प्रयागराज: NEET में चयन के बाद भी नहीं बच सकी 18 वर्षीय छात्रा की जान, 8 पन्नों के नोट में बयां किया मानसिक संघर्ष; मौत के बाद मिला MBBS कॉलेज

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना देखने वाली 18 वर्षीय NEET छात्रा ऋतु शर्मा की संदिग्ध आत्महत्या से मौत हो गई। सबसे दुखद पहलू यह है कि छात्रा को जिस मेडिकल कॉलेज में दाखिले का इंतजार था, वहां उसे MBBS की सीट आवंटित हो गई थी, लेकिन यह जानकारी मिलने से पहले ही उसकी जिंदगी खत्म हो चुकी थी।

छात्रा प्रयागराज के झूंसी क्षेत्र स्थित त्रिवेणीपुरम कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहती थी। घटना के बाद पुलिस को उसके कमरे से आठ पन्नों का एक नोट मिला। इसमें छात्रा ने पिछले करीब दो वर्षों से मानसिक परेशानी, बार-बार आने वाले अनचाहे विचारों और पढ़ाई के दौरान होने वाली कठिनाइयों का उल्लेख किया था।

परिवार के लिए यह घटना गहरा सदमा बन गई है। छात्रा के पिता और भाई का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने मामले की जांच की और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।

NEET की तीसरी काउंसलिंग में मिला था MBBS का कॉलेज

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 18 वर्षीय ऋतु शर्मा मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रही थी। उसने वर्ष 2026 की परीक्षा दी थी। उसकी ऑल इंडिया रैंक 10,74,272 आई थी।

पहले दो राउंड की काउंसलिंग में उसे मेडिकल कॉलेज में सीट आवंटित नहीं हो सकी थी। इस कारण वह निराश और परेशान थी। परिवार के अनुसार, उसे मेडिकल में दाखिला मिलने की उम्मीद थी और वह लगातार आगे की प्रक्रिया का इंतजार कर रही थी।

इसी बीच सोमवार को तीसरे राउंड की काउंसलिंग का परिणाम जारी हुआ। इसमें ऋतु को सोनभद्र के सरकारी मेडिकल कॉलेज में EWS-दिव्यांग कोटे के तहत MBBS की सीट आवंटित हुई।

लेकिन विडंबना यह रही कि सीट आवंटन की खुशखबरी परिवार तक पहुंचने से पहले ही छात्रा की मौत हो चुकी थी। जिस मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेकर वह डॉक्टर बनने का सपना पूरा कर सकती थी, वहां तक पहुंचने का अवसर उसे नहीं मिल सका।

आठ पन्नों के नोट में दो साल के मानसिक संघर्ष का जिक्र

पुलिस को छात्रा के कमरे से आठ पन्नों का एक नोट मिला। इसमें उसने अपने मानसिक संघर्ष के बारे में विस्तार से लिखा था।

नोट के अनुसार, छात्रा पिछले लगभग दो वर्षों से बार-बार आने वाले अनचाहे विचारों और शंकाओं से परेशान थी। पढ़ाई करते समय एक ही विषय को बार-बार पढ़ने और जांचने की इच्छा होती थी। यदि वह ऐसा नहीं करती तो उसे किसी गलती या अनहोनी की आशंका सताती थी।

छात्रा ने अपने अनुभवों को ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) के लक्षणों से मिलता-जुलता बताया था। उसने लिखा था कि शुरुआत में वह अपनी परेशानी को सामान्य ओवरथिंकिंग और चिंता समझती थी। बाद में इंटरनेट पर जानकारी पढ़ने के बाद उसे अपने अनुभव OCD से जुड़े होने का संदेह हुआ।

उसने अपने आत्मविश्वास में कमी, असहाय महसूस करने और सामान्य जीवन जीने में आ रही कठिनाइयों का भी उल्लेख किया था।

हालांकि, नोट में लिखे अनुभवों को चिकित्सकीय निदान नहीं माना जा सकता। छात्रा को OCD होने की आधिकारिक चिकित्सकीय पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।

पिता ने बताया- बेटी रातभर कमरे में पढ़ाई करती थी

ऋतु के पिता देवराज शर्मा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं।

परिवार के मुताबिक, बेटी पढ़ाई को लेकर काफी मेहनत करती थी।

वह अक्सर रात देर तक पढ़ती थी और सुबह तक अपने कमरे में रहती थी। इसके बाद दोपहर में उठती थी।

सोमवार को जब काफी देर तक वह कमरे से बाहर नहीं आई तो परिवार के लोगों को चिंता हुई।

परिजनों ने कमरे के अंदर देखा तो ऋतु की मौत हो चुकी थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

सूचना मिलने पर झूंसी पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने भी

घटनास्थल की जांच की। पुलिस ने आवश्यक साक्ष्य जुटाए और मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू की।

पिता और भाई का रो-रोकर बुरा हाल, पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार

बेटी की मौत की खबर से परिवार पूरी तरह टूट गया। ऋतु के जुड़वां भाई ऋषिराज को भी

घटना की जानकारी दी गई। वह देहरादून में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है।

परिवार के लोगों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल था कि जिस बेटी ने

मेडिकल में दाखिले के लिए इतनी मेहनत की, वह इस तरह दुनिया छोड़ जाएगी।

पुलिस की निगरानी में चिकित्सकों के पैनल और वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम कराया गया।

इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार ने दारागंज घाट पर अंतिम संस्कार किया।

पुलिस के अनुसार, घटनास्थल से मिले नोट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की गई।

NEET की तैयारी और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल

प्रयागराज की यह घटना प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे

विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर ध्यान देने की जरूरत बताती है।

NEET जैसी परीक्षाओं में सफलता के लिए विद्यार्थी लंबे समय तक पढ़ाई करते हैं। परीक्षा, रैंक,

काउंसलिंग और कॉलेज आवंटन की अनिश्चितता के कारण कई छात्र मानसिक दबाव महसूस कर सकते हैं।

लेकिन मानसिक परेशानी केवल परीक्षा में असफलता से नहीं जुड़ी होती। कई बार विद्यार्थी

अच्छे परिणाम या सफलता मिलने के बाद भी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझते रहते हैं।

OCD एक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्थिति है, जिसमें अनचाहे विचार और

बार-बार कुछ करने की मजबूरी व्यक्ति के दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। इसका उपचार संभव है।

मनोचिकित्सक और प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ उचित परामर्श और उपचार के जरिए सहायता कर सकते हैं।

परिवार, शिक्षकों और दोस्तों को विद्यार्थियों के व्यवहार में लंबे समय से दिखाई दे रहे

बदलावों को गंभीरता से लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

निष्कर्ष: प्रयागराज की ऋतु शर्मा की मौत ने परिवार के साथ-साथ विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी

गंभीर सवाल खड़े किए हैं। तीसरी काउंसलिंग में MBBS की सीट मिलने के बावजूद छात्रा की मौत हो गई।

उसके आठ पन्नों के नोट में लंबे समय से चल रहे

मानसिक संघर्ष का जिक्र मिला है। यह घटना याद दिलाती है कि शिक्षा और करियर के

साथ विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. प्रयागराज की NEET छात्रा का नाम क्या था?

छात्रा का नाम ऋतु शर्मा था। वह 18 वर्ष की थी और झूंसी के त्रिवेणीपुरम क्षेत्र में रहती थी।

2. ऋतु शर्मा को किस मेडिकल कॉलेज में सीट मिली थी?

तीसरे राउंड की काउंसलिंग में उसे सोनभद्र के सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीट आवंटित हुई थी।

3. छात्रा के नोट में क्या जानकारी मिली?

आठ पन्नों के नोट में उसने करीब दो वर्षों से मानसिक परेशानी,

बार-बार आने वाले अनचाहे विचारों और OCD जैसे लक्षणों का जिक्र किया था।

4. मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए कहां संपर्क करें?

भारत में टेली-मानस हेल्पलाइन नंबर 14416 पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता प्राप्त की जा सकती है।

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