Oplus_0
तत्कालीन आरटीसी प्रभारी पाए गए दोषी
डीआईजी-सेनानायक भी जांच के घेरे में
महिला रिक्रूट हंगामा : परिनिंदा प्रविष्टि से दंड का सुझाव, सर्विस बुक में होगा दर्ज
गोरखपुर ब्यूरो
पीएसी की 26वीं बटालियन में महिला रिक्रूटों के विरोध में तत्कालीन आरटीसी प्रभारी दोषी पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट में उन्हें ज़िम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन डीआईजी और सेनानायक आनंद कुमार भी जांच के घेरे में आए हैं। शासन स्तर पर इनके खिलाफ भी जांच कराए जाने का निर्णय लिया गया है।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन प्रभारी ने महिला रिक्रूटों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया और न ही समस्या का समाधान किया। इसकी वजह से बटालियन में हालात बिगड़े और महिला रिक्रूटों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन आरटीसी प्रभारी परिनिंदा प्रविष्टि से दंडित किए जाएंगे और यह प्रविष्टि उनकी सर्विस बुक में दर्ज की जाएगी।
📌 क्या है परिनिंदा?
पुलिस नियमावली के अनुसार, परिनिंदा प्रविष्टि (Censure Entry) एक दंड है जो अधिकारी या कर्मचारी की सेवा पुस्तिका में दर्ज किया जाता है। इससे भविष्य की पदोन्नति और सेवाओं पर असर पड़ता है।
📌 तत्कालीन डीआईजी और सेनानायक के खिलाफ भी शासकीय स्तर से हो रही जांच
रिपोर्ट के उच्चाधिकारियों को सौंपे जाने के बाद शासन ने तत्कालीन डीआईजी और सेनानायक की भूमिका की भी जांच कराने का निर्णय लिया है।
👉 नीचे तस्वीर में –
23 जुलाई को पीएसी 26वीं बटालियन के मुख्य गेट के बाहर प्रदर्शन करती महिला आरक्षी
