गोरखपुर: खजनी थाने में जमानतदार सत्यापन समेत कई पुलिस संबंधी रिपोर्ट तैयार कराने की प्रक्रिया को लेकर अधिवक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। अधिवक्ताओं का आरोप है कि जमानत सत्यापन, पासपोर्ट सत्यापन, सीजर तथा वाहनों की निरुद्ध रिपोर्ट जैसे कार्यों के लिए लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है और कथित तौर पर अवैध धन की मांग की जाती है।
इस मामले को लेकर दर्जनों अधिवक्ताओं ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, गोरखपुर को प्रार्थना पत्र देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
जमानत सत्यापन को लेकर सामने आया विवाद
अधिवक्ताओं के अनुसार, 17 सितंबर 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजीएम), गोरखपुर की अदालत से संबंधित जमानत सत्यापन प्राप्त हुआ था। इसके बाद सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए खजनी थाने के पैरोकार से संपर्क किया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति की ओर से मुकदमे की गंभीर धारा का हवाला देते हुए कथित तौर पर अतिरिक्त रकम की मांग की गई। अधिवक्ताओं का दावा है कि बातचीत के दौरान केवल एक हजार रुपये में काम नहीं होने की बात कही गई और फाइल थाने भेजने की बात कही गई।
हालांकि, इन आरोपों की सत्यता जांच का विषय है। शिकायत में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
18 सितंबर को जमानतदार को थाने ले जाने का दावा
अधिवक्ताओं का कहना है कि 18 सितंबर को जमानतदार को स्वयं खजनी थाने ले जाया गया, ताकि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो सके। आरोप है कि इसके बावजूद तत्काल सत्यापन करने के बजाय जमानतदार के घर जाकर जांच करने की बात कही गई और प्रक्रिया में कथित रूप से देरी की गई।
अधिवक्ताओं ने इसे न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य में अनावश्यक विलंब बताते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मामले की जांच कराने की मांग की है।
केवल खजनी थाने तक सीमित नहीं होने का आरोप
शिकायत में अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि जमानत सत्यापन के अलावा वांछितों की आख्या, निरुद्ध वाहनों की रिपोर्ट, सीजर और पासपोर्ट सत्यापन जैसे कार्यों को लेकर जिले के कई थानों में लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
अधिवक्ताओं का दावा है कि करीब 29 थानों में इस तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि, यह एक व्यापक आरोप है और इसके समर्थन में प्रत्येक थाने के संबंध में स्वतंत्र जांच या आधिकारिक रिपोर्ट सामने आना आवश्यक है।
“काम के लिए पैसे मांगने की शिकायत गंभीर”
अधिवक्ताओं ने कहा कि पुलिस थानों में सत्यापन और रिपोर्ट से जुड़े कार्य आम नागरिकों तथा न्यायिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे कार्यों में यदि किसी व्यक्ति से अवैध धन की मांग की जाती है तो इससे न केवल संबंधित व्यक्ति को आर्थिक परेशानी होती है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में भी देरी हो सकती है।
उनका कहना है कि सत्यापन जैसी सेवाओं के लिए स्पष्ट समयसीमा और पारदर्शी प्रक्रिया निर्धारित होनी चाहिए, ताकि किसी व्यक्ति को बार-बार थाने के चक्कर न लगाने पड़ें।
अधिवक्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया जताई
मामले को लेकर मौजूद अधिवक्ताओं ने पुलिस व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार पर नाराजगी जताई। इसी दौरान उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि भ्रष्टाचार समाप्त नहीं किया जा सकता तो कम से कम उसका रेट तय कर दिया जाए, ताकि आम लोगों को बार-बार की कथित वसूली और परेशानी से राहत मिल सके।
यह टिप्पणी अधिवक्ताओं की नाराजगी और व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को दर्शाती है। हालांकि, कथित वसूली की वास्तविकता जांच के निष्कर्ष के बाद ही स्थापित हो सकेगी।
SSP ने जांच का दिया आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ताओं ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
गोरखपुर से मुलाकात कर शिकायत प्रस्तुत की। शिकायतकर्ताओं के अनुसार,
SSP ने पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच का आश्वासन दिया है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि जांच में यदि संबंधित पुलिसकर्मियों पर लगाए गए
आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
जांच से साफ होगी आरोपों की वास्तविकता
फिलहाल इस प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण पहलू जांच है। शिकायत में लगाए गए कथित
वसूली और लापरवाही के आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही
यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में क्या हुआ था और किस स्तर पर जिम्मेदारी बनती है।
साथ ही, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ
विभागीय कार्रवाई के साथ अन्य आवश्यक कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। दूसरी ओर,
यदि आरोप पुष्ट नहीं होते हैं तो वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक होना जरूरी होगा।
सत्यापन व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
अधिवक्ताओं ने मांग की है कि जमानतदार सत्यापन, पासपोर्ट सत्यापन, वाहन संबंधी रिपोर्ट और
अन्य पुलिस सत्यापन कार्यों के लिए स्पष्ट प्रक्रिया और समयसीमा तय की जाए।
ऑनलाइन आवेदन, आवेदन की स्थिति की जानकारी और प्रत्येक चरण की निगरानी
जैसी व्यवस्थाएं मजबूत होने से लोगों को बार-बार थाने जाने की जरूरत कम हो सकती है।
इससे पुलिस और आम नागरिक दोनों के बीच पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
खजनी थाने में जमानत सत्यापन को लेकर सामने आई शिकायत ने
पुलिस थानों में होने वाले सत्यापन संबंधी कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
अधिवक्ताओं ने कथित वसूली और कार्य में लापरवाही की जांच की मांग की है।
अब सबकी नजर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्तर से होने वाली जांच और उसके निष्कर्ष पर रहेगी।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो
वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना—दोनों ही स्थितियों में पारदर्शी जांच महत्वपूर्ण होगी।
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FAQ
1. मामला किस थाने से जुड़ा है?
मामला गोरखपुर जिले के खजनी थाने से जुड़ा है।
2. अधिवक्ताओं ने क्या आरोप लगाए हैं?
अधिवक्ताओं ने जमानतदार सत्यापन सहित कुछ पुलिस संबंधी कार्यों में कथित वसूली और लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
3. शिकायत किस अधिकारी से की गई?
अधिवक्ताओं ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, गोरखपुर से शिकायत कर जांच की मांग की है।
4. क्या आरोपों की पुष्टि हो चुकी है?
नहीं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर ये शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोप हैं।
इनकी सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
5. किन कार्यों में परेशानी का आरोप लगाया गया है?
जमानतदार सत्यापन, पासपोर्ट सत्यापन, सीजर, वाहनों की निरुद्ध रिपोर्ट और
अन्य पुलिस रिपोर्ट से संबंधित कार्यों का उल्लेख शिकायत में किया गया है।
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