बाढ़ के बढ़ते खतरे के बीच डीएम ने संभाला मोर्चा, नाव से गांव पहुंचे दीपक मीणा

राकेश शर्मा की रिपोर्ट

39 प्रभावित गांवों का निरीक्षण, 58 नाव और 15 मोटर बोट सक्रिय; ग्रामीणों से सीधे संवाद कर जानी समस्याएं

गोरखपुर। राप्ती, रोहिन, धाधरा और सरयू नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच गोरखपुर जिला प्रशासन ने संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने गुरुवार को बाढ़ प्रभावित और

संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान डीएम खुद नाव से प्रभावित गांवों तक पहुंचे और

ग्रामीणों से सीधे बातचीत कर जलभराव, आवागमन और राहत व्यवस्था की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ की स्थिति में

आम लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी व्यक्ति को आवागमन, भोजन,

स्वास्थ्य सुविधा या सुरक्षा से जुड़ी परेशानी न हो, इसके लिए पहले से पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं।

39 गांव बाढ़ से प्रभावित

जिला प्रशासन के अनुसार वर्तमान में गोरखपुर के 39 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में

राहत एवं बचाव कार्यों के साथ लोगों के आवागमन के लिए 58 नाव और 15 मोटर बोट सक्रिय की गई हैं।

डीएम ने अधिकारियों से नावों और मोटर बोट की उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि

जिस क्षेत्र में अतिरिक्त नाव या मोटर बोट की आवश्यकता हो, वहां बिना किसी देरी के संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

नाव से प्रभावित गांवों तक पहुंचे डीएम

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी दीपक मीणा स्वयं नाव के माध्यम से प्रभावित गांवों में पहुंचे।

उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर मौके की वास्तविक स्थिति जानी।

ग्रामीणों से जलभराव, आने-जाने में हो रही दिक्कत, राहत सामग्री और

प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली गई। ग्रामीणों की

समस्याएं सुनने के बाद डीएम ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

उन्होंने विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा।

जलस्तर पर लगातार निगरानी के निर्देश

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को नदियों के जलस्तर में हो रहे बदलाव पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि संवेदनशील गांवों में राहत एवं बचाव से जुड़े सभी जरूरी संसाधन पहले से

उपलब्ध होने चाहिए, ताकि अचानक स्थिति बिगड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

राप्ती, रोहिन, धाधरा और सरयू नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है।

किसी भी सूचना को नजरअंदाज न करें अधिकारी

डीएम ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ या जलभराव से संबंधित किसी भी सूचना को हल्के में न लिया जाए।

यदि किसी नए क्षेत्र में पानी बढ़ने की जानकारी मिलती है या जलस्तर में अचानक वृद्धि होती है तो इसकी सूचना तत्काल उच्चाधिकारियों को दी जाए। आवश्यकता पड़ने पर राहत और बचाव दल को तुरंत मौके पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

नावों की व्यवस्था की समीक्षा

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने प्रभावित गांवों में तैनात नावों की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में लोगों के आवागमन के लिए नावों की जरूरत है, वहां पर्याप्त नाव उपलब्ध रहनी चाहिए।

वहीं, मोटर बोट को आपात स्थिति के लिए तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर संवेदनशील क्षेत्रों में तेजी से राहत एवं बचाव कार्य किया जा सके।

राहत-बचाव में विभागों के बीच समन्वय पर जोर

डीएम ने राजस्व, सिंचाई, पुलिस, स्वास्थ्य और अन्य संबंधित विभागों की टीमों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में सभी विभागों को एक-दूसरे के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना होगा।

प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक समय पर मदद पहुंचाना है। इसके लिए क्षेत्र में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को लगातार ग्रामीणों के संपर्क में रहने को कहा गया है।

बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

बाढ़ की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को हो सकती है। इसे देखते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को ऐसे लोगों की पहचान कर उनकी सुरक्षा और जरूरत के अनुसार मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी तैयार रखने को कहा गया है।

आपदा की स्थिति में समय सबसे महत्वपूर्ण

जिलाधिकारी दीपक मीणा ने अधिकारियों से कहा कि आपदा की स्थिति में समय का विशेष महत्व होता है। सूचना मिलने के बाद राहत और बचाव दल को मौके पर पहुंचने में देरी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को क्षेत्र में लगातार भ्रमण करने और स्थानीय लोगों से संपर्क बनाए रखने को कहा, ताकि किसी भी समस्या की जानकारी प्रशासन तक समय पर पहुंच सके।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

गोरखपुर जिला प्रशासन की ओर से नदी किनारे बसे संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में नए प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत और बचाव संसाधन भेजने की तैयारी की गई है।

58 नाव और 15 मोटर बोट की सक्रियता के साथ प्रशासन प्रभावित गांवों में आवागमन और

आपातकालीन सहायता व्यवस्था को बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।

लापरवाही पर कार्रवाई के संकेत

डीएम ने स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर

लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को

अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासन संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह सक्रिय है और

जरूरत के अनुसार संसाधनों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जाएगा।

ये अधिकारी रहे मौजूद

निरीक्षण के दौरान विधायक राजेश त्रिपाठी, एडीएम वित्त एवं राजस्व जय प्रकाश एस,

एसडीएम मनीष कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

निष्कर्ष

गोरखपुर में नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच जिला प्रशासन ने

बाढ़ से निपटने की तैयारियों को तेज कर दिया है।

डीएम दीपक मीणा का प्रभावित गांवों में नाव से पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे संवाद करना

प्रशासन की जमीनी तैयारियों का हिस्सा रहा। फिलहाल 39 प्रभावित गांवों में 58 नाव और 15 मोटर बोट सक्रिय हैं और

प्रशासन की नजर नदी के जलस्तर तथा संवेदनशील क्षेत्रों पर बनी हुई है।

FAQ

1. गोरखपुर में कितने गांव बाढ़ से प्रभावित हैं?
जिला प्रशासन के अनुसार वर्तमान में 39 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।

2. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कितनी नाव लगाई गई हैं?
प्रशासन के अनुसार 58 नाव और 15 मोटर बोट सक्रिय की गई हैं।

3. डीएम दीपक मीणा ने क्या किया?
डीएम ने बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया और नाव से गांवों तक पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे बातचीत की।

4. गोरखपुर में किन नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है?
राप्ती, रोहिन, धाधरा और सरयू नदियों के जलस्तर और तटवर्ती क्षेत्रों पर निगरानी रखी जा रही है।

read this post :जौनपुर में 1.50 करोड़ रुपये के सरकारी ऋण गबन का मामला, EOW वाराणसी ने आरोपी एजेंट को किया गिरफ्तार