्दे ने अब कानूनी रूप भी ले लिया है, जहां बरेली के पार्षद राजेश अग्रवाल ने फिल्म निर्माताओं को नोटिस भेजकर डायलॉग हटाने की मांग की है।
शहर की छवि को ठेस पहुंचाने का आरोप
बरेली के रामपुर गार्डन क्षेत्र के पार्षद राजेश अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि फिल्म में इस तरह के संवाद का उपयोग शहर की छवि को खराब करने के लिए किया गया है। उनका कहना है कि इस प्रकार के डायलॉग न केवल बरेली की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि यहां के लोगों की भावनाओं को भी आहत करते हैं।
उन्होंने फिल्म निर्माताओं पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए शहर के नाम का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
फिल्म निर्माताओं को भेजा गया कानूनी नोटिस
पार्षद ने फिल्म के निर्माता-निर्देशक आदित्य धर, लोकेश धर और ज्योति देशपांडे को कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विवादित डायलॉग को तुरंत हटाया जाए, अन्यथा उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस तरह की सामग्री समाज में गलत संदेश देती है और क्षेत्रीय पहचान को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करती है।
जनता में बढ़ा आक्रोश
इस डायलॉग को लेकर बरेली के लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोग फिल्म निर्माताओं से माफी मांगने और डायलॉग हटाने की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि फिल्मों में इस तरह के संवादों से शहर की पहचान को नुकसान होता है,
जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
फिल्मों में संवाद और जिम्मेदारी
यह मामला एक बार फिर इस बात पर बहस खड़ा करता है कि फिल्मों में इस्तेमाल होने वाले
संवादों की जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण होती है। मनोरंजन के नाम पर
किसी शहर या समुदाय की छवि को खराब करना सही नहीं माना जा सकता।
फिल्म निर्माताओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके द्वारा प्रस्तुत सामग्री समाज पर गहरा प्रभाव डालती है और
उसे जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
क्या बढ़ेगा विवाद?
फिलहाल इस मामले में फिल्म निर्माताओं की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
लेकिन यदि डायलॉग को नहीं हटाया गया, तो यह विवाद और बढ़ सकता है और
कानूनी कार्रवाई भी तेज हो सकती है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म निर्माता इस मामले को कैसे संभालते हैं और क्या
वे विवादित डायलॉग को हटाने का फैसला लेते हैं या नहीं।
‘धुरंधर 2’ का यह विवाद दर्शाता है कि फिल्मों में छोटे-छोटे संवाद भी बड़े विवाद का कारण बन सकते हैं।
बरेली के लोगों की भावनाओं को देखते हुए अब यह जरूरी हो गया है कि फिल्म निर्माता
इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाएं और उचित कदम उठाएं।
यह घटना फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी एक सीख है कि मनोरंजन के साथ-साथ
सामाजिक जिम्मेदारी का भी ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
