परिचय
मुंबई | 24 सितंबर 2026
मुंबई में त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले शोर और ध्वनि प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सार्वजनिक सड़कों पर लाउडस्पीकर, डीजे, लेजर बीम और पटाखों के इस्तेमाल को लेकर नियमों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने प्रशासन से नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की अपेक्षा जताई।
मुख्य खबर
त्योहारों का मौसम शुरू होने के साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले आयोजनों में तेज आवाज, डीजे, लाउडस्पीकर और पटाखों के इस्तेमाल को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने सार्वजनिक सड़कों और अन्य स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों के पालन पर सख्ती दिखाते हुए प्रशासन को कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत के निर्देशों के अनुसार, सार्वजनिक सड़कों पर लाउडस्पीकर और डीजे के इस्तेमाल के साथ-साथ तेज आवाज में संगीत बजाने तथा लेजर बीम के इस्तेमाल पर भी नियमों का पालन करना होगा। त्योहारों के दौरान पटाखे चलाने को लेकर भी निर्धारित नियमों और प्रतिबंधों का पालन जरूरी होगा।
अदालत ने माना कि त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक स्थानों पर एकत्र होते हैं। ऐसे में तेज आवाज और पटाखों के कारण ध्वनि प्रदूषण की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे लागू नियमों का पालन सुनिश्चित करें।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस गिरिश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने शोर प्रदूषण से संबंधित नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत पर जोर दिया। अदालत की ओर से प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए और नियमों के पालन में लापरवाही न बरतने की बात कही गई।
अदालत के निर्देश ऐसे समय आए हैं जब त्योहारों के दौरान सार्वजनिक कार्यक्रमों, जुलूसों और धार्मिक आयोजनों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों तथा संगीत का इस्तेमाल बढ़ जाता है। ऐसे आयोजनों में ध्वनि की निर्धारित सीमा और समय संबंधी नियमों का पालन करना आवश्यक है।
पटाखों के मामले में भी अदालत ने नियमों के अनुरूप इस्तेमाल पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर अत्यधिक शोर को नियंत्रित करना और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों को प्रभावी बनाना है।
त्योहारों में लाउडस्पीकर और डीजे पर क्या कहा गया?
अदालत ने सार्वजनिक सड़कों पर लाउडस्पीकर और डीजे के इस्तेमाल तथा तेज आवाज में संगीत बजाने को लेकर नियमों के पालन पर जोर दिया है। आयोजनों में निर्धारित नियमों और अनुमतियों का पालन जरूरी रहेगा।
पटाखे और लेजर बीम के इस्तेमाल पर भी सख्ती
अदालत के निर्देशों में पटाखों और लेजर बीम के इस्तेमाल को भी शामिल किया गया है। त्योहारों के दौरान इनका इस्तेमाल लागू नियमों के अनुरूप ही किया जाना होगा।
प्रशासन की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
पीठ ने शोर प्रदूषण से जुड़े नियमों को लागू करने में प्रशासन की भूमिका पर जोर दिया। निर्देशों का
उद्देश्य नियमों को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।
Facts/Details
बॉम्बे हाईकोर्ट ने त्योहारों के दौरान शोर प्रदूषण से जुड़े नियमों के पालन पर जोर दिया।
सार्वजनिक सड़कों पर लाउडस्पीकर और डीजे के इस्तेमाल को लेकर सख्ती की गई।
तेज आवाज में संगीत बजाने पर नियमों का पालन जरूरी होगा।
पटाखों और लेजर बीम के इस्तेमाल को लेकर भी निर्देश दिए गए।
मामले की सुनवाई जस्टिस गिरिश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने की।
प्रशासन को नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभानी होगी।
Statement
अदालत की पीठ ने शोर प्रदूषण से जुड़े नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया।
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि नियमों के पालन में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण है।
त्योहारों के दौरान सार्वजनिक आयोजनों में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
FAQ
Q1. बॉम्बे हाईकोर्ट ने किस मामले में सख्ती दिखाई है?
त्योहारों के दौरान शोर प्रदूषण और सार्वजनिक स्थानों पर तेज आवाज से जुड़े नियमों के पालन को लेकर।
Q2. किन गतिविधियों पर नियमों के पालन पर जोर दिया गया है?
लाउडस्पीकर, डीजे, तेज आवाज में संगीत, लेजर बीम और पटाखों के इस्तेमाल पर।
Q3. प्रशासन की क्या जिम्मेदारी है?
प्रशासन को लागू नियमों का प्रभावी तरीके से पालन सुनिश्चित करना होगा।
Q4. मामले की सुनवाई किस पीठ ने की?
जस्टिस गिरिश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने मामले की सुनवाई की।
बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों से त्योहारों के दौरान ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों के पालन पर जोर बढ़ा है।
अब संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि सार्वजनिक
आयोजनों में निर्धारित नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।