प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं, जिनका राजनीतिक सफर और ठाठ इस बात से चर्चा में आया कि उन्होंने बिना चुनाव लड़े ही मंत्री पद की शपथ ली।
वे महनार के रहने वाले हैं और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं।
2019-20 में उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। नीतीश कुमार के दसवीं बार मुख्यमंत्री बनने के बाद बने नये मंत्रिमंडल में दीपक प्रकाश को बिना किसी चुनावी लड़ाई के मंत्री बनाया गया, जो विधान परिषद कोटे से हुए।उनकी शपथ ग्रहण सभा में जींस और शर्ट पहनकर आने की खास ठाठ ने सबका ध्यान आकर्षित किया, क्योंकि आमतौर पर मंत्री कुर्ता-पायजामा या पारंपरिक पोशाक में ही शपथ लेते हैं।
दीपक प्रकाश ने इस पर कहा कि कपड़ों से कुछ नहीं होता, उन्हें समय दीजिए वो बेहतर काम करके दिखाएंगे।
उनके इस अंदाज से युवा वर्ग में एक अलग छवि देखने को मिली। वे रामोलो के कोटे से मंत्री बने हैं, जहां उपेंद्र कुशवाहा के प्रभाव वाली पार्टी ने चार सीटें जीती हैं और मंत्रिमंडल में बेटे को स्थान दिया गया।दीपक प्रकाश ने बिहार चुनाव नहीं लड़ा था, लेकिन उन्होंने अपने पिता के लिए प्रचार में सक्रियता दिखाई। अब उन्हें छह महीने के भीतर विधायक या एमएलसी बनना होगा।
उनके परिवार की राजनीतिक और सामाजिक पकड़ मजबूत है, जिसमें उनके दादा मुनेश्वर सिंह का समाजसेवा और शिक्षा क्षेत्र में योगदान रहा है।
शपथ ग्रहण के बाद वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिले, जो राजनीतिक दबाव और गठबंधन की रणनीति का बड़ा हिस्सा माना जाता है। उनका नाम राजनीति में एक नए तरह की युवा और आधुनिक छवि के रूप में उभरा है, जो पारंपरिक राजनीतिक दलालियों से हटकर कुछ अलग करने की पहल दिखाता है।
उनकी शपथ और अंदाज बिहार की राजनीति में नए रंग और चर्चा का विषय बने हुए हैं।संक्षेप में, दीपक प्रकाश बिना चुनाव लड़े मंत्री बने, उनका पहनावा युवा और आधुनिक था, और वे उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, जो बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया कदम माना जा रहा है। उनके मंत्री बनने की पृष्ठभूमि में परिवार की राजनीतिक पकड़, गठबंधन रणनीतियां, और युवा नेतृत्व की छवि शामिल है। यह घटना बिहार की राजनीति में काफी चर्चा का विषय रही है।
