नोएडा की सड़कों पर ‘भूत’ घूम रही थी: गुंजा की जिंदा होने की सनसनीखेज कहानी
नोएडा के एक व्यस्त इलाके में 24 नवंबर 2025 को एक ऐसी घटना घटी, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। एक महिला सलवार सूट में सड़क पर चल रही थी, फोन कान पर लगाए बातें कर रही थी। अचानक पुलिसकर्मियों ने उसे घेर लिया, कार में बिठाया और हिरासत में ले लिया। यह कोई साधारण गिरफ्तारी नहीं थी – यह थी ‘मृत’ गुंजा की वापसी! बिहार के मोतिहारी जिले की रहने वाली गुंजा को जुलाई 2025 से मृत समझा जा रहा था। उसके पति रंजीत कुमार को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। चार महीने बाद यह खुलासा हुआ कि गुंजा जिंदा है और नोएडा में प्रेमी के साथ नई जिंदगी जी रही थी। यह केस पुलिस की लापरवाही और परिवारों की बर्बादी की दर्दनाक दास्तान बन गया है।
केंद्रीय जांच एजेंसियों और स्थानीय पुलिस के रिकॉर्ड्स के मुताबिक, गुंजा की गायब होने की घटना 3 जुलाई 2025 की रात करीब 12:07 बजे की है। मोतिहारी के अरेराज थाने के पास स्थित उनके घर का सीसीटीवी फुटेज साफ दिखाता है कि गुंजा तेज कदमों से कमरे से निकली, घर से बाहर गई और गायब हो गई। उस वक्त पति रंजीत घर के अंदर ही था। सुबह होते ही रंजीत ने घर और आसपास तलाशी ली, लेकिन गुंजा का कोई सुराग नहीं मिला। रंजीत ने तुरंत अरेराज थाने में मिसिंग रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें सीसीटीवी की क्लिपिंग्स भी सौंपी गईं। लेकिन गुंजा के परिवार ने इसे दहेज उत्पीड़न का मामला बता दिया। उन्होंने रंजीत पर अपहरण, हत्या और शव छिपाने का आरोप लगाया।
पुलिस की जल्दबाजी: बिना सबूत के चार्जशीट, रंजीत जेल की हवा खा रहा था
9 जुलाई 2025 को गुंजा के परिवार की शिकायत पर अरेराज पुलिस ने रंजीत को गिरफ्तार कर लिया। सीसीटीवी सबूतों को नजरअंदाज कर केस को हत्या का रूप दे दिया गया। पुलिस ने शव की तलाश तक नहीं की, न ही किसी अन्य लीड की जांच। अक्टूबर 2025 में, रंजीत जेल में सड़ते हुए, पुलिस ने कोर्ट में उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। केस में हत्या की पूरी कहानी गढ़ दी गई, जबकि कोई शव ही नहीं था। रंजीत का परिवार आर्थिक रूप से तबाह हो गया। वकीलों की फीस, यात्राएं और सामाजिक बहिष्कार ने उन्हें तोड़ दिया। रंजीत के भाई ने बताया, “हमारा पूरा परिवार बिखर गया। रंजीत निर्दोष था, लेकिन पुलिस ने बिना जांच के उसे अपराधी बना दिया।”
इस बीच, गुंजा नोएडा में अपने प्रेमी के साथ खुशहाल जीवन जी रही थी। खुलासा हुआ कि गुंजा का मोतिहारी के पड़ोसी गांव के एक लड़के से पहले से प्रेम प्रसंग चल रहा था। परिवार की मर्जी के खिलाफ मार्च 2025 में रंजीत से शादी के बाद भी वह संपर्क में थी। प्रेमी नोएडा में नौकरी करता था, इसलिए दोनों ने फेक डेथ का प्लान बनाया। रात के अंधेरे का फायदा उठाकर गुंजा भाग गई, ताकि नई जिंदगी शुरू कर सकें। यह योजना इतनी सफ लूज थी कि चार महीने तक किसी को शक न हुआ।
24 नवंबर का ड्रामा: नोएडा पुलिस ने पकड़ी ‘जिंदा लाश’
24 नवंबर 2025 को नोएडा पुलिस ने गुंजा को सड़क पर देखा। वह कॉन्फिडेंटली चल रही थी, फोन पर बातें कर रही थी। पुलिस ने उसे रोका, कार में बिठाया और हिरासत में ले लिया। फोटोज में गुंजा तीन पुलिसकर्मियों के साथ नजर आ रही है,
अभी भी फोन पर ही।
खबर मोतिहारी पहुंची तो हड़कंप मच गया। रंजीत के परिवार ने गुंजा को वापस लाने का फैसला किया
, ताकि निर्दोष साबित कर रंजीत को रिहा करवाएं। लेकिन यहां फिर पुलिस की मनमानी सामने आई।
नोएडा के सीनियर सुपरिंटेंडेंट, जो इस थाने में बाद में जॉइन हुए थे,
ने कहा, “नोएडा दूर है, सफर और गाड़ी का इंतजाम आपको करना होगा। हम तो पर्यटक बनकर चलेंगे।
” विभागीय बजट होने के बावजूद परिवार को खुद खर्च करना पड़ा।
गुंजा का परिवार बिहार से सड़क मार्ग नोएडा पहुंचा।
लापरवाही पर सवाल: क्या पुलिस को सजा मिलेगी?
यह केस पुलिस की लापरवाही को उजागर करता है। अरेराज थाने ने सीसीटीवी को इग्नोर किया,
बिना बॉडी सर्च के चार्जशीट बना दी। नोएडा एसएसपी ने सफाई दी,
“यह भूतनी की कहानी तब की है जब मैं यहां जॉइन नहीं हुआ था।
” लेकिन सवाल वाजिब है
– क्या देरी से जॉइन करने वाले अफसरों को कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए?
रिपोर्टर सचिन पांडेय के इनपुट से पता चलता है
कि गुंजा और उसके प्रेमी पर अब फेक डेथ स्कीम के लिए केस बन सकता है
