संभल हिंसा मामले में डीएसपी
संभल जिले में हुई हिंसा के मामले में पूर्व डीएसपी अनुज चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने सीजेएम कोर्ट के उस आदेश पर तत्काल रोक लगा दी है, जिसमें अनुज चौधरी समेत 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 5 सप्ताह बाद तय की है। यह फैसला अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों के लिए राहत की सांस लेकर आया है, क्योंकि सीजेएम के आदेश से उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू होने वाली थी। संभल हिंसा मामले में अब कानूनी लड़ाई हाईकोर्ट में केंद्रित हो गई है।
संभल हिंसा का बैकग्राउंड और सीजेएम का आदेश
*संभल जिले में नवंबर 2024 में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान पुलिस पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई और लापरवाही के आरोप लगे थे। पीड़ित पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया कि पुलिस ने उचित कार्रवाई नहीं की। बाद में याचिका सीजेएम कोर्ट में पहुंची, जहां सीजेएम ने अनुज चौधरी (तत्कालीन सीओ/डीएसपी) समेत 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। इस आदेश में धारा 166, 167, 218, 323, 504, 506 और अन्य धाराएं लगाई गई थीं।
आदेश के बाद अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने दलील दी कि सीजेएम का आदेश गलत है, क्योंकि पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई से पहले विभागीय जांच जरूरी है। साथ ही, वे ड्यूटी पर थे और कानून के दायरे में काम कर रहे थे।
हाईकोर्ट का फैसला: आदेश पर रोक, 5 सप्ताह बाद सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई की और सीजेएम के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि एफआईआर दर्ज करने से पहले मामले की गहराई से जांच जरूरी है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को स्थगित करते हुए कहा कि अगली सुनवाई 5 सप्ताह बाद होगी। इस दौरान कोई कार्रवाई नहीं होगी।
अनुज चौधरी के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी पर थे और हिंसा रोकने की कोशिश की गई। किसी भी तरह की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का कोई सबूत नहीं है। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लिया और अंतरिम राहत दी।
अनुज चौधरी कौन हैं? संभल हिंसा में भूमिका
अनुज चौधरी संभल जिले में हिंसा के समय सीओ/डीएसपी के पद पर तैनात थे।
हिंसा के दौरान वे घटनास्थल पर मौजूद थे और भीड़ को काबू करने की कोशिश कर रहे थे।
पुलिस की ओर से कहा गया कि लाठीचार्ज और अन्य कार्रवाई कानून के अनुसार की गई।
लेकिन पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एक पक्ष की रक्षा की और दूसरे पक्ष पर अत्याचार किया।
यह मामला संभल हिंसा के बाद पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों का हिस्सा है।
हिंसा में कई लोग घायल हुए थे और संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।
क्या होगा आगे? कानूनी लड़ाई जारी
हाईकोर्ट के इस फैसले से अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों को तत्काल राहत मिली है।
5 सप्ताह बाद सुनवाई में हाईकोर्ट यह तय करेगा कि सीजेएम का
आदेश सही था या नहीं। अगर हाईकोर्ट आदेश को रद्द कर देता है, तो पुलिसकर्मियों पर
कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी। वहीं, अगर आदेश बरकरार रहा तो एफआईआर दर्ज हो जाएगी।
यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पुलिसकर्मियों की
ड्यूटी के दौरान सुरक्षा और कानूनी संरक्षण पर बहस छिड़ सकती है।
संभल हिंसा मामले में अब सबकी नजरें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
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