रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भारत से रूस के साथ ऊर्जा कारोबार कम करने और रूसी तेल की खरीद बंद करने की अपील की है। उनका कहना है कि भारत, चीन और तुर्की जैसे देशों के साथ रूस का ऊर्जा कारोबार उसकी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है और इन देशों द्वारा खरीद रोकने से मॉस्को पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बढ़ सकता है।
जेलेंस्की ने यह बात एक हालिया इंटरव्यू में कही। उन्होंने रूस की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा निर्यात के बीच संबंध का उल्लेख करते हुए भारत समेत प्रमुख खरीदार देशों से रूसी ऊर्जा खरीद पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
जेलेंस्की ने भारत से क्या अपील की?
यूक्रेनी राष्ट्रपति का तर्क है कि रूस को ऊर्जा निर्यात से मिलने वाला राजस्व उसके युद्ध संबंधी खर्चों को बनाए रखने में मदद करता है। उनके अनुसार यदि भारत, चीन और तुर्की जैसे बड़े खरीदार रूसी ऊर्जा खरीदना बंद कर दें तो रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से भारत और चीन को रूस के प्रमुख ऊर्जा साझेदारों के रूप में उल्लेख किया है।
*भारत की स्थिति क्या है?
भारत ने रूस से तेल खरीद को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जोड़ा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सितंबर की शुरुआत में कहा था कि केवल किसी देश से तेल खरीदना बंद कर देने से रूस-यूक्रेन संघर्ष समाप्त नहीं होगा। उन्होंने समाधान के लिए बातचीत, कूटनीति और वार्ता की आवश्यकता पर जोर दिया था।
भारत का कहना रहा है कि बड़ी आबादी और ऊर्जा की व्यापक जरूरतों को देखते हुए देश को भरोसेमंद और किफायती ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने की आवश्यकता है।
*भारत के रूसी तेल आयात में हाल में कमी
उपलब्ध व्यापार आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात जुलाई की तुलना में करीब 16.5 प्रतिशत घटकर लगभग 21 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। इसी अवधि में मध्य पूर्व से भारत को मिलने वाली तेल आपूर्ति में बढ़ोतरी हुई।
इससे संकेत मिलता है कि भारत के तेल आयात में आपूर्तिकर्ता देशों का मिश्रण बदल रहा है, हालांकि रूस अभी भी भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।
अमेरिका के नए प्रतिबंध कानून का भी असर
जेलेंस्की का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने रूस और ईरान से संबंधित नया प्रतिबंध कानून लागू किया है। इस कानून के तहत रूस के तेल के बड़े खरीदार देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की अमेरिकी शक्तियां बढ़ाई गई हैं।
इस घटनाक्रम से भारत के सामने ऊर्जा जरूरतों, व्यापारिक हितों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संबंधों के बीच संतुलन का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है।
भारत-यूक्रेन संबंधों में भी बातचीत जारी
भारत और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त करने तथा द्विपक्षीय सहयोग को लेकर बातचीत जारी है। सितंबर की शुरुआत में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात की थी।
उस दौरान शांति प्रयासों, सुरक्षा, द्विपक्षीय व्यापार और ब्लैक सी में वाणिज्यिक जहाजों की
सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। यूक्रेनी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार दोनों पक्षों ने
युद्ध समाप्त करने के प्रयासों और द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े विषयों पर बातचीत की थी।
आगे क्या हो सकता है?
रूसी तेल को लेकर भारत पर अमेरिका और यूक्रेन की ओर से अलग-अलग स्तर पर दबाव बना हुआ है,
जबकि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की बात करता रहा है।
आने वाले समय में रूस से तेल आयात, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी प्रतिबंधों और
भारत के ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण के बीच संतुलन इस मुद्दे की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।
FAQ
प्रश्न: जेलेंस्की ने भारत से क्या अपील की है?
उत्तर: उन्होंने भारत से रूस के साथ तेल और व्यापक ऊर्जा कारोबार बंद करने की अपील की है।
प्रश्न: जेलेंस्की ऐसा क्यों चाहते हैं?
उत्तर: उनका कहना है कि रूस को ऊर्जा कारोबार से मिलने वाला राजस्व
उसकी अर्थव्यवस्था को सहारा देता है। बड़े खरीदारों द्वारा खरीद रोकने से रूस पर
युद्ध समाप्त करने का आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
प्रश्न: भारत ने रूसी तेल पर क्या कहा है?
उत्तर: भारत ने ऊर्जा सुरक्षा और किफायती आपूर्ति की जरूरत पर जोर दिया है। विदेश मंत्री एस.
जयशंकर ने कहा था कि संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए।
प्रश्न: क्या भारत ने रूस से तेल खरीद पूरी तरह बंद कर दी है?
उत्तर: नहीं। उपलब्ध हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत रूस से कच्चा तेल आयात कर रहा है,
हालांकि अगस्त 2026 में इसमें पिछले महीने की तुलना में कमी दर्ज हुई थी।
प्रश्न: भारत और यूक्रेन के बीच हाल में क्या बातचीत हुई?
उत्तर: दोनों पक्षों ने शांति प्रयासों, सुरक्षा, व्यापार और ब्लैक सी में
वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सहित कई मुद्दों पर चर्चा की है
read this post :अलकनंदा बेसिन में 131 ग्लेशियल झीलें, बढ़ता आकार दे रहा बड़े बाढ़ खतरे का संकेत