नवरात्र और दिवाली जैसे त्योहारों के बीच उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। बाजार में चीनी के दाम पांच दिनों के भीतर 48 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। वहीं, गुड़ और बूरा की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। त्योहारों के दौरान मिठाइयां, पकवान और अन्य व्यंजन बनाने के लिए इन वस्तुओं की मांग बढ़ने से आम उपभोक्ताओं के खर्च पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
व्यापारियों के अनुसार, चीनी की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण खुदरा बाजार में कीमतें बढ़ी हैं। दूसरी ओर, संबंधित अधिकारियों ने मंडल में चीनी का पर्याप्त स्टॉक होने की जानकारी दी है और कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए डीलरों के भंडार की जांच करने की बात कही है।
पांच दिन में 48 से 60 रुपये प्रति किलो हुई चीनी
मुरादाबाद के विभिन्न बाजारों में चीनी की खुदरा कीमत में तेजी दर्ज की गई है। पांच अक्टूबर के आसपास 48 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी अब करीब 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इस तरह पांच दिनों में कीमत में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
शहर के कटरा नाज, गंज बाजार, जीएमडी रोड और गांधी नगर सहित कई बाजारों में ग्राहकों को बढ़े हुए दाम पर चीनी खरीदनी पड़ रही है।
व्यापारियों का कहना है कि थोक बाजार में चीनी की 50 किलो की बोरी लगभग 2,900 रुपये में मिल रही है। इसके बाद परिवहन, दुकान के खर्च और व्यापारिक मार्जिन जोड़ने पर खुदरा कीमत करीब 60 रुपये प्रति किलो हो रही है।
गुड़ और बूरा भी हुआ महंगा
चीनी की कीमतों में तेजी का असर गुड़ और बूरा के बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। व्यापारियों के मुताबिक, लगभग दस दिन पहले 60 रुपये प्रति किलो बिकने वाला बूरा अब करीब 70 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। वहीं, गुड़ की कीमत बढ़कर 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
त्योहारों के समय घरों में मिठाइयां, लड्डू, हलवा और पारंपरिक पकवान बनाने के लिए चीनी, गुड़ और बूरा की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में इन वस्तुओं के महंगे होने से घरेलू खर्च में बढ़ोतरी होना स्वाभाविक है।
जो परिवार घर पर ही मिठाइयां और पकवान तैयार करते हैं, उन्हें अब पहले के मुकाबले अधिक बजट रखना पड़ सकता है। मिठाई बनाने वाले छोटे कारोबारियों के लिए भी कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि लागत बढ़ा सकती है।
चीनी की आपूर्ति प्रभावित होने की बात
स्थानीय चीनी कारोबारियों के अनुसार, पांच अक्टूबर से मिलों की ओर से आपूर्ति प्रभावित हुई है। एक चीनी डीलर ने बताया कि मिलों से बिक्री के लिए पर्याप्त चीनी नहीं मिल रही थी और कीमतों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई थी।
व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के समय आपूर्ति में बाधा आने से बाजार में उपलब्ध माल पर दबाव पड़ता है। इससे कीमतों में तेजी आ सकती है। कुछ दुकानदारों ने लगातार बदलते दाम और कारोबार में होने वाली परेशानी के कारण चीनी की बिक्री रोकने की बात भी कही।
हालांकि, आपूर्ति में कमी की स्थानीय शिकायतों के बीच अधिकारियों ने मंडल में उपलब्ध स्टॉक के आंकड़े साझा किए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि बाजार में कीमतों की स्थिति का आकलन करने के लिए उपलब्ध भंडार के साथ-साथ उसकी वास्तविक आपूर्ति और वितरण पर भी नजर रखना जरूरी है।
मंडल की 23 चीनी मिलों में 18.35 लाख क्विंटल स्टॉक
गन्ना विभाग के उपायुक्त हरपाल सिंह के अनुसार, मंडल में संचालित 23 चीनी मिलों में कुल
18.35 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक उपलब्ध था।
जिला विपणन अधिकारी विनीता मिश्रा ने बताया कि चीनी की कीमत बढ़ने से संबंधित शिकायत मिली है।
उन्होंने कहा कि कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए डीलरों के स्टॉक की जांच की जाएगी।
इस कदम का उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता और वास्तविक भंडार की
स्थिति का पता लगाना है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन या जमाखोरी सामने आती है, तो
संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
त्योहारों में बढ़ी मांग से कारोबार पर दबाव
नवरात्र से लेकर दिवाली और छठ तक मिठाइयों तथा पारंपरिक पकवानों की मांग बढ़ जाती है।
इस अवधि में घरों के अलावा मिठाई की दुकानों, हलवाई और
खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों को भी बड़ी मात्रा में चीनी की जरूरत होती है।
ऐसे समय में चीनी की कीमत बढ़ने से मिठाई बनाने की लागत प्रभावित हो सकती है।
कारोबारियों के सामने चुनौती यह रहती है कि बढ़ी हुई
लागत के बावजूद ग्राहकों को उचित कीमत पर उत्पाद उपलब्ध कराए जाएं।
यदि चीनी, गुड़ और बूरा के दाम ऊंचे बने रहते हैं, तो त्योहारों की खरीदारी के
दौरान उपभोक्ताओं को अपने खर्च की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।
हालांकि, मिठाइयों की खुदरा कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी,
यह स्थानीय बाजार, उत्पाद और कारोबारियों की लागत पर निर्भर करेगा।
प्रशासन की निगरानी से क्या मिल सकती है राहत?
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच प्रशासन के सामने बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और जमाखोरी की
शिकायतों की जांच करने की चुनौती है। स्टॉक की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि
कहीं माल रोककर कृत्रिम कमी तो नहीं पैदा की जा रही है।
उपभोक्ताओं को भी खरीदारी के दौरान अलग-अलग दुकानों पर कीमतों की तुलना करनी चाहिए और
निर्धारित वजन के अनुसार सामान लेना चाहिए। वहीं, बाजार में अनावश्यक रूप से अधिक कीमत
वसूलने या जमाखोरी की शिकायत मिलने पर संबंधित विभाग को जानकारी दी जा सकती है।
निष्कर्ष
मुरादाबाद में त्योहारों से पहले चीनी के दाम 48 रुपये से बढ़कर
60 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा है। गुड़ और बूरा भी महंगे हुए हैं,
जिससे मिठाइयों और पकवानों की तैयारी का खर्च बढ़ सकता है।
एक तरफ व्यापारियों ने मिलों से आपूर्ति प्रभावित होने की बात कही है, तो दूसरी ओर गन्ना विभाग ने
मंडल में पर्याप्त स्टॉक की जानकारी दी है। अब बाजार में नियमित आपूर्ति, स्टॉक की जांच और
प्रशासनिक निगरानी से कीमतों को नियंत्रित करने में कितनी मदद मिलती है, इस पर नजर रहेगी।
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