लखनऊ | 7 अक्टूबर 2026
परिचय
लखनऊ में एक इंजीनियर के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार और निजी फर्म के जरिए ठेकेदारी से जुड़े आरोपों के मामले में शासन स्तर से कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मामले में विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है।
मुख्य खबर
लखनऊ में एक इंजीनियर के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों ने विभागीय व्यवस्था और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यूपीसीडको में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एई आशुतोष द्विवेदी पर निजी फर्म बनाकर ठेकेदारी करने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में जीएसटी कमिश्नर की ओर से सहकारिता विभाग को पत्र भेजे जाने की बात सामने आई है।
जानकारी के मुताबिक, आशुतोष द्विवेदी को संबंधित निजी फर्म और ठेकेदारी गतिविधियों से अलग करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद उन पर कार्रवाई में देरी को लेकर सवाल उठे। आरोप है कि विभागीय स्तर पर कार्रवाई के निर्देशों के बाद भी उन्हें जिम्मेदारी वाले पद पर बनाए रखा गया।
भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे इंजीनियर पर कार्रवाई के निर्देश
मामले में यूपीसीडको के एमडी संजीव सिंह की भूमिका भी चर्चा में आई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, शासन स्तर से निर्देश जारी होने के बाद भी आशुतोष द्विवेदी को तत्काल हटाए जाने की कार्रवाई नहीं की गई। इस दौरान उन्हें गोरखपुर समेत चार जिलों का प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं में तैनात अधिकारियों से सेवा नियमों और हितों के टकराव से जुड़े प्रावधानों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। कोई अधिकारी निजी कारोबारी गतिविधि या ठेकेदारी से जुड़ा पाया जाता है, तो संबंधित विभाग को तथ्यों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करनी होती है।
लखनऊ में आशुतोष द्विवेदी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश
मामले में अब आशुतोष द्विवेदी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पूरे प्रकरण में यह भी सवाल उठ रहा है कि शासन स्तर से निर्देश जारी होने के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हुई है ।संबंधित अधिकारी को महत्वपूर्ण जिलों का अतिरिक्त प्रभार किस आधार पर दिया गया। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।
फिलहाल मामले में विभागीय कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज और अधिकारियों के बयान यह स्पष्ट करेंगे कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।
भ्रष्टाचार और निजी फर्म से जुड़े आरोप क्या हैं?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एई आशुतोष द्विवेदी पर निजी फर्म बनाकर ठेकेदारी करने का आरोप लगाया गया है।
इस संबंध में जीएसटी विभाग की ओर से सहकारिता विभाग को पत्र भेजे जाने की बात सामने आई है।
आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
शासन के निर्देश के बाद भी क्यों उठे सवाल?
बताया गया है कि आशुतोष द्विवेदी को पद और जिम्मेदारियों से हटाने संबंधी निर्देशों दिए गए है।बावजूद तत्काल कार्रवाई नहीं हुई।
इसके बाद उन्हें गोरखपुर समेत चार जिलों का प्रभार दिए जाने को लेकर सवाल उठे हैं।
अब क्या होगी कार्रवाई?
मामले में आशुतोष द्विवेदी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की जानकारी है।
आगे की कार्रवाई जांच, दस्तावेजों और विभागीय रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।
Facts/Details
मामला लखनऊ से जुड़ा है।
एई आशुतोष द्विवेदी पर निजी फर्म बनाकर ठेकेदारी का आरोप है।
जीएसटी कमिश्नर की ओर से सहकारिता विभाग को पत्र भेजे जाने की जानकारी है।
यूपीसीडको के एमडी संजीव सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।
आशुतोष द्विवेदी को गोरखपुर समेत चार जिलों का प्रभार दिए जाने की बात सामने आई है।
अब उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश की जानकारी है।
आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद होगी।
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, आरोपों को अंतिम रूप से सत्य मानने से पहले विभागीय जांच और उपलब्ध दस्तावेजों की पुष्टि जरूरी होगी।
FAQ:
Q1. मामला किस शहर से जुड़ा है?
लखनऊ से जुड़े इस मामले में विभागीय स्तर पर कार्रवाई की बात सामने आई है।
Q2. आशुतोष द्विवेदी पर क्या आरोप है?
उन पर निजी फर्म बनाकर ठेकेदारी करने का आरोप लगाया गया है।
Q3. क्या आरोप साबित हो चुके हैं?
नहीं। आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच के बाद होगी।
Q4. किसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश हैं?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार आशुतोष द्विवेदी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
Q5. गोरखपुर का इस मामले से क्या संबंध है?
बताया गया है कि आशुतोष द्विवेदी को गोरखपुर समेत चार जिलों का प्रभार दिया गया था।
लखनऊ से सामने आए इस मामले ने विभागीय पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
अब जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई के जरिए यह स्पष्ट होगा कि आरोप कितने सही हैं और नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।