अमेरिका-ईरान युद्ध फिर भड़का: लारक द्वीप पर US का हमला, ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर दागीं मिसाइलें

US Iran War News 2026: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। करीब एक महीने की अपेक्षाकृत शांति के बाद अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक लारक द्वीप पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में संघर्ष के फिर से बड़े स्तर पर फैलने की आशंका बढ़ा दी है।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के जवान लारक द्वीप पर ऐसे रॉकेट तैयार कर रहे थे, जिनका इस्तेमाल समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए किया जा सकता था। अमेरिका ने इसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों और वाणिज्यिक आवाजाही के लिए तत्काल खतरा बताया और सैन्य कार्रवाई की।

लारक द्वीप पर अमेरिका ने क्यों किया हमला?

लारक द्वीप ईरान के दक्षिणी हिस्से में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित है। यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के अनुसार, ईरानी IRGC की गतिविधियां समुद्री मार्ग के लिए खतरा पैदा कर रही थीं। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि वहां दो रॉकेट लॉन्चर ऐसी तैयारी में थे, जिनसे समुद्री बारूदी सुरंगें दागी जा सकती थीं। इसी कथित खतरे को रोकने के लिए अमेरिकी सेना ने सीमित और सटीक कार्रवाई की।

अमेरिकी कार्रवाई को लेकर ईरान का रुख पूरी तरह अलग है। ईरानी पक्ष ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि इसमें सैन्यकर्मियों के साथ नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया ने कई लोगों के मारे जाने और घायल होने का दावा किया है।

अमेरिका के हमले के बाद ईरान का बड़ा पलटवार

लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के कुछ ही समय बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की जिम्मेदारी ली।

ईरान के अनुसार, किंग हुसैन एयरबेस और अल-अजरक एयरबेस को निशाना बनाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक इन ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। ईरानी सरकारी मीडिया ने अमेरिकी सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचने का दावा किया है।

हालांकि अमेरिकी सूत्रों ने दावा किया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की लगभग सभी मिसाइलों को रोक दिया। जॉर्डन की सेना ने भी बाद में बताया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया।

एक महीने बाद फिर क्यों बढ़ा तनाव?

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से सीधा सैन्य संघर्ष चल रहा है। कुछ समय के लिए हमलों में कमी आई थी, लेकिन अब लारक द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई ने तनाव को फिर बढ़ा दिया है।

Live Hindustan की रिपोर्ट के अनुसार, 29 जुलाई के बाद ईरान की जमीन पर अमेरिका का यह पहला सीधा हमला बताया जा रहा है। इसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या दोनों देशों के बीच फिर से लगातार हवाई और मिसाइल हमले शुरू होंगे या हालात सीमित कार्रवाई तक रहेंगे।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से की आवाजाही इसी जलडमरूमध्य से होती है।

इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता। यदि जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे पेट्रोल, डीजल, परिवहन और महंगाई पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।

लारक द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई की खबर के बाद तेल बाजार में भी तेजी देखी गई। Reuters के अनुसार, ब्रेंट क्रूड में एक समय एक डॉलर से अधिक की बढ़त दर्ज की गई।

जॉर्डन क्यों बना ईरानी जवाब का निशाना?

जॉर्डन मध्य पूर्व में अमेरिका का महत्वपूर्ण सहयोगी है और वहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी भी है। ईरान ने इसी वजह से जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को अपने जवाबी हमले का निशाना बनाया।

इस घटनाक्रम से जॉर्डन भी सीधे क्षेत्रीय सैन्य तनाव की चपेट में आ गया है। जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली को मिसाइलों को रोकने के लिए सक्रिय होना पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया।

इससे यह आशंका बढ़ गई है कि संघर्ष का दायरा केवल अमेरिका और

ईरान तक सीमित न रहकर आसपास के देशों तक भी फैल सकता है।

ट्रंप प्रशासन पर भी बढ़ सकता है दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के लिए यह घटनाक्रम

राजनीतिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अमेरिका में आगामी मिडटर्म चुनावों से पहले

ईरान युद्ध को लेकर घरेलू राजनीति में बहस तेज होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

आलोचकों का सवाल है कि लंबे सैन्य संघर्ष के बाद अमेरिका को इसका स्पष्ट राजनीतिक और

रणनीतिक लाभ कितना मिला है। वहीं अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि ईरान की

सैन्य गतिविधियों और समुद्री मार्गों के लिए खतरे को रोकना जरूरी है।

क्या फिर बड़े युद्ध की स्थिति बनेगी?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि लारक द्वीप पर हमला और जॉर्डन में

ईरानी जवाबी कार्रवाई व्यापक युद्ध में बदल जाएगी। लेकिन इतना स्पष्ट है कि

दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है।

यदि ईरान लगातार अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाता है और अमेरिका

इसके जवाब में ईरान के भीतर और सैन्य कार्रवाई करता है, तो संघर्ष तेजी से बढ़ सकता है। दूसरी ओर,

यदि दोनों पक्ष सीमित सैन्य कार्रवाई के बाद पीछे हटते हैं, तो तनाव को नियंत्रित किया जा सकता है।

भारत समेत पूरी दुनिया की नजर

अमेरिका-ईरान संघर्ष पर भारत समेत दुनिया के कई देशों की नजर है।

भारत के लिए पश्चिम एशिया की स्थिरता महत्वपूर्ण है, क्योंकि

इस क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और बड़ी संख्या में भारतीयों का संबंध है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी लंबे व्यवधान का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

इसलिए आने वाले दिनों में तेल की कीमत,

समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

निष्कर्ष

अमेरिका द्वारा ईरान के लारक द्वीप पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने जॉर्डन स्थित

अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर जवाब दिया है। अमेरिका का कहना है कि लारक द्वीप पर

मौजूद ईरानी लॉन्चर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंगों के खतरे से जुड़े थे,

जबकि ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।

फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ चुका है और पूरी दुनिया की नजर होर्मुज

जलडमरूमध्य तथा मध्य पूर्व के अगले सैन्य घटनाक्रम पर है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि

यह संघर्ष सीमित जवाबी कार्रवाई तक रहता है या फिर एक और बड़े सैन्य टकराव का रूप लेता है।

FAQ

Q1. अमेरिका ने ईरान के किस द्वीप पर हमला किया?
अमेरिकी सेना ने ईरान के लारक द्वीप पर हमला किया, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित है।

Q2. अमेरिका ने लारक द्वीप पर हमला क्यों किया?
अमेरिका का दावा है कि वहां IRGC के जवान ऐसे रॉकेट तैयार कर रहे थे

जिनका इस्तेमाल समुद्री बारूदी सुरंगें दागने में किया जा सकता था।

Q3. ईरान ने अमेरिका के हमले का क्या जवाब दिया?
ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

Q4. जॉर्डन में कितनी मिसाइलें रोकी गईं?
जॉर्डन की सेना के अनुसार उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया।

Q5. क्या अमेरिका-ईरान युद्ध फिर शुरू हो गया है?
दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष फिर तेज हुआ है। हालांकि आगे

इसका स्वरूप कितना व्यापक होगा, यह आने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।

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