गोरखपुर AIIMS में हुआ शोध
गोरखपुर। गर्भावस्था को जिंदगी का सबसे खूबसूरत दौर माना जाता है, लेकिन अगर इस दौरान मधुमेह (गेस्टेशनल डायबिटीज) का सामना हो जाए तो मां-बच्चे दोनों के लिए खतरे बढ़ जाते हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) गोरखपुर के एक ताजा शोध ने इसकी पुष्टि की है। अमर उजाला की 8 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, AIIMS के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने 500 गर्भवती महिलाओं पर किए गए अध्ययन में पाया कि GDM से हाई ब्लड प्रेशर, प्री-टर्म डिलीवरी, बच्चे का वजन बढ़ना और लंबे समय में टाइप-2 डायबिटीज का रिस्क 40% तक बढ़ जाता है। यह शोध पूर्वांचल की महिलाओं के लिए चेतावनी है, जहां डायबिटीज के केस 20% सालाना बढ़ रहे हैं। इस ब्लॉग में हम शोध की पूरी डिटेल्स, कारण, लक्षण, जटिलताएं, इलाज और रोकथाम के टिप्स बताएंगे। यदि आप प्रेग्नेंट हैं या परिवार में कोई है, तो ये जानकारी जीवन रक्षक साबित हो सकती है।
AIIMS गोरखपुर शोध की मुख्य खोजें: 500 महिलाओं पर 6 महीने का अध्ययन
AIIMS गोरखपुर के डॉ. राजेश कुमार (एंडोक्राइनोलॉजिस्ट) के नेतृत्व में जून से नवंबर 2025 तक चले इस शोध में 500 गर्भवती महिलाओं (20-35 वर्ष) को शामिल किया गया। मुख्य निष्कर्ष:
- 25% महिलाओं में GDM पाया गया (पूर्वांचल औसत से 10% ज्यादा)।
- GDM वाली महिलाओं में हाई BP का खतरा 35% बढ़ा।
- बच्चे में मैक्रोसोमिया (वजन 4 किलो से ज्यादा) का रिस्क 28%।
- प्री-टर्म बर्थ (37 हफ्ते से पहले) 22% मामलों में।
- लॉन्ग-टर्म: बच्चे में 40% टाइप-2 डायबिटीज का खतरा।
डॉ. कुमार ने कहा, “पूर्वांचल में अनहेल्दी डाइट, कम व्यायाम और फैमिली हिस्ट्री GDM के मुख्य कारण हैं। शुरुआती स्क्रीनिंग से 80% जटिलताएं रोकी जा सकती हैं।”
गर्भावस्था मधुमेह के कारण और लक्षण: क्यों होता है?
गर्भावस्था में हार्मोनल बदलाव (जैसे प्रोजेस्टेरोन) इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ाते हैं, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं होता। मुख्य कारण:
- मोटापा (BMI 25 से ज्यादा)।
- फैमिली में डायबिटीज हिस्ट्री।
- 25 वर्ष से ज्यादा उम्र।
- अनियमित डाइट (ज्यादा चीनी-तला-भुना)।
लक्षण: ज्यादा प्यास-भूख लगना, बार-बार पेशाब, थकान, वजन न बढ़ना। 24-28 हफ्ते में OGTT टेस्ट से डिटेक्ट होता है।
जटिलताएं: मां-बच्चे पर क्या असर?
शोध के अनुसार, अनकंट्रोल्ड GDM से:
- मां के लिए: प्री-क्लेम्पसिया (हाई BP), सी-सेक्शन की जरूरत, पोस्ट-पार्टम हेमरेज।
- बच्चे के लिए: जॉन्डिस, लो ब्लड शुगर, सांस लेने में दिक्कत, भविष्य में मोटापा-डायबिटीज। पूर्वांचल में 2025 में 15% GDM केस अनट्रीटेड रहे, जिससे 10% बच्चे NICU में भर्ती हुए।
इलाज और रोकथाम: 5 आसान उपाय अपनाएं
AIIMS विशेषज्ञों की सलाह:
- स्क्रीनिंग: 24 हफ्ते में OGTT टेस्ट कराएं।
- डाइट: ब्राउन राइस, साबुत अनाज, हरी सब्जियां लें; चीनी-फल्स कम करें।
- व्यायाम: रोज 30 मिनट वॉक या योगा।
- मॉनिटरिंग: ग्लूकोमीटर से शुगर चेक, डॉक्टर से रेगुलर चेकअप।
- इंसुलिन: अगर जरूरी हो, तो डॉक्टर की सलाह पर लें
