3000 से अधिक नावें संचालित
वाराणसी। गंगा नदी, जो सदियों से पवित्र मानी जाती है, आज प्रदूषण के काले बादल में घिर रही है। महाकुंभ 2025 के बाद नावों का सैलाब बढ़ गया है, जिसमें डीजल चालित नावों की संख्या 1500 तक पहुंच गई है। अमर उजाला की 18 फरवरी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा में कुल 3000 से अधिक छोटी-बड़ी नावें संचालित हो रही हैं, जिनमें से 1500 डीजल से चलती हैं। इससे काली धुंध छा रही है, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन गई है। नगर निगम में 1217 नावें पंजीकृत हैं, लेकिन असल संख्या दोगुनी है। CNG नावें 800 हैं, लेकिन डीजल का दबदबा बरकरार है। यह ब्लॉग गंगा प्रदूषण के इस नए खतरे की पूरी डिटेल्स, कारण, प्रभाव और समाधान बताएगा। यदि आप गंगा घाटों पर रहते हैं या पर्यावरण से जुड़े हैं, तो ये अपडेट्स आपके लिए जरूरी हैं।
कुंभ के बाद नावों का सैलाब: 1500 डीजल नावें, 3000 कुल नावें
महाकुंभ 2025 के बाद गंगा पर नाव ट्रैफिक बढ़ गया। रिपोर्ट के मुताबिक:
- पंजीकृत नावें: 1217 (नगर निगम रिकॉर्ड)।
- वास्तविक संख्या: 2500-3000 नावें चल रही।
- डीजल नावें: 1500 (हर दिन धुआं उगल रही)।
- CNG नावें: 800 (पर्यावरण अनुकूल, लेकिन कम)।
- हाथ वाली नावें: कुछ सौ।
महाकुंभ के दौरान नाविकों ने धरना दिया था, जिसके बाद सभी नावें चलने लगीं। लेकिन डीजल नावों का बढ़ता उपयोग गंगा को जहरीला बना रहा है। वाराणसी के घाटों पर रोज 50,000 से ज्यादा यात्री नावों से सफर करते हैं, जो प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है।
प्रदूषण के कारण: डीजल धुआं और नाव ट्रैफिक
मुख्य कारण:
- डीजल इंजनों से निकलने वाला धुआं – काली धुंध और कार्बन उत्सर्जन।
- नावों की संख्या में 50% वृद्धि – महाकुंभ के बाद पर्यटन बढ़ा।
- ड्रेजिंग और मानवीय गतिविधियां – ध्वनि प्रदूषण नदी जीवों को प्रभावित।
- अपशिष्ट: नावों से प्लास्टिक और तेल कचरा गंगा में गिर रहा।
CPCB रिपोर्ट के अनुसार, डीजल नावें PM2.5 और NO2 का प्रमुख स्रोत हैं, जो दमा और हृदय रोग बढ़ाते हैं। गंगा में फीकल कोलीफॉर्म भी बढ़ा है।
प्रभाव: पर्यावरण और स्वास्थ्य पर खतरा
- पर्यावरण: नदी डॉल्फिन और मछलियों पर असर, ऑक्सीजन लेवल गिरा।
- स्वास्थ्य: घाट पर सांस लेने में दिक्कत, कैंसर रिस्क बढ़ा।
- पर्यटन: काली धुंध से घाटों की सुंदरता प्रभावित।
- आंकड़े: 2025 में गंगा प्रदूषण 20% बढ़ा, नाव ट्रैफिक मुख्य वजह।
समाधान: CNG और इलेक्ट्रिक नावें बढ़ाएं
- गेल इंडिया ने 1000 डीजल नावों को CNG में बदलने का प्लान (60% खर्च सरकार)।
- इलेक्ट्रिक बोट ट्रायल – प्रदूषण मुक्त।
- निगम ने नाविकों को सब्सिडी दी, लेकिन कार्यान्वयन धीमा।
- जागरूकता: पर्यटकों को CNG नाव चुनने की अपील।