नेपाल में सड़क आंदोलन के बाद शांति और अंतरिम सरकार के गठन हेतु आंदोलनकारी रणनीति बना रहे हैं, जिसमें वे पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुषिला कार्की को अंतरिम सरकार का नेतृत्व देने की मांग कर रहे हैं.
घटनाक्रम और मांगें
- सड़क पर उतरे आंदोलनकारी, जिनमें मुख्यतः युवा ‘जनरेशन Z’ शामिल हैं, ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद हिंसक और गैर-हिंसक प्रदर्शन किए.
- आंदोलन का केंद्र भ्रष्टाचार, सत्ता में वंशवाद और लोकतांत्रिक सुधार हैं, जिन पर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता गिर गई है.
- आंदोलनकारी मुख्य रूप से संसद भंग कर नए चुनाव, प्रधानमंत्री का प्रत्यक्ष चुनाव, प्रधानमंत्री के कार्यकाल पर सीमा और संसद के सत्र की अवधि घटाने की मांग कर रहे हैं.
अंतरिम सरकार की रणनीति
- नेपाल सेना ने सड़कों को नियंत्रित कर आंदोलनकारियों से संवाद शुरू किया है ताकि अंतरिम सरकार बनाई जा सके और शांति बहाल की जा सके.
- अधिकांश युवा आंदोलनकारी, विशेषकर ‘जनरेशन Z’ के सदस्य, सोशल मीडिया और वर्चुअल मीटिंग्स के जरिए नेतृत्व के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुषिला कार्की का समर्थन कर रहे हैं.
- सेना ने आंदोलनकारी प्रतिनिधियों से वार्ता के लिए मुलाकात की जिसमें कई नाम प्रस्तावित हुए (कार्की, काठमांडू महापौर बालेन्द्र शाह आदि), लेकिन भाजपा समर्थित समूहों और कुछ असहमति के कारण बात रुकी.
- कार्यवाही के दौरान खुद प्रतिनिधियों ने वार्ता में पारदर्शिता और आंदोलन की सत्यता की रक्षा की चिंता उठाई है.
आगे की प्रक्रिया
- संविधान के अनुसार बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने का अधिकार है, परंतु वर्तमान में आंदोलनकारी एक सर्वहितैषी अंतरिम सरकार की मांग कर रहे हैं जो व्यापक जन-प्रतिनिधित्व के साथ छह माह में नए चुनाव करा सके.
- अंतरिम सरकार बनने के बाद, संविधान एवं व्यवस्था सुधार, भ्रष्टाचार-विरोधी कदम तथा चुनाव की तैयारी प्राथमिकता में रहेगी.
संक्षेप में: नेपाल के आंदोलनकारी सेना के सहयोग से पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुषिला कार्की को अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में स्वीकार कर शांति-बहाली और लोकतांत्रिक सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें संविधान में अस्थायी ढील देकर व्यापक जन-प्रतिनिधित्व की कोशिश की जाएगी.
