पितृपक्ष के दौरान काशी में पितरों के तर्पण और श्राद्ध की परंपरा अब डिजिटल माध्यम से भी जुड़ गई है। विदेश में रहने वाले कई भारतीय और अन्य श्रद्धालु, जो किसी वजह से वाराणसी नहीं पहुंच पा रहे हैं, वीडियो कॉल के जरिए काशी में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ रहे हैं।
काशी में कुछ कर्मकांडी पुरोहितों और ऑनलाइन धार्मिक सेवा उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं की ओर से ई-तर्पण, पिंडदान और त्रिपिंडी श्राद्ध जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक अलग-अलग अनुष्ठानों के लिए ₹5,100 से ₹51,000 तक के पैकेज निर्धारित किए गए हैं।
विदेश में बैठे लोग वीडियो कॉल से जुड़ेंगे
पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों का श्राद्ध करने के लिए बड़ी संख्या में लोग काशी, गया और हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थलों पर पहुंचते हैं। लेकिन विदेश में रहने वाले लोगों के लिए हर साल भारत आकर अनुष्ठान में शामिल होना संभव नहीं होता।
ऐसे लोगों के लिए अब वीडियो कॉल और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से काशी में होने वाली पूजा से जुड़ने की व्यवस्था की जा रही है। श्रद्धालु विदेश से ही संकल्प प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं और अनुष्ठान को लाइव देख सकते हैं।
₹5,100 से ₹51,000 तक के पैकेज
काशी में ऑनलाइन श्राद्ध और तर्पण के लिए अलग-अलग स्तर के पैकेज उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार इनकी कीमत ₹5,100 से लेकर ₹51,000 तक बताई गई है।
पैकेज की कीमत अनुष्ठान के प्रकार, सामग्री और उसमें शामिल धार्मिक प्रक्रियाओं के आधार पर अलग हो सकती है। इसलिए किसी भी सेवा को लेने से पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि निर्धारित राशि में कौन-कौन सी सेवाएं शामिल हैं।
त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए भी ऑनलाइन बुकिंग
पितृपक्ष में त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए भी ऑनलाइन माध्यम से बुकिंग की जा रही है। कुछ ऑनलाइन सेवाओं के जरिए देश-विदेश में रहने वाले श्रद्धालु काशी या गया में अपने नाम और गोत्र से अनुष्ठान कराने की व्यवस्था कर रहे हैं।
कुछ सेवाओं में अनुष्ठान पूरा होने के बाद वीडियो उपलब्ध कराने और प्रसाद या अन्य सामग्री भेजने की सुविधा भी बताई गई है। हालांकि, अलग-अलग सेवा प्रदाताओं की सुविधाएं और कीमतें अलग हो सकती हैं।
अमेरिका, जापान और यूरोप से भी संपर्क
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका, जापान, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग काशी के पुरोहितों से संपर्क कर रहे हैं। विदेश में रहने वाले लोगों के लिए ऑनलाइन माध्यम से धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होना यात्रा की बाधा को कम करता है।
इससे धार्मिक आयोजनों में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल की तस्वीर भी सामने आती है।
पितृपक्ष 2026 कब से शुरू होगा?
2026 में पितृपक्ष का मुख्य चरण सितंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर अक्टूबर की शुरुआत तक चलेगा। वाराणसी से जुड़े उपलब्ध पंचांग विवरणों के अनुसार पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026 से मानी जा रही है और 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या होगी। हालांकि, किसी विशेष पूर्वज का श्राद्ध उनकी मृत्यु की तिथि से संबंधित तिथि के अनुसार किया जाता है।
इसलिए परिवारों को अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से तिथि की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
ऑनलाइन श्राद्ध को लेकर धार्मिक मत
ऑनलाइन माध्यम से होने वाले अनुष्ठानों को लेकर धार्मिक क्षेत्र में भी चर्चा है। काशी विद्वत परिषद से जुड़े प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी के अनुसार, यदि कोई यजमान स्वयं काशी आने में सक्षम नहीं है और श्रद्धा एवं शुद्धता के साथ संकल्प लेकर तर्पण कराता है, तो ऐसी स्थिति में ऑनलाइन माध्यम से अनुष्ठान कराने की परंपरा को अपनाया जा सकता है।
वहीं, ऑनलाइन पूजा की धार्मिक मान्यता और विधि को लेकर परिवारों को अपने परंपरागत पुरोहित या विद्वान से सलाह लेना उचित रहेगा।
तकनीक के जरिए जुड़ रही परंपरा
काशी में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में स्मार्टफोन, वीडियो कॉल और ऑनलाइन बुकिंग
जैसी तकनीक का इस्तेमाल अब दिखाई देने लगा है। इससे विदेश में रहने वाले
श्रद्धालुओं को अपने परिवार की धार्मिक परंपराओं से जुड़े रहने का एक माध्यम मिल रहा है।
हालांकि, ऑनलाइन सेवा लेने वालों के लिए यह भी जरूरी है कि वे सेवा देने वाले व्यक्ति या
संस्था की विश्वसनीयता, अनुष्ठान का स्थान, शुल्क और मिलने वाली सुविधाओं की पहले से पुष्टि करें।
निष्कर्ष
पितृपक्ष 2026 में काशी में श्राद्ध और तर्पण की परंपरा तकनीक के साथ नया रूप लेती दिखाई दे रही है।
विदेश में रहने वाले श्रद्धालु वीडियो कॉल के माध्यम से काशी में होने वाले अनुष्ठानों से जुड़ रहे हैं।
ऑनलाइन सेवाओं में अलग-अलग धार्मिक प्रक्रियाओं के लिए
₹5,100 से ₹51,000 तक के पैकेज की जानकारी सामने आई है।
यह व्यवस्था खास तौर पर उन लोगों के लिए एक विकल्प बन रही है जो समय
, दूरी या यात्रा संबंधी कारणों से काशी नहीं पहुंच पा रहे हैं।
FAQ
Q1. पितृपक्ष 2026 कब से शुरू होगा?
उपलब्ध वाराणसी पंचांग विवरण के अनुसार पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026 से होगी और
सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को होगी।
Q2. क्या विदेश में रहकर ऑनलाइन श्राद्ध कराया जा सकता है?
काशी में कुछ पुरोहित और धार्मिक सेवा प्रदाता वीडियो कॉल के माध्यम से
अनुष्ठान में श्रद्धालुओं को जोड़ने की सुविधा दे रहे हैं।
Q3. ऑनलाइन श्राद्ध के पैकेज कितने रुपये से शुरू हैं?
रिपोर्ट के अनुसार कुछ काशी आधारित सेवाओं में पैकेज ₹5,100 से शुरू होकर ₹51,000 तक बताए गए हैं।
Q4. क्या ऑनलाइन त्रिपिंडी श्राद्ध की सुविधा भी है?
हां, कुछ सेवा प्रदाता काशी और गया में त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए ऑनलाइन बुकिंग और
वीडियो के माध्यम से जुड़ने की सुविधा दे रहे हैं।
Q5. क्या ऑनलाइन श्राद्ध की धार्मिक मान्यता है?
इस विषय पर धार्मिक मत अलग-अलग हो सकते हैं। काशी के कुछ विद्वानों का कहना है कि
जो व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकता,
वह संकल्प लेकर ऑनलाइन माध्यम से तर्पण करा सकता है।
Q6. ऑनलाइन श्राद्ध कराने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
सेवा प्रदाता की विश्वसनीयता, अनुष्ठान का स्थान, कुल शुल्क, सामग्री, दक्षिणा और
वीडियो/प्रसाद जैसी सुविधाओं की पहले से पुष्टि करना उचित है।
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