अखिलेश यादव ने धीरेंद्र शास्त्री की यूपी में एंट्री बंद करने की उठाई मांग, बोले- न ब्रज में जगह मिलेगी, न अवध में

लखनऊ, उत्तर प्रदेश: भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथित विवादित टिप्पणी पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में विवाद बढ़ता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मामले में कड़ी नाराजगी जताते हुए धीरेंद्र शास्त्री के उत्तर प्रदेश में प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी से यदुवंशियों और रघुवंशियों, दोनों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब धीरेंद्र शास्त्री को न ब्रज में प्रवेश मिलेगा और न ही अवध में उनका स्वागत होगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर नाकेबंदी का बोर्ड लगाने तक की बात कही। इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति और धार्मिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।

यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ। इसके बाद कई संतों और श्रीकृष्ण भक्तों ने आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने भी सफाई देते हुए माफी मांगी और कहा कि उनका उद्देश्य किसी देवी-देवता का अपमान करना नहीं था।

अखिलेश यादव बोले- यदुवंशियों और रघुवंशियों की भावनाएं हुईं आहत

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने 4 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणी से यदुवंशियों और रघुवंशियों दोनों की भावनाएं आहत हुई हैं।

अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में कहा कि अब न तो कोई सच्चा रघुवंशी उनका स्वागत करेगा और न ही कोई सच्चा यदुवंशी। उन्होंने ब्रज और अवध का उल्लेख करते हुए कहा कि धीरेंद्र शास्त्री को इन दोनों धार्मिक क्षेत्रों में प्रवेश नहीं मिलना चाहिए।

उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर नाकाबंदी का बोर्ड लगाने का सुझाव देते हुए कहा कि उस पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने वालों के प्रदेश में प्रवेश पर रोक लगाने की बात लिखी जानी चाहिए।

अखिलेश यादव ने नेपाल सीमा का भी जिक्र किया और तंज कसते हुए कहा कि यदि वहां से आने का रास्ता खुला रहा तो प्रवेश का दूसरा रास्ता मिल सकता है।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि राजनीतिक और धार्मिक लोगों के आपसी टकराव में भगवान को क्यों लाया जा रहा है। उनके मुताबिक, धार्मिक आस्थाओं को राजनीतिक विवादों का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।

भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, विवाद की शुरुआत मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित एक रामकथा के दौरान हुई टिप्पणी से हुई। कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की मुद्राओं का उल्लेख करते हुए तुलना की थी।

उन्होंने भगवान राम के सीधे खड़े होने और भगवान श्रीकृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा का जिक्र किया था। इसी दौरान अयोध्या और वृंदावन का भी उल्लेख किया गया। इस टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद श्रीकृष्ण भक्तों और कई धार्मिक लोगों ने आपत्ति जताई।

आपत्ति जताने वालों का कहना था कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही समान रूप से पूजनीय हैं। ऐसे में दोनों के स्वरूप और धार्मिक महत्व की तुलना इस तरीके से नहीं की जानी चाहिए, जिससे किसी एक आराध्य को दूसरे से कमतर दिखाने का संदेश जाए।

इस मामले में अखिलेश यादव ने भी पहले प्रतिक्रिया देते हुए धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणियों पर कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि धार्मिक मान्यताओं और आराध्यों के बीच नकारात्मक तुलना से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।

धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी, कहा- किसी भगवान का अपमान करना उद्देश्य नहीं

विवाद बढ़ने के बाद बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी टिप्पणी पर सफाई दी।

उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य भगवान श्रीराम और भगवान

श्रीकृष्ण के बीच किसी तरह का अंतर बताना या किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।

उन्होंने कहा कि यदि उनकी बातों से किसी भक्त या

श्रद्धालु को दुख पहुंचा है तो वह इसके लिए क्षमा चाहते हैं।

धीरेंद्र शास्त्री की इस माफी के बावजूद विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ।

अखिलेश यादव ने अपने ताजा बयान में उत्तर प्रदेश में उनकी एंट्री बंद करने की मांग दोहराई है।

इस पूरे मामले में एक तरफ धार्मिक भावनाओं के सम्मान और सार्वजनिक मंचों पर

जिम्मेदार भाषा के इस्तेमाल की मांग उठ रही है, वहीं दूसरी तरफ

राजनीतिक नेताओं के बयानों से विवाद को लेकर सियासी चर्चा भी तेज हो गई है।

17 नवंबर से प्रतापगढ़ में प्रस्तावित कथा को लेकर भी चर्चा

धीरेंद्र शास्त्री का उत्तर प्रदेश दौरा भी इस विवाद के बीच चर्चा में है। जानकारी के अनुसार,

17 नवंबर 2026 से प्रतापगढ़ में उनकी कथा प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम का आयोजन जनसत्ता दल के

अध्यक्ष और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की ओर से कराया जा रहा है।

अखिलेश यादव के उत्तर प्रदेश में प्रवेश पर रोक लगाने संबंधी बयान के बाद

इस प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

हालांकि अभी तक धीरेंद्र शास्त्री के उत्तर प्रदेश में प्रवेश पर

किसी सरकारी प्रतिबंध या प्रशासनिक आदेश की पुष्टि नहीं हुई है

अखिलेश यादव की मांग को राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक मुद्दों का अपना अलग महत्व रहा है। ऐसे में

इस विवाद का असर आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी पर भी दिखाई दे सकता है।

निष्कर्ष: भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण को लेकर धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद

अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। अखिलेश यादव ने दोनों वंशों की भावनाएं आहत होने का हवाला देते हुए

उत्तर प्रदेश में धीरेंद्र शास्त्री के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है।

वहीं धीरेंद्र शास्त्री अपनी टिप्पणी पर माफी मांग चुके हैं। अब देखना होगा कि प्रतापगढ़ में

17 नवंबर से प्रस्तावित कथा और इस पूरे विवाद पर आगे क्या घटनाक्रम सामने आता है।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. अखिलेश यादव ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ क्या मांग की है?

अखिलेश यादव ने धीरेंद्र शास्त्री के उत्तर प्रदेश में प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है।

2. धीरेंद्र शास्त्री का विवाद किस बयान को लेकर हुआ?

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में रामकथा के दौरान भगवान श्रीराम और

भगवान श्रीकृष्ण की मुद्राओं की तुलना करने वाली टिप्पणी को लेकर विवाद हुआ।

3. क्या धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान पर माफी मांगी है?

हां, धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो संदेश जारी करके कहा कि उनका उद्देश्य

किसी भगवान का अपमान करना नहीं था। उन्होंने भावनाएं आहत होने पर माफी भी मांगी।

4. धीरेंद्र शास्त्री की प्रतापगढ़ में कथा कब प्रस्तावित है?

धीरेंद्र शास्त्री की प्रतापगढ़ में 17 नवंबर 2026 से कथा प्रस्तावित है।

इसका आयोजन राजा भैया की ओर से कराया जा रहा है

read this post :गोरखपुर में भाजपा की बड़ी पदयात्रा आज, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहुंचे; सीएम योगी आदित्यनाथ भी होंगे शामिल