राकेश शर्मा की रिपोर्ट
जर्जर 33 हजार की लाइन और वैकल्पिक व्यवस्था में आई खराबी बनी परेशानी की वजह, कई गांवों में दूसरे दिन भी बहाली का प्रयास जारी
अर्नव तूफान के प्रभाव से 29 अक्टूबर की दोपहर शुरू हुई बारिश ने रतनपुर विद्युत उपकेंद्र की बिजली आपूर्ति व्यवस्था की पोल खोल दी। हल्की बारिश के साथ ही 33 हजार और 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइनें ब्रेकडाउन हो गईं। इसके चलते उपकेंद्र से जुड़े कई गांवों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। लगभग 20 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शुक्रवार को कुछ गांवों में आपूर्ति बहाल हो सकी, जबकि कई अन्य गांवों में शनिवार को भी बिजली चालू कराने का प्रयास जारी रहा।
मामला गोरखपुर जिले के रतनपुर विद्युत उपकेंद्र का है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम जनजीवन प्रभावित हुआ। लोगों को घरेलू कामकाज, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ी। सबसे अधिक मुश्किल उन उपभोक्ताओं को हुई, जिन्हें लंबे समय तक बिजली बहाल होने का इंतजार करना पड़ा।
33 हजार की लाइन ब्रेकडाउन, वैकल्पिक व्यवस्था भी हुई फेल
बारिश शुरू होते ही रतनपुर विद्युत उपकेंद्र की 33 हजार वोल्ट की लाइन में खराबी आ गई। बताया जा रहा है कि यह लाइन करीब 40 किलोमीटर दूर बड़हलगंज से आती है। लाइन की दूरी अधिक होने और रास्ता दुर्गम होने के कारण खराबी का पता लगाने तथा उसे ठीक कराने में काफी कठिनाई हुई।
इसके बाद बिजली विभाग ने धुरियापार विद्युत उपकेंद्र से टैपिंग करके रतनपुर की आपूर्ति चालू करने का प्रयास किया, लेकिन इस वैकल्पिक व्यवस्था में भी 11 हजार वोल्ट की लाइन ब्रेकडाउन हो गई। इससे समस्या और गंभीर हो गई।
संविदा विद्युत कर्मचारियों ने बारिश के बीच कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए लाइन दुरुस्त करने का प्रयास किया। करीब 20 घंटे बाद शुक्रवार को कई गांवों में बिजली आपूर्ति बहाल की जा सकी। हालांकि, कुछ गांवों में शनिवार तक भी बिजली चालू करने की कोशिश जारी थी।
40 किलोमीटर दूर से आती है 33 हजार की लाइन
बताया जाता है कि रतनपुर विद्युत उपकेंद्र का पुराना नाम चिल्लूपार विद्युत उपकेंद्र है। यह उपकेंद्र अपने मूल स्थान चिल्लूपार से लगभग 40 किलोमीटर दूर घाघरा नदी के डूब क्षेत्र में स्थित है।
उपकेंद्र की भौगोलिक स्थिति भी बिजली आपूर्ति के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। बरसात के मौसम में घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ का पानी भरने की स्थिति में उपकेंद्र को बंद करना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में इससे जुड़े गांवों को धुरियापार विद्युत उपकेंद्र से जोड़कर बिजली आपूर्ति देने की व्यवस्था की जाती है।
इसके अलावा रतनपुर उपकेंद्र की 33 हजार वोल्ट की लाइन भी लंबे समय से समस्या का कारण बनी हुई है। करीब 40 किलोमीटर दूर से आने वाली इस लाइन के जर्जर होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। आए दिन ब्रेकडाउन होने के कारण उपभोक्ताओं को बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है।
हर बार टैपिंग के सहारे बिजली आपूर्ति की मजबूरी
रतनपुर उपकेंद्र की मुख्य लाइन में खराबी आने पर धुरियापार उपकेंद्र से टैपिंग करके बिजली आपूर्ति चालू करने का प्रयास किया जाता है। लेकिन यह व्यवस्था भी स्थायी समाधान नहीं है।
टैपिंग की प्रक्रिया पूरी करने और वैकल्पिक लाइन चालू करने में कई बार घंटों लग जाते हैं। यदि वैकल्पिक लाइन में भी खराबी आ जाए तो संबंधित गांवों की बिजली आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है।
स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि हर बार खराबी आने के बाद मरम्मत की कोशिश की जाती है, लेकिन जर्जर लाइन और स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
मौसम की चेतावनी के बावजूद क्यों नहीं हुई तैयारी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मौसम विभाग की ओर से बारिश और तूफान को लेकर पहले ही
चेतावनी जारी की गई थी, तो बिजली विभाग ने समय रहते आवश्यक तैयारियां क्यों नहीं कीं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब मौसम से पहले बिजली लाइनों की पेट्रोलिंग, पेड़ों की
छंटाई और जर्जर तारों की मरम्मत कराई जानी चाहिए थी। यदि समय रहते इन कार्यों पर ध्यान दिया गया होता तो
शायद बारिश के दौरान इतनी लंबी बिजली कटौती की स्थिति पैदा नहीं होती।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभाग में मेंटेनेंस के नाम पर
कई बार केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं।
उनका कहना है कि यदि नियमित रूप से धरातल पर रखरखाव कराया जाए तो
छोटी बारिश में पूरी आपूर्ति व्यवस्था ठप होने जैसी स्थिति से बचा जा सकता है।
संविदा कर्मचारियों को बारिश में करना पड़ा काम
बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए संविदा विद्युत कर्मचारियों को बारिश के बीच कठिन परिस्थितियों में
काम करना पड़ा। खराब मौसम और दुर्गम रास्तों के बावजूद कर्मचारियों ने लगातार मेहनत की।
उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते लाइन का रखरखाव और पेट्रोलिंग करा ली गई होती तो
कर्मचारियों को भी बारिश में भीगकर घंटों मरम्मत कार्य नहीं करना पड़ता।
साथ ही ग्रामीणों को भी इतनी लंबी बिजली कटौती का सामना नहीं करना पड़ता।
उपभोक्ताओं ने की जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
लगभग 20 घंटे से अधिक समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से
उपभोक्ताओं में नाराजगी है। उनका कहना है कि बिजली विभाग की जिम्मेदारी केवल
राजस्व वसूली तक सीमित नहीं है। उपभोक्ताओं को बेहतर, सुरक्षित और
निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना भी विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
स्थानीय उपभोक्ताओं ने मांग की है कि रतनपुर उपकेंद्र की जर्जर 33 हजार वोल्ट की
लाइन को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त कराया जाए। साथ ही नियमित पेट्रोलिंग,
पेड़ों की छंटाई और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
अब सवाल यह है कि हर बारिश में बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा?
क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेकर व्यवस्था में सुधार करेंगे या
उपभोक्ताओं को हर मौसम में इसी परेशानी से जूझना पड़ेगा?
खबर से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQ)
1. रतनपुर विद्युत उपकेंद्र में बिजली आपूर्ति क्यों बाधित हुई?
बारिश के दौरान 33 हजार वोल्ट की मुख्य लाइन ब्रेकडाउन हो गई।
धुरियापार से वैकल्पिक आपूर्ति देने की कोशिश में 11 हजार वोल्ट की लाइन भी खराब हो गई।
2. रतनपुर उपकेंद्र से जुड़े गांवों में कितने घंटे बिजली गुल रही?
खबर के अनुसार, कई गांवों में लगभग 20 घंटे से अधिक समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रही।
3. रतनपुर उपकेंद्र की 33 हजार की लाइन कहां से आती है?
यह लाइन करीब 40 किलोमीटर दूर बड़हलगंज से आती है।
4. बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए क्या व्यवस्था की गई?
मुख्य लाइन में खराबी आने के बाद धुरियापार विद्युत उपकेंद्र से टैपिंग करके आपूर्ति चालू करने का प्रयास किया गया।
5. रतनपुर विद्युत उपकेंद्र का पुराना नाम क्या था?
रतनपुर विद्युत उपकेंद्र का पुराना नाम चिल्लूपार विद्युत उपकेंद्र बताया जाता है।
6. उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग से क्या मांग की है?
उपभोक्ताओं ने जर्जर तारों की मरम्मत, नियमित लाइन पेट्रोलिंग,
पेड़ों की छंटाई और स्थायी वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
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