अयोध्या दीपोत्सव पर सीएम योगी का संदेश: जाति की जड़ता समाज को बांटती है, साझा आस्था और संस्कृति जोड़ती है

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के दीपोत्सव को सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि जाति की जड़ता समाज को विभाजित करने का काम करती है, जबकि साझा आस्था और संस्कृति लोगों को एक सूत्र में पिरोती है। मुख्यमंत्री ने दीपोत्सव को ऐसा आयोजन बताया, जिसमें समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग एक साथ शामिल होकर सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में कहा कि अयोध्या का दीपोत्सव सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है। उनके मुताबिक, इस आयोजन में लोगों की पहचान जाति के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी सहभागिता और सामूहिक भावना से होती है। अलग-अलग हाथों से जलाए गए दीपक मिलकर पूरे समाज को रोशन करते हैं।

मुख्यमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियों और आयोजन को लेकर उत्साह बना हुआ है। इस अवसर पर उन्होंने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

जाति की जड़ता समाज को बांटती है: मुख्यमंत्री योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि जाति की जड़ता समाज को बांटने का काम करती है, जबकि साझा आस्था और संस्कृति समाज को जोड़ती है। उन्होंने कहा कि अयोध्या का दीपोत्सव इसी भावना का उदाहरण है, जहां विभिन्न वर्गों और समुदायों के लोग एक साथ उत्सव में भाग लेते हैं।

योगी आदित्यनाथ के अनुसार, सामाजिक एकता केवल विचारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे सार्वजनिक आयोजनों और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से भी दिखाई देना चाहिए। दीपोत्सव में संत-महात्मा, विद्यार्थी, स्वच्छताकर्मी, कुम्हार और व्यापारी सहित समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी इसी दिशा में महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में यह भी रेखांकित किया कि दीपोत्सव का वास्तविक संदेश समाज को जोड़ना और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सामूहिक सम्मान विकसित करना है।

2017 से शुरू हुआ दीपोत्सव, सांस्कृतिक विरासत को मिली नई पहचान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 में अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत की गई थी। उनके अनुसार, इससे रामनगरी की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को व्यापक स्तर पर जन-जन के उत्सव के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की सरकारों पर सांस्कृतिक एकता की शक्ति की उपेक्षा करने और जातीय विभाजन को राजनीति का आधार बनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने दीपोत्सव के माध्यम से अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा देने का प्रयास किया है।

अयोध्या भगवान श्रीराम की नगरी के रूप में देश और दुनिया में विशेष धार्मिक महत्व रखती है।

दीपोत्सव के आयोजन से यहां की परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और

सांस्कृतिक विरासत को बड़े स्तर पर प्रदर्शित किया जाता है। इस आयोजन में

स्थानीय लोगों के साथ श्रद्धालुओं और विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले प्रतिभागियों की भागीदारी भी रहती है।

संत, विद्यार्थी, कुम्हार और स्वच्छताकर्मी भी बनते हैं उत्सव का हिस्सा

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में दीपोत्सव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता समाज के

विभिन्न वर्गों की सहभागिता को बताया। उन्होंने कहा कि संतगण, विद्यार्थी, स्वच्छताकर्मी,

कुम्हार और व्यापारी समान उत्साह तथा श्रद्धा के साथ इस आयोजन में भाग लेते हैं।

इसमें कुम्हारों की भूमिका भी विशेष मानी जाती है, क्योंकि दीपोत्सव में मिट्टी के दीपकों का

उपयोग भारतीय पारंपरिक कला और स्थानीय कारीगरों के काम को पहचान देता है। वहीं, स्वच्छताकर्मियों और

अन्य कर्मचारियों की भागीदारी यह दिखाती है कि बड़े सार्वजनिक

आयोजन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने वाले सभी लोगों का योगदान महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री के संदेश के अनुसार, दीपक भले ही अलग-अलग हाथों में जलते हों,

लेकिन उनका प्रकाश पूरे समाज को एक करता है। यही दीपोत्सव का संदेश और समरस समाज की कल्पना है।

सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता पर दिया जोर

अयोध्या का दीपोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और

सामाजिक सहभागिता से जुड़ा उत्सव भी बन चुका है। इस आयोजन के माध्यम से भारतीय परंपराओं, लोककला,

धार्मिक मान्यताओं और सामूहिक उत्साह को सामने लाने का प्रयास किया जाता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में इसी सामूहिक भावना को प्रमुखता दी।

उनका कहना है कि समाज को जातीय और अन्य विभाजनों से

ऊपर उठकर साझा सांस्कृतिक विरासत तथा आस्था के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए।

दीपोत्सव में अलग-अलग वर्गों के लोगों की भागीदारी सामाजिक समरसता का संदेश देती है।

मुख्यमंत्री ने इसे ऐसे समाज की कल्पना से जोड़ा,

जहां लोगों की पहचान उनके योगदान और सहभागिता से हो।

अब अयोध्या का दीपोत्सव एक बार फिर धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और

सामाजिक एकता के संदेश के साथ चर्चा में है। मुख्यमंत्री

योगी आदित्यनाथ का संदेश इस आयोजन को केवल दीप जलाने तक सीमित न रखकर

समाज को जोड़ने और सामूहिक सहभागिता बढ़ाने की अपील के रूप में भी देखा जा रहा है।

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