गोरखपुर में चाइनीज मांझे का कहर, 35 वर्षीय रमेश कन्नौजिया की मौत

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश | 10 अक्टूबर 2026

परिचय

गोरखपुर में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे से एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। तिवारीपुर थाना क्षेत्र के इलाहीबाग बंधे पर मोपेड से जा रहे 35 वर्षीय रमेश कन्नौजिया की गर्दन में धारदार मांझा फंसने से गंभीर चोट आई। उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम और स्थानीय लोगों में आक्रोश है।

मुख्य खबर

इलाहीबाग बंधे पर हुआ दर्दनाक हादसा

गोरखपुर शहर में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे से होने वाले हादसों ने एक बार फिर आम लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तिवारीपुर थाना क्षेत्र के इलाहीबाग बंधे पर शनिवार को हुई घटना में सूरजकुंड निवासी रमेश कन्नौजिया की जान चली गई। उनकी उम्र करीब 35 वर्ष बताई गई है। परिजनों के अनुसार, वह किराने की दुकान पर काम करके अपना परिवार चलाते थे।

मिली जानकारी के मुताबिक, रमेश अपनी मोपेड से इलाहीबाग बंधे की तरफ से गुजर रहे थे। इसी दौरान हवा में लटक रहा धारदार मांझा उनकी गर्दन में फंस गया। अचानक हुई इस घटना में उनकी गर्दन पर गहरी चोट आई और काफी खून बहने लगा। संतुलन बिगड़ने के कारण उनकी मोपेड सड़क किनारे गिर गई।

हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने मदद की और गंभीर रूप से घायल रमेश को जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना से उनके परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इलाके में भी हादसे को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।

प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझे पर रोक क्यों नहीं?

चाइनीज या सिंथेटिक मांझा अपनी धार और मजबूती के कारण बेहद खतरनाक माना जाता है। सामान्य सूती धागे की तुलना में यह लंबे समय तक हवा में लटका रह सकता है। सड़क, पुल और फ्लाईओवर से गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह गंभीर खतरा पैदा करता है। गर्दन और चेहरे जैसे संवेदनशील हिस्सों पर लगने से जानलेवा चोट लग सकती है।

गोरखपुर में पहले भी पतंग के धारदार मांझे से राहगीरों और बाइक सवारों के घायल होने की घटनाओं का जिक्र सामने आता रहा है। राजघाट पुल, डोमिनगढ़ और शहर के अन्य मार्गों पर ऐसे हादसों को लेकर चिंता जताई जाती रही है। इसके बावजूद अवैध बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी नियंत्रण की जरूरत महसूस की जा रही है।

कार्रवाई के दावों के बीच उठे सवाल

त्योहारों और पतंगबाजी के मौसम में प्रतिबंधित मांझे की बिक्री रोकने के लिए पुलिस तथा प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जाती है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर उठ रही शिकायतों के बीच यह सवाल महत्वपूर्ण है कि प्रतिबंधित धागा बाजारों और लोगों तक कैसे पहुंच रहा है।

केवल दुकानों पर छिटपुट छापेमारी या चेतावनी जारी करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए बिक्री के स्रोतों, भंडारण स्थलों और आपूर्ति करने वालों की जांच आवश्यक है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध लागू कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, पतंगबाजी करने वालों को भी प्रतिबंधित मांझे के खतरों के प्रति जागरूक करना जरूरी है।

दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो?

खुले रास्तों, पुलों और फ्लाईओवरों पर गुजरने वाले लोगों को हवा में लटकते धागों से विशेष खतरा रहता है।

दोपहिया वाहन चालकों को सड़क पर चलते समय सतर्क रहना चाहिए।

हालांकि, किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी केवल राहगीरों पर नहीं डाली जा सकती।

खतरनाक मांझे की बिक्री और इस्तेमाल रोकना तथा जोखिम वाले स्थानों पर प्रभावी निगरानी रखना भी आवश्यक है।

प्रशासन को चाहिए कि संवेदनशील मार्गों पर निगरानी बढ़ाई जाए और प्रतिबंधित मांझे की शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाए। स्थानीय नागरिक भी ऐसे धागे की बिक्री या इस्तेमाल की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं। पक्षियों और अन्य जीवों की सुरक्षा के लिहाज से भी इस प्रकार के मांझे का इस्तेमाल गंभीर चिंता का विषय है।

प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई की मांग

रमेश कन्नौजिया की मौत के बाद प्रतिबंधित चाइनीज मांझे के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग फिर तेज हो गई है।

लोगों की अपेक्षा है कि संबंधित विभाग केवल आदेश जारी करने तक सीमित न रहें,

बल्कि बाजारों में जांच, अवैध आपूर्ति पर रोक और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाएं।

इस घटना ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि हवा में लटकता हुआ धारदार मांझा किसी भी राहगीर के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक सख्ती, सार्वजनिक जागरूकता और कानून का पालन बेहद जरूरी है।

Facts/Details

  • मृतक: रमेश कन्नौजिया
  • उम्र: लगभग 35 वर्ष
  • निवास: सूरजकुंड, गोरखपुर
  • घटनास्थल: इलाहीबाग बंधा:
  • तिवारीपुर, गोरखपुर
  • हादसे का कारण: गर्दन में धारदार मांझा फंसने से गंभीर चोट
  • अस्पताल: जिला अस्पताल, गोरखपुर
  • परिणाम: इलाज के दौरान मौत
  • मुख्य मुद्दा: प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी रोक

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. गोरखपुर में चाइनीज मांझे से किसकी मौत हुई?

इलाहीबाग बंधे पर हुए हादसे में सूरजकुंड निवासी 35 वर्षीय रमेश कन्नौजिया की मौत हुई।

2. यह हादसा कहां हुआ?

यह घटना गोरखपुर के तिवारीपुर थाना क्षेत्र स्थित इलाहीबाग बंधे पर हुई।

3. रमेश कन्नौजिया के साथ हादसा कैसे हुआ?

जानकारी के अनुसार, मोपेड से गुजरते समय हवा में लटक रहा धारदार मांझा उनकी गर्दन में फंस गया, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई।

. 4 चाइनीज मांझा खतरनाक क्यों है?

इसकी धार और मजबूती के कारण गर्दन, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोट लग सकती है। यह दोपहिया वाहन चालकों और पक्षियों के लिए भी खतरनाक है।

5. चाइनीज मांझे की बिक्री रोकने के लिए क्या जरूरी है?

प्रभावी बाजार जांच, अवैध आपूर्ति पर रोक, नियमों के अनुसार कानूनी कार्रवाई और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।

गोरखपुर के इलाहीबाग बंधे पर रमेश कन्नौजिया की मौत ने प्रतिबंधित चाइनीज मांझे के खतरे को फिर उजागर किया है।

ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक सख्ती, नियमित निगरानी और जनजागरूकता जरूरी है।

सुरक्षित पतंगबाजी और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

UP News: सीएम योगी के सख्त निर्देश, जनशिकायतों का 24 घंटे में दें जवाब; लापरवाही पर होगी कार्रवाई