गणेश उत्सव के दौरान यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए इस बार नदी में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक रहेगी। श्रद्धालुओं को प्रतिमाओं का विसर्जन निर्धारित वैकल्पिक स्थानों और कृत्रिम विसर्जन कुंडों में करने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
यमुना में मूर्ति विसर्जन पर रोक
नदी और अन्य जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए मूर्ति विसर्जन को लेकर पर्यावरणीय दिशा-निर्देश पहले से लागू हैं। इनका उद्देश्य प्रतिमाओं, पूजा सामग्री और अन्य अवशेषों से जल की गुणवत्ता प्रभावित होने से रोकना है। NMCG और CPCB की ओर से भी नदी एवं जलाशयों में मूर्ति विसर्जन को नियंत्रित करने संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
आगरा में भी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए नदी के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। बाह क्षेत्र में प्रशासन ने पहले ही निर्धारित कुंडों में प्रतिमाओं के विसर्जन की बात कही है।
कृत्रिम कुंडों में होगा विसर्जन
प्रशासन की योजना के अनुसार श्रद्धालु गणेश प्रतिमाओं को यमुना में ले जाने के बजाय निर्धारित विसर्जन स्थलों तक पहुंचाएंगे। यहां प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्था की जाएगी।
इस व्यवस्था से धार्मिक परंपरा भी जारी रहेगी और नदी में प्रतिमा, रंग, सजावटी सामग्री तथा पूजा अवशेष जाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
पूजा सामग्री नदी में डालने से भी बचने की अपील
मूर्ति विसर्जन के साथ फूल, सजावटी सामग्री, प्लास्टिक और अन्य पूजा सामग्री को जलस्रोतों में डालने से भी पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं से ऐसी सामग्री को निर्धारित स्थान पर जमा करने की अपील की जा रही है।
सरकारी पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों में भी पूजा सामग्री और प्रतिमाओं के
कारण जलस्रोतों के प्रदूषण को रोकने पर जोर दिया गया है।
पुलिस और प्रशासन की रहेगी निगरानी
गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को लेकर
पुलिस की निगरानी रहेगी। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं से
निर्धारित मार्ग और विसर्जन स्थल का पालन करने की अपील की गई है।
गणेश उत्सव के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की
अव्यवस्था रोकने के लिए पुलिस एवं प्रशासनिक टीमें सक्रिय रहेंगी।
पर्यावरण संरक्षण के साथ मनाया जाएगा गणेश उत्सव
गणेश उत्सव आस्था और श्रद्धा का प्रमुख पर्व है। ऐसे में प्रशासन का जोर इस बात पर है कि
धार्मिक आयोजन की परंपरा बनी रहे और साथ ही नदी एवं जलस्रोतों को प्रदूषण से भी बचाया जा सके।
यमुना में प्रतिमा विसर्जन के बजाय निर्धारित कृत्रिम कुंडों या वैकल्पिक स्थानों का
इस्तेमाल इसी दिशा में उठाया गया कदम है। श्रद्धालुओं से भी प्रशासनिक निर्देशों का पालन करते हुए
पर्यावरण अनुकूल तरीके से गणेश प्रतिमा विसर्जन करने की अपील की गई है।
निष्कर्ष
गणेश विसर्जन 2026 के दौरान आगरा क्षेत्र में यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए
नदी में प्रतिमा विसर्जन के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई जाएगी।
श्रद्धालुओं को निर्धारित स्थानों पर ही प्रतिमाओं का विसर्जन करना होगा।
इससे धार्मिक आयोजन के साथ जलस्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने की कोशिश की जाएगी।
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