फिरोजाबाद में तहसीलदार
फिरोजाबाद जिले में प्रशासनिक हलकों में उस समय हलचल मच गई जब टूंडला तहसील से स्थानांतरित तहसीलदार ने अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगा दिए। इस पूरे मामले ने न सिर्फ जिला प्रशासन बल्कि प्रदेश स्तर पर भी ध्यान खींच लिया है।
तबादले के बाद तहसीलदार ने खोले राज
टूंडला तहसील की तहसीलदार राखी शर्मा का हाल ही में स्थानांतरण शिकोहाबाद कर दिया गया। तबादले के तुरंत बाद उन्होंने प्रेसवार्ता कर जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी और कुछ कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए।
तहसीलदार का दावा है कि उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच को रफा-दफा करने के लिए उनसे 1.75 लाख रुपये कीमत का iPhone रिश्वत के रूप में लिया गया।
करोड़ों के जमीन घोटाले का आरोप
राखी शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि जिले में बड़े स्तर पर सरकारी जमीनों का घोटाला चल रहा है। उनके अनुसार, कुछ अधिकारी और बाबू मिलकर करोड़ों रुपये की जमीनों की बंदरबांट कर रहे हैं।
उन्होंने इस मामले को जिले का सबसे बड़ा भू-घोटाला बताते हुए योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
एफआईआर दर्ज, मामला और गरमाया
तहसीलदार ने टूंडला के एक व्यक्ति रंजीत गुप्ता के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस कदम के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ गया है और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
कर्मचारी संघ ने किया विरोध
तहसीलदार के आरोपों के बाद कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ उनके खिलाफ लामबंद हो गया है। संघ ने उनके आरोपों को पूरी तरह झूठा बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कर्मचारी संघ का कहना है कि यह आरोप केवल तबादले के बाद की नाराजगी का परिणाम हैं और इनका कोई ठोस आधार नहीं है।
प्रशासन की सफाई
जिला प्रशासन ने इस पूरे मामले को निराधार बताते हुए कहा है कि तहसीलदार का स्थानांतरण नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया था।
प्रशासन के अनुसार:
- स्थानांतरण 16 अप्रैल 2026 को किया गया
- कार्य में लापरवाही के आरोप पहले से थे
- राजस्व परिषद के आदेशों की अनदेखी की गई
- उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया गया
हालांकि प्रशासन की ओर से जारी स्पष्टीकरण में किसी अधिकारी का नाम सामने नहीं आया,
जिससे मामले में पारदर्शिता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला
यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।
लोग इस मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
कुछ लोग तहसीलदार के आरोपों को गंभीर मान रहे हैं, तो कुछ इसे प्रशासनिक विवाद बता रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस मामले की जांच किस स्तर पर होगी।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो
यह प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
वहीं अगर आरोप गलत साबित होते हैं, तो तहसीलदार के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई संभव है।
फिरोजाबाद में सामने आया यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को
उजागर करता है। आरोप और सफाई के बीच सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
फिलहाल यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
