Hamirpur Student News: छात्र सर्वेश शर्मा को 3.5 करोड़ की ग्रांट मिलने का दावा फर्जी, FIR दर्ज; ड्रोन प्रोजेक्ट की जांच शुरू

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा जगत और रक्षा तकनीक से जुड़े लोगों को हैरान कर दिया है। सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थान के छात्र सर्वेश शर्मा ने भारतीय सेना के लिए स्वदेशी ड्रोन विकसित करने के उद्देश्य से 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने का दावा किया था। इस उपलब्धि को लेकर उनकी काफी चर्चा हुई थी और उन्हें सम्मानित भी किया गया था। लेकिन अब इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

रक्षा मंत्रालय से जुड़ी संस्था डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (DIO) ने स्पष्ट किया है कि उसके आधिकारिक रिकॉर्ड में सर्वेश शर्मा या उनसे संबंधित किसी स्टार्टअप को 3.5 करोड़ रुपये की ऐसी कोई ग्रांट मंजूर किए जाने की जानकारी नहीं है। इसके बाद मामले में कथित ऑनलाइन धोखाधड़ी की आशंका सामने आई है। हमीरपुर के सदर थाने में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

इस मामले ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया है क्योंकि छात्र हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरकर घायल हो गया था। उसका चंडीगढ़ में इलाज चल रहा है। पुलिस छात्र के गिरने की परिस्थितियों और कथित ग्रांट से जुड़े दस्तावेजों की अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है।

सर्वेश शर्मा को कैसे मिली थी 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट की जानकारी?

हमीरपुर स्थित सरकारी बहुतकनीकी संस्थान में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र सर्वेश शर्मा ने ‘रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ नाम से ड्रोन परियोजना तैयार करने का दावा किया था। बताया गया था कि यह ड्रोन भारतीय सेना के उपयोग के लिए स्वदेशी तकनीक से विकसित किया जा रहा है।

सितंबर 2026 में इस परियोजना को लेकर 3.5 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मिलने की खबर चर्चा में आई थी। इस उपलब्धि के बाद छात्र को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल सहित कई प्रमुख लोगों ने सम्मानित किया था। 23 सितंबर को राज्यपाल भवन की वेबसाइट पर भी सर्वेश को इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किए जाने का विवरण प्रकाशित हुआ था।

छात्र ने अपनी कंपनी बनाकर अन्य विद्यार्थियों को भी परियोजना से जोड़ा था। बताया गया था कि ग्रांट मिलने के बाद टीम के सदस्यों को वेतन दिया जाएगा। इस वजह से संस्थान के अन्य छात्रों में भी उत्साह था।

हालांकि, बाद में रक्षा नवाचार संगठन की आधिकारिक सफाई ने पूरे दावे को संदेह के घेरे में ला दिया। संस्था ने कहा कि उसके रिकॉर्ड में इस नाम से किसी छात्र या स्टार्टअप को 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर नहीं की गई है।

DIO ने ग्रांट के दावे को बताया फर्जी, FIR दर्ज

28 अक्टूबर 2026 को Innovations for Defence Excellence (iDEX) और डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन की ओर से सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी किया गया। इसमें साफ कहा गया कि सर्वेश शर्मा को भारतीय सेना के लिए ड्रोन बनाने के नाम पर 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने की खबर फर्जी है।

इस स्पष्टीकरण के बाद संस्थान और प्रशासन के स्तर पर मामले की पड़ताल तेज हो गई। कॉलेज प्रबंधन को सेना से संपर्क किए जाने और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद मामले की गंभीरता का पता चला।

कॉलेज के प्राचार्य की शिकायत पर हमीरपुर के सदर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 319 और 336(3) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C और 66D के तहत मामला दर्ज किया है।

जांच में कथित ग्रांट स्वीकृति से जुड़े लगभग 40 पन्नों के अनुबंध, ईमेल, डिजिटल पत्राचार और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पड़ताल की जा रही है। प्रारंभिक आशंका है कि फर्जी वेबसाइट और दस्तावेजों के माध्यम से छात्र को ग्रांट स्वीकृत होने का भरोसा दिलाया गया हो सकता है।

फिलहाल पुलिस जांच कर रही है कि इन दस्तावेजों को किसने तैयार किया, कथित ईमेल कहां से भेजे गए और इस पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका रही।

हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरकर घायल हुआ छात्र, चंडीगढ़ में इलाज

ग्रांट विवाद के बीच सर्वेश शर्मा के साथ हुई दुर्घटना ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। जानकारी के अनुसार, छात्र हॉस्टल की तीसरी मंजिल पर स्थित अपने कमरे की बालकनी से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था।

उसे इलाज के लिए चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर में भर्ती कराया गया। वहां उसके जबड़े की सर्जरी की गई है।

इसके अलावा उसके पैर में भी कई फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, छात्र ने गिरने की घटना को दुर्घटना बताया है। हालांकि,

कमरे में अंदर से कुंडी लगी होने सहित घटनास्थल से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच की जा रही है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छात्र के गिरने और कथित ग्रांट विवाद के बीच

किसी संबंध की अभी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस दोनों पहलुओं की जांच कर रही है।

इसलिए घटना को लेकर किसी भी तरह की अटकल लगाना उचित नहीं होगा।

हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग ने भी संस्थान से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि परियोजना और ग्रांट से

संबंधित जानकारी संस्थान तक किस माध्यम से पहुंची और उसकी पुष्टि किस स्तर पर की गई थी।

छात्रों और संस्थानों के लिए बड़ा सबक, सरकारी ग्रांट की पुष्टि जरूरी

हमीरपुर का यह मामला विद्यार्थियों, स्टार्टअप संचालकों और शिक्षण संस्थानों के लिए

महत्वपूर्ण सीख लेकर आया है। आज के समय में सरकार की ओर से कई योजनाओं के तहत नवाचार, शोध,

तकनीकी विकास और स्टार्टअप को आर्थिक सहायता दी जाती है।

ऐसे में किसी भी सरकारी ग्रांट, रक्षा परियोजना या संस्थागत फंडिंग की जानकारी मिलने पर

उसकी आधिकारिक पुष्टि करना बेहद जरूरी है। केवल ईमेल, वेबसाइट, पत्र या

अनुबंध देखकर किसी आर्थिक सहायता को स्वीकृत मान लेना जोखिम भरा हो सकता है।

विशेष रूप से रक्षा मंत्रालय, सरकारी विभागों और तकनीकी संस्थाओं के नाम पर आने वाले

संदेशों की संबंधित आधिकारिक पोर्टल और विभाग से जांच करनी चाहिए। किसी भी तरह की फीस,

बैंक जानकारी या निजी दस्तावेज साझा करने से पहले भी सावधानी बरतनी चाहिए।

इस मामले में पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि कथित

फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए और छात्र को किस तरह ग्रांट मिलने का विश्वास दिलाया गया।

निष्कर्ष

हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा से जुड़ा 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट का मामला

अब पुलिस और तकनीकी शिक्षा विभाग की जांच के दायरे में है। रक्षा

नवाचार संगठन ने ग्रांट मंजूर होने के दावे को खारिज कर दिया है और

एफआईआर दर्ज होने के बाद कथित ऑनलाइन धोखाधड़ी के पहलुओं की जांच की जा रही है।

वहीं, घायल छात्र के स्वास्थ्य और हॉस्टल से गिरने की

परिस्थितियों को लेकर भी जानकारी सामने आने का इंतजार है।

अब सभी की नजर पुलिस जांच पर है, जिससे इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. सर्वेश शर्मा कौन हैं?

सर्वेश शर्मा हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थान के कंप्यूटर

इंजीनियरिंग के छात्र हैं। वह ‘रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ नामक ड्रोन परियोजना को लेकर चर्चा में आए थे।

2. क्या सर्वेश शर्मा को 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली थी?

नहीं। डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन ने स्पष्ट किया है कि उसके आधिकारिक रिकॉर्ड में

सर्वेश शर्मा या उनसे जुड़े किसी स्टार्टअप को ऐसी कोई ग्रांट मंजूर होने का उल्लेख नहीं है।

3. सर्वेश शर्मा के मामले में FIR क्यों दर्ज हुई?

कॉलेज प्राचार्य की शिकायत पर कथित फर्जी ग्रांट दस्तावेजों, डिजिटल पत्राचार और

ऑनलाइन धोखाधड़ी की आशंका को लेकर हमीरपुर के सदर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।

4. सर्वेश शर्मा की तबीयत कैसी है?

सामने आई जानकारी के अनुसार, हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरने के बाद उनका चंडीगढ़ स्थित

पीजीआईएमईआर में इलाज किया गया। उनके जबड़े की सर्जरी हुई और पैर में भी कई फ्रैक्चर बताए गए हैं।

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