बंगाल की खाड़ी में बढ़ी हलचल, ‘अर्नब’ का खतरा और अल-नीनो भी सक्रिय; भारत में मौसम की दोहरी चुनौती

सितंबर के आखिरी दिनों में भारत के मौसम में एक साथ कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव वाले क्षेत्र के मजबूत होने से पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बनी है। दूसरी तरफ प्रशांत महासागर में अल-नीनो की सक्रियता भी मौसम विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम आगे बढ़ते हुए पहले डिप्रेशन और उसके बाद डीप डिप्रेशन में बदल सकता है। यदि इसकी तीव्रता और बढ़ती है तो इसे ‘अर्नब’ नाम दिया जा सकता है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित चक्रवाती सिस्टम के तौर पर देखना ज्यादा उचित है।

बंगाल की खाड़ी में क्या बन रहा है?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्र में बना निम्न दबाव का क्षेत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इसके 21 सितंबर को डिप्रेशन और 22 सितंबर के आसपास डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना जताई गई थी। इसके बाद सिस्टम के 23 सितंबर के आसपास दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तट की ओर पहुंचने का अनुमान है।

यानी अगले कुछ दिनों में पूर्वी भारत के मौसम पर इसका प्रभाव बढ़ सकता है।

क्या ‘अर्नब’ चक्रवात बन चुका है?

अभी इसे सीधे चक्रवात कहना जल्दबाजी होगी। उपलब्ध मौसम पूर्वानुमान में सिस्टम के पहले डिप्रेशन और डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना बताई गई है।

यदि यह आगे चलकर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में पहुंचता है, तभी इसका नाम ‘अर्नब’ होगा। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी ऐसी सूचना को सावधानी से देखना जरूरी है जिसमें इसे पहले से ही एक पूर्ण चक्रवात बताया जा रहा हो।

ओडिशा और आंध्र प्रदेश में बारिश का असर

इस मौसम प्रणाली का सबसे ज्यादा असर दक्षिण ओडिशा और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश में दिखाई दे सकता है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 23 और 24 सितंबर को इन इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। समुद्र के आसपास तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

ओडिशा में 23-24 सितंबर के दौरान हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर झोंकों की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक जाने की संभावना जताई गई है।

छत्तीसगढ़, तेलंगाना और विदर्भ में भी असर

मौसम प्रणाली के आगे बढ़ने के साथ इसका प्रभाव पूर्वी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकता है।

दक्षिण छत्तीसगढ़ में 24 सितंबर को भारी बारिश की संभावना बताई गई है। छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में 23 से 25 सितंबर तथा विदर्भ में 24 और 25 सितंबर के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति बन सकती है।

इस दौरान निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति की आशंका को देखते हुए प्रशासन और लोगों को मौसम अपडेट पर नजर रखने की जरूरत है।

बिहार और पश्चिम बंगाल में भी बारिश का अनुमान

इस सिस्टम का प्रभाव पूर्वी भारत के दूसरे हिस्सों में भी देखा जा सकता है।

बिहार में 24 से 26 सितंबर के बीच भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं झारखंड, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल-सिक्किम में भी बारिश का दौर बढ़ सकता है।

इससे किसानों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है।

अब अल-नीनो क्यों चर्चा में है?

जहां बंगाल की खाड़ी का सिस्टम बारिश बढ़ाने की स्थिति बना रहा है, वहीं प्रशांत महासागर में अल-नीनो की सक्रियता भारतीय मानसून के लिए अलग तरह की चुनौती पैदा कर सकती है।

सामान्य तौर पर अल-नीनो की स्थिति भारतीय मानसून के कमजोर होने से जुड़ी रही है। हालांकि इसका असर हर साल एक जैसा नहीं होता और क्षेत्रवार मौसम पर प्रभाव अलग-अलग हो सकता है।

केंद्र सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक 1950 के बाद दर्ज 16 अल-नीनो वर्षों में सात वर्षों में भारतीय मानसून की बारिश सामान्य से कम रही थी।

एक तरफ भारी बारिश, दूसरी तरफ बारिश की कमी

मौजूदा मौसम की खास बात यह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में एक जैसी स्थिति नहीं है।

जहां बंगाल की खाड़ी से जुड़े सिस्टम के कारण ओडिशा, आंध्र प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है, वहीं देश के कई हिस्सों में इस साल बारिश सामान्य से कम रही है।

19 सितंबर तक देश की संचयी बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बताई गई थी और

देश के लगभग 43 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में बारिश की कमी दर्ज की गई थी।

मानसून की विदाई भी शुरू

इसी बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी भी शुरू हो गई है। मौसम विभाग के

अनुसार पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी की शुरुआत हुई है।

ऐसे समय में बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया सिस्टम मौसम के

पैटर्न को कुछ समय के लिए फिर बदल सकता है।

किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

सितंबर का अंतिम दौर खरीफ फसलों के लिए महत्वपूर्ण होता है। जिन क्षेत्रों में खेतों में

फसल तैयार होने की स्थिति में है, वहां बहुत ज्यादा बारिश से नुकसान हो सकता है।

दूसरी तरफ जहां बारिश कम है, वहां पर्याप्त नमी नहीं मिलने से खेती प्रभावित हो सकती है।

इसलिए किसानों के लिए स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और

कृषि विभाग की सलाह के अनुसार फसल प्रबंधन करना महत्वपूर्ण है।

आम लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

भारी बारिश और तेज हवा वाले क्षेत्रों में लोगों को कुछ सामान्य सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • मौसम विभाग के स्थानीय अलर्ट पर नजर रखें।
  • तेज हवा के दौरान खुले और कमजोर ढांचों से दूर रहें।
  • जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचें।
  • समुद्र में जाने वाले मछुआरे स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनी का पालन करें।
  • बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान में खड़े न रहें।
  • यात्रा से पहले मौसम की स्थिति की जानकारी जरूर लें।

भारत मौसम विज्ञान विभाग नियमित रूप से क्षेत्र और जिले के अनुसार चेतावनियां जारी करता है।

क्या उत्तर प्रदेश में भी असर पड़ेगा?

बंगाल की खाड़ी से उठने वाली मौसम प्रणालियों का प्रभाव आगे बढ़ने के दौरान मध्य और

उत्तर भारत के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकता है। हालांकि किसी विशेष जिले में भारी बारिश होगी या नहीं,

इसका आकलन स्थानीय और ताजा IMD पूर्वानुमान से ही करना चाहिए।

इसलिए उत्तर प्रदेश के लोगों को भी अगले कुछ दिनों में मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।

निष्कर्ष

सितंबर के आखिरी सप्ताह में भारत का मौसम कई प्रणालियों के प्रभाव में है।

बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र

प्रदेश की ओर बढ़ रहा है और इसके डीप डिप्रेशन में मजबूत होने की संभावना है।

आगे यह चक्रवाती तूफान में बदलता है या नहीं, यह इसकी आगामी तीव्रता पर निर्भर करेगा।

दूसरी तरफ अल-नीनो की सक्रियता भारतीय मानसून के व्यापक पैटर्न को

प्रभावित कर सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में कहीं

भारी बारिश तो कहीं बारिश की कमी जैसी परिस्थितियां बनी रह सकती हैं।

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