लखनऊ | 19 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश में हादसों में घायल होने वाले गोवंश को जल्द उपचार उपलब्ध कराने के लिए हर जिले में आपातकालीन बचाव और त्वरित उपचार व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है। इसके साथ ही पंचगव्य आधारित चिकित्सा पर वैज्ञानिक शोध, पशु टीकाकरण और गोशालाओं के प्रबंधन को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य खबर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवंश के संरक्षण, स्वास्थ्य और गोशालाओं की व्यवस्थाओं को लेकर नई कार्ययोजना पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ बैठक में हादसों में घायल होने वाले गोवंश को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में इमरजेंसी रेस्क्यू और त्वरित उपचार व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सड़क हादसों या अन्य दुर्घटनाओं में घायल पशुओं तक समय पर बचाव दल और उपचार की सुविधा पहुंचाना है। इसके साथ ही गोशालाओं में पशुओं के लिए भोजन, हरा चारा, भूसा, स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित आश्रय की नियमित निगरानी करने पर भी जोर दिया गया है। बीमार और कमजोर गोवंश की विशेष देखभाल तथा उनकी जरूरत के अनुसार व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
पंचगव्य चिकित्सा पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा
बैठक में पंचगव्य आधारित चिकित्सा की संभावनाओं पर वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान, मथुरा तथा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, लखनऊ में संबंधित विषयों पर शोध को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं।
लम्पी और खुरपका-मुंहपका से बचाव पर जोर
गोवंश को लम्पी स्किन डिजीज और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाने के लिए समयबद्ध टीकाकरण और संक्रमित पशुओं को आवश्यकता के अनुसार शीघ्र उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही मिलने पर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गई है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़े जाएंगे गो-आधारित उत्पाद
गो-संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी योजना पर जोर दिया गया है। महिला स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों, किसानों और गोपालकों को गो-आधारित उत्पादों तथा ग्रामीण उद्यमिता से जोड़ने की बात सामने आई है। इससे स्थानीय स्तर पर उत्पाद निर्माण और आय के अवसर विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
Facts/Details
प्रत्येक जिले में गोवंश के लिए आपातकालीन बचाव और त्वरित उपचार व्यवस्था विकसित करने की तैयारी।
गोशालाओं में चारा, पानी, साफ-सफाई और आश्रय की नियमित निगरानी पर जोर।
लम्पी तथा खुरपका-मुंहपका से बचाव के लिए समयबद्ध टीकाकरण।
पंचगव्य आधारित चिकित्सा पर वैज्ञानिक शोध को प्रोत्साहन।
महिला समूहों, एफपीओ, किसानों और गोपालकों को गो-आधारित उत्पादों से जोड़ने की योजना।
Statement
बैठक में गोशालाओं के निरीक्षण को केवल कमियां दर्ज करने तक सीमित न रखें
सामने आने वाली समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही बीमार और कमजोर गोवंश के लिए विशेष देखभाल व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए।
FAQ
1. यूपी में गोवंश के लिए क्या नई व्यवस्था की जा रही है?
हर जिले में आपातकालीन रेस्क्यू और त्वरित उपचार व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है।
2. पंचगव्य को लेकर क्या निर्णय हुआ है?
पंचगव्य आधारित चिकित्सा की संभावनाओं पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।
3. किन बीमारियों से बचाव पर जोर दिया गया है?
लम्पी स्किन डिजीज और खुरपका-मुंहपका से बचाव के लिए समयबद्ध टीकाकरण पर जोर है।
4. गोशालाओं में किन व्यवस्थाओं की निगरानी होगी?
चारा, भूसा, पेयजल, साफ-सफाई, आश्रय और बीमार पशुओं की देखभाल की निगरानी की जाएगी।
Conclusion
उत्तर प्रदेश में गोवंश के लिए प्रस्तावित जिला-स्तरीय इमरजेंसी रेस्क्यू व्यवस्था से दुर्घटनाओं और गंभीर बीमारी की स्थिति में उपचार तक पहुंच बेहतर करने का लक्ष्य है।
इसके साथ टीकाकरण, गोशाला प्रबंधन, शोध और ग्रामीण उद्यमिता को भी योजना से जोड़ा जा रहा है।