चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच जारी राजनीतिक विवाद मंगलवार, 6 अक्टूबर को सड़क तक पहुंच गया। INDIA ब्लॉक के कई विपक्षी सांसदों और नेताओं ने संसद से निर्वाचन आयोग कार्यालय की ओर मार्च निकाला। मार्च में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव, सुप्रिया सुले समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए।
विपक्षी नेताओं का यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर था। विपक्ष ने SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
संसद से शुरू हुआ विरोध मार्च
विपक्षी सांसद मंगलवार सुबह संसद परिसर के मकर द्वार के पास एकत्र हुए। इसके बाद सांसदों ने हाथों में तिरंगा और बैनर लेकर चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च शुरू किया।
मार्च में कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, एनसीपी-एसपी, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।
पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोका
विपक्षी सांसदों का मार्च आगे बढ़ा तो पुलिस ने रास्ते में भारी बैरिकेडिंग कर दी। सुरक्षा बलों ने सांसदों को निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर आगे जाने से रोक दिया।
इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर ही बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं ने बैरिकेडिंग के पास विरोध जताया।
कुछ विपक्षी नेताओं ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश भी की। इसके बाद पुलिस ने कई सांसदों को हिरासत में लिया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई अन्य विपक्षी नेता भी पुलिस हिरासत में लिए गए।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी धरने पर बैठे
मार्च रोके जाने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी नेता सड़क पर बैठ गए। बाद में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी अकाशवाणी भवन परिसर में भी नजर आए।
प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारे लगाए। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई।
अखिलेश यादव समेत कई नेता हिरासत में
प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और अन्य विपक्षी सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस उन्हें बस में बैठाकर प्रदर्शन स्थल से ले गई।
इस दौरान केंद्रीय दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था काफी बढ़ाई गई थी और संसद से लेकर चुनाव आयोग कार्यालय की ओर जाने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई थी।
विपक्ष की क्या हैं प्रमुख मांगें?
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के सामने मुख्य रूप से तीन मुद्दे उठाए हैं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया को समाप्त करने और कथित तौर पर मतदाता सूची से हटाए गए नामों को बहाल करने की मांग शामिल है। कुछ विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर अन्य सुधारों की मांग भी रखी है।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और फॉर्म-6 से जुड़े बदलावों को लेकर पारदर्शिता के सवाल हैं।
फॉर्म-6 को लेकर क्या है विवाद?
विवाद का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 और SIR के दौरान उससे जुड़े अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर है।
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि प्रक्रिया में ऐसे बदलाव किए गए जिनसे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी प्रक्रिया का बचाव किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी फॉर्म-6 से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई के दौरान कहा है कि वह चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच करेगा ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बदलाव किए गए थे या नहीं और उन्हें किसने अधिकृत किया था।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
चुनाव आयोग ने विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
आयोग का कहना है कि SIR से संबंधित निर्णय प्रक्रिया नियमों के
अनुसार हुई है और तीन सदस्यीय आयोग में फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
इस तरह SIR और मतदाता सूची का मुद्दा अब राजनीतिक विवाद का बड़ा केंद्र बन गया है।
बीजेपी ने भी विपक्ष पर साधा निशाना
विपक्ष के प्रदर्शन के बाद बीजेपी नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए जा रहे
आरोपों पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी की ओर से कहा गया है कि
विपक्ष संवैधानिक संस्था पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
वहीं विपक्ष का कहना है कि उसका आंदोलन मतदाता अधिकारों और
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़ा है। दोनों पक्षों के दावों और आरोपों के बीच चुनाव
आयोग से जुड़े विवाद पर राजनीतिक टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
आगे क्या होगा?
चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच SIR तथा मतदाता सूची को लेकर विवाद
आगे भी जारी रहने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट में फॉर्म-6 और
संबंधित प्रक्रिया को लेकर चल रही सुनवाई भी इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण है।
फिलहाल 6 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं के मार्च, पुलिस की बैरिकेडिंग और
हिरासत के बाद दिल्ली की राजनीति में चुनाव आयोग से जुड़ा मुद्दा फिर केंद्र में आ गया है।
निष्कर्ष
चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का यह मार्च SIR और मतदाता सूची से जुड़े विवाद के बीच हुआ।
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव और
सुप्रिया सुले समेत कई विपक्षी नेता मार्च में शामिल हुए। पुलिस द्वारा
रास्ता रोके जाने के बाद नेताओं ने सड़क पर धरना दिया और कई सांसदों को हिरासत में लिया गया। अब
इस पूरे मामले पर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच
राजनीतिक तथा कानूनी स्तर पर बहस आगे बढ़ने की उम्मीद है
FAQ
Q1. विपक्ष ने चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च क्यों निकाला?
विपक्ष ने SIR, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर
मार्च निकाला तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।
Q2. मार्च में कौन-कौन से प्रमुख नेता शामिल हुए?
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव, सुप्रिया सुले समेत कई विपक्षी नेता और सांसद मार्च में शामिल हुए।
Q3. पुलिस ने विपक्षी नेताओं को क्यों रोका?
पुलिस ने मार्च के रास्ते में बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को निर्वाचन आयोग कार्यालय की ओर आगे बढ़ने से रोक दिया।
Q4. मार्च रुकने के बाद विपक्षी नेताओं ने क्या किया?
मार्च रोके जाने के बाद कई विपक्षी नेता सड़क पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया।
Q5. क्या कुछ नेताओं को हिरासत में लिया गया?
हां। पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव समेत
कई विपक्षी नेताओं और सांसदों को हिरासत में लिया।
Q6. SIR को लेकर विपक्ष की मुख्य आपत्ति क्या है?
विपक्ष SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में होने वाले बदलावों को लेकर पारदर्शिता तथा मतदाताओं के
नाम प्रभावित होने की आशंका पर सवाल उठा रहा है। चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता है
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