गोरखपुर, उत्तर प्रदेश | 17 अक्टूबर 2026
राकेश शर्मा की रिपोर्ट
परिचय
गोरखपुर के गोला थाना क्षेत्र के जानीपुर और आसपास के गांवों में बाघ जैसे जंगली जानवर की चर्चा से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने संभावित ठिकानों पर सर्च अभियान चलाया। अधिकारियों को मिले पैरों के निशानों के आधार पर जानवर के फिशिंग कैट होने का शुरुआती अनुमान है।
जानीपुर में बाघ की चर्चा से दहशत, वन विभाग ने चलाया सर्च अभियान
गोरखपुर। जिले के गोला थाना क्षेत्र के ग्राम जानीपुर और आसपास के गांवों में बाघ जैसे जंगली जानवर के दिखाई देने की चर्चा के बाद ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया। सोशल मीडिया पर जानवर से संबंधित वीडियो प्रसारित होने के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई। मामले की जानकारी मिलने पर वन विभाग की टीम ने शुक्रवार सुबह क्षेत्र में पहुंचकर जांच-पड़ताल की और संभावित ठिकानों पर तलाश अभियान चलाया।
वन विभाग की टीम ने बड़हलगंज रेंज के क्षेत्राधिकार शिवजीत सिंह और बांसगांव रेंज के अधिकारी आरके श्रीवास्तव के नेतृत्व में अभियान चलाया। इस दौरान डिप्टी रेंजर सुधीर कुमार के साथ रेस्क्यू टीम के सदस्य मोहित कश्यप, जितेंद्र कुमार, मोती और सिद्धार्थ भी मौजूद रहे। अभियान के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने भी टीम को जानकारी देकर सहयोग किया।
कई गांवों के आसपास जंगली जानवर दिखने की चर्चा
ग्रामीणों के अनुसार, पश्चिम बलिया, खखरी बलिया गांव के पास, सिधारी गांव के बाहरी हिस्से और भरवलिया टोले के आसपास जंगली जानवर दिखाई देने की चर्चा थी। कुछ युवकों ने तालाब के किनारे जानवर देखने का दावा किया था। इसके बाद ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी और जानवर की पहचान करने की मांग की।
बृहस्पतिवार रात ग्रामीण अपने पालतू पशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहे। कुछ लोग लाठी-डंडे लेकर पहरेदारी करते नजर आए। ग्रामीणों को आशंका थी कि यदि वास्तव में कोई जंगली जानवर क्षेत्र में मौजूद है, तो वह पालतू पशुओं या लोगों के लिए खतरा बन सकता है।
तालाब के किनारे मिले पैरों के निशान
शुक्रवार सुबह वन विभाग की टीम उस तालाब के किनारे पहुंची, जहां युवकों ने जानवर देखने की बात कही थी। टीम ने तालाब के आसपास और संभावित ठिकानों की जांच की। इस दौरान जमीन पर मिले पैरों के निशानों को भी देखा गया। अधिकारियों के अनुसार, वहां छोटे बिल्ली जैसे पैरों के निशान मिले, जिनके आधार पर जानवर की पहचान को लेकर शुरुआती अनुमान लगाया गया।
जानवर की तलाश के लिए दोपहर तक अभियान जारी रहा। इस दौरान पटाखे फोड़कर भी उसे खोजने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई जंगली जानवर दिखाई नहीं दिया।
जांच के बावजूद उसकी मौजूदगी और वास्तविक पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।
बाघ नहीं, फिशिंग कैट होने की जताई गई संभावना
बड़हलगंज रेंज के क्षेत्राधिकार शिवजीत सिंह के अनुसार, इस इलाके में बाघ की मौजूदगी की संभावना बेहद कम है।
उन्होंने बताया कि सरयू नदी में बाढ़ के दौरान कुछ जंगली जानवर आसपास के क्षेत्रों में पहुंच सकते हैं।
शुरुआती अनुमान है कि दिखाई देने वाला जानवर फिशिंग कैट हो सकता है, जो मछलियों की गंध से तालाब के किनारे आया हो।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर एआई की मदद से संवर्धित तस्वीरें प्रसारित की जा रही हैं।
ऐसी तस्वीरों के कारण किसी जानवर की पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
इसलिए केवल वायरल वीडियो या तस्वीरों के आधार पर उसे बाघ मान लेना उचित नहीं है।
वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की दी सलाह
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट सूचना या अफवाह पर भरोसा न करें।
यदि क्षेत्र में दोबारा कोई संदिग्ध जंगली जानवर दिखाई देता है, तो उसके पास जाने, पीछा करने या उसे घेरने का प्रयास न करें।
इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित तरीके से जांच कर सके।
फिलहाल, जानीपुर और आसपास के गांवों में चर्चा का विषय बने इस जानवर की वास्तविक पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वन विभाग की शुरुआती आशंका फिशिंग कैट की ओर है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष के लिए प्रमाणिक पहचान जरूरी है।
Headings
जानीपुर और आसपास के गांवों में जंगली जानवर की चर्चा से दहशत
तालाब के पास मिले पैरों के निशान, वन विभाग ने की जांच
बाघ की संभावना कम, फिशिंग कैट होने का शुरुआती अनुमान
वन विभाग की अपील: अफवाहों से बचें, जानवर दिखने पर दें सूचना
Facts/Details
- स्थान: जानीपुर और आसपास के गांव, गोला थाना क्षेत्र, गोरखपुर।
- जांच की तारीख: शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026।
- मुख्य कार्रवाई: वन विभाग की टीम ने संभावित ठिकानों पर सर्च अभियान चलाया।
- जांच में क्या मिला: तालाब के पास छोटे बिल्ली जैसे पैरों के निशान मिलने की जानकारी दी गई।
- बाघ की मौजूदगी: अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में बाघ होने की संभावना बेहद कम है।
- शुरुआती अनुमान: जानवर फिशिंग कैट हो सकता है।
- सोशल मीडिया: वायरल वीडियो और एआई से संवर्धित तस्वीरों से भ्रम फैलने की आशंका जताई गई।
- वर्तमान स्थिति: जानवर की वास्तविक पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
- सावधानी: जानवर दिखाई देने पर उसके पास न जाएं और वन विभाग को सूचना दें।
Statement
बड़हलगंज रेंज के क्षेत्राधिकार शिवजीत सिंह के अनुसार, जानीपुर क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की संभावना बेहद कम है।
शुरुआती जांच में फिशिंग कैट होने का अनुमान लगाया गया है। उन्होंने ग्रामीणों को सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट तस्वीरों और वीडियो से सावधान रहने की सलाह दी। किसी संदिग्ध जंगली जानवर के दिखाई देने पर उसके पास जाने या उसे घेरने के बजाय वन विभाग को सूचना देने की अपील की गई है।
FAQ
(अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: जानीपुर में बाघ दिखाई देने की खबर कहां से आई?
उत्तर: ग्रामीणों के अनुसार, जानीपुर और आसपास के गांवों में जंगली जानवर दिखाई देने की चर्चा सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित होने के बाद बढ़ी।
प्रश्न 2: क्या वन विभाग ने बाघ की पुष्टि की है?
उत्तर: नहीं। वन विभाग ने बाघ की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों के अनुसार, इसकी संभावना बेहद कम है।
प्रश्न 3: फिशिंग कैट क्या होती है?
उत्तर: फिशिंग कैट एक जंगली बिल्ली प्रजाति है, जो पानी के आसपास रहती है और मछलियों सहित अन्य छोटे जीवों का शिकार करती है।
प्रश्न 4: जंगली जानवर दिखाई देने पर क्या करना चाहिए?
उत्तर: उससे दूरी बनाए रखें, पीछा न करें और उसे घेरने की कोशिश न करें। तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
प्रश्न 5: क्या जानवर की पहचान हो गई है?
उत्तर: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जानवर की वास्तविक पहचान की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जानीपुर में बाघ की चर्चा के बाद वन विभाग ने जांच अभियान चलाया सुरू कर दिया है।
लेकिन अब तक बाघ की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई है।
फिशिंग कैट होने का शुरुआती अनुमान है।
ग्रामीणों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना वन विभाग को देने की जरूरत है।