बरेली। उत्तराखंड सरकार की मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के बीच चल रहा विवाद अब बरेली की संपत्तियों और रियल एस्टेट कारोबार तक पहुंच गया है। उत्पीड़न और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) के तहत दर्ज प्राथमिकी के बाद गिरधारी लाल साहू की तलाश किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इसी बीच बरेली में उनकी साझेदारी से जुड़ी लगभग 800 करोड़ रुपये की प्रस्तावित ओमेक्स आवासीय परियोजना और सीतापुर हाईवे के पास स्थित फार्म हाउस भी चर्चा में हैं।
यह मामला केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें कंपनी के निदेशक पद, कथित दस्तावेजी फर्जीवाड़े, संपत्ति के निर्माण और आवासीय परियोजना की स्वीकृतियों से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं।
रेखा आर्या ने 15 अक्टूबर को दर्ज कराई थी प्राथमिकी
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या ने 15 अक्टूबर 2026 को देहरादून के कैंट थाने में गिरधारी लाल साहू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में उत्पीड़न सहित गंभीर आरोप लगाए गए। मामले में एससी/एसटी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।
रेखा आर्या ने यह आरोप भी लगाया कि कथित फर्जीवाड़े के माध्यम से उन्हें कंपनी के निदेशक पद से हटाया गया। इन आरोपों की जांच संबंधित पुलिस और जांच एजेंसियों द्वारा की जानी है। आरोपों की अंतिम सत्यता जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगी।
800 करोड़ रुपये की ओमेक्स आवासीय परियोजना पर नजर
बरेली में लालपुर और अधलखिया गांव के आसपास प्रस्तावित ओमेक्स आवासीय परियोजना को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह परियोजना करीब 71.78 एकड़ भूमि पर विकसित करने का प्रस्ताव है और इसकी अनुमानित लागत लगभग 800 करोड़ रुपये बताई गई है।
परियोजना से संबंधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में नौ साझेदारों के नाम दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें गिरधारी लाल साहू और रेखा आर्या से जुड़े नाम भी शामिल बताए गए हैं।
परियोजना के लिए भूमि स्वामित्व, लेआउट प्लान, भूमि उपयोग परिवर्तन और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े पहलुओं की जांच और समीक्षा महत्वपूर्ण है। संबंधित प्राधिकरण की प्रक्रिया पूरी होने तथा आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद ही परियोजना की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
महत्वपूर्ण बात: लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत को परियोजना का अनुमान बताया गया है। इसे पूर्ण रूप से स्वीकृत या निर्माणाधीन परियोजना की अंतिम लागत मानने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों की पुष्टि जरूरी है।
बरेली-सीतापुर हाईवे के पास फार्म हाउस भी चर्चा में
गिरधारी लाल साहू से जुड़े बरेली-सीतापुर हाईवे के पास लालपुर गांव स्थित फार्म हाउस को लेकर भी प्रशासनिक जांच की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि यह संपत्ति कई एकड़ भूमि पर बनी है और इसका निर्माण लंबे समय से अधूरा है।
निर्माण मानचित्र और संबंधित स्वीकृतियों को लेकर सवाल उठने के बाद बरेली विकास प्राधिकरण के स्तर पर दस्तावेजों की जांच की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों में मानचित्र स्वीकृति और कंपाउंडिंग प्रक्रिया से संबंधित मुद्दों का उल्लेख है।
हालांकि, संपत्ति के स्वामित्व, निर्माण की वैधानिक स्थिति और संभावित कार्रवाई के बारे में अंतिम निष्कर्ष संबंधित प्राधिकरण के आधिकारिक रिकॉर्ड और आदेशों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
गिरधारी लाल साहू की तलाश और कानूनी स्थिति
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद गिरधारी लाल साहू के उपलब्ध न होने और
उनकी तलाश किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किए जाने की भी जानकारी है।
कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच एजेंसियां शिकायत, दस्तावेजों, संबंधित लोगों के बयान और
अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर सकती हैं। दूसरी ओर, गिरधारी लाल साहू की ओर से दिए गए जवाब या
आरोपों के खंडन को भी निष्पक्ष रिपोर्टिंग में शामिल किया जाना चाहिए।
फिलहाल, इस मामले में जांच की प्रगति, संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों और
आवासीय परियोजना की स्वीकृतियों पर नजर बनी हुई है। आगे की
स्थिति आधिकारिक जांच और संबंधित प्राधिकरणों के निर्णयों से स्पष्ट होगी।
क्या ओमेक्स परियोजना पर पड़ेगा विवाद का असर?
गिरधारी लाल साहू से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद परियोजना के साझेदारों,
भूमि के स्वामित्व और आवश्यक अनुमतियों को लेकर चर्चा तेज हुई है।
हालांकि, केवल किसी साझेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने से पूरी
आवासीय परियोजना स्वतः रुक जाती है, ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
परियोजना का भविष्य भूमि के दस्तावेजों, साझेदारों की कानूनी स्थिति, नियामकीय स्वीकृतियों और संबंधित
अधिकारियों के फैसलों पर निर्भर करेगा। यदि किसी स्तर पर कानूनी या दस्तावेजी बाधा सामने आती है,
तो उसका प्रभाव परियोजना की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
निष्कर्ष: रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद के साथ बरेली की संपत्तियों और प्रस्तावित
ओमेक्स टाउनशिप पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है। लेकिन संपत्ति, निर्माण और परियोजना से जुड़े किसी भी
अंतिम निष्कर्ष के लिए आधिकारिक दस्तावेजों तथा जांच के परिणामों की प्रतीक्षा आवश्यक है
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू का विवाद क्यों चर्चा में है?
रेखा आर्या की ओर से उत्पीड़न सहित गंभीर आरोप लगाते हुए
प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद मामला चर्चा में आया है।
2. बरेली की ओमेक्स परियोजना की अनुमानित लागत कितनी है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित आवासीय परियोजना की अनुमानित लागत करीब 800 करोड़ रुपये है।
3. क्या ओमेक्स परियोजना पूरी तरह स्वीकृत हो चुकी है?
उपलब्ध जानकारी में परियोजना से जुड़ी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और
विभिन्न नियामकीय पहलुओं की समीक्षा का उल्लेख है। सभी
आवश्यक स्वीकृतियों की स्थिति आधिकारिक रिकॉर्ड से सत्यापित करनी चाहिए।
4. फार्म हाउस को लेकर क्या मामला है?
बरेली-सीतापुर हाईवे के पास स्थित फार्म हाउस के निर्माण मानचित्र और
संबंधित स्वीकृतियों को लेकर जांच की जानकारी सामने आई है।
5. क्या गिरधारी लाल साहू के खिलाफ आरोप सिद्ध हो गए हैं?
नहीं। प्राथमिकी में लगाए गए आरोप अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं हैं।
अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा।
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