राकेश शर्मा की रिपोर्ट
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के निगोहां क्षेत्र से लोन की किस्त वसूली से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। 2,799 रुपये की EMI नहीं चुका पाने पर एक युवक को कथित तौर पर चार दिनों तक बंधक बनाकर रखने और उससे मजदूरी कराने का आरोप लगाया गया है। परिवार का आरोप है कि युवक को छोड़ने के लिए पैसे देने पड़े। मामला निगोहां के राजाराम खेड़ा पुरहिया से जुड़ा बताया जा रहा है।
बताया गया है कि युवक ने लोन लिया था और आर्थिक परेशानी के कारण उसकी एक किस्त समय पर जमा नहीं हो सकी। इसके बाद लोन की रकम की वसूली को लेकर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि युवक को अपने कब्जे में लेकर चार दिनों तक बाहर जाने नहीं दिया गया। इस दौरान उससे मजदूरी भी कराए जाने की बात सामने आई है।
परिवार के अनुसार, युवक की तलाश और उसे छुड़ाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए गए। परिजनों का आरोप है कि जब वे मामले की शिकायत लेकर निगोहां थाने पहुंचे तो तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। परिवार का कहना है कि करीब चार दिन तक पुलिस से शिकायत और कार्रवाई की मांग की जाती रही।
क्या है पूरा मामला?
आरोपों के मुताबिक, युवक लोन की EMI जमा नहीं कर पा रहा था। इसी दौरान लोन वसूली से जुड़े लोगों पर उसे कथित तौर पर बंधक बनाने का आरोप लगा। परिवार का कहना है कि युवक को चार दिनों तक रोके रखा गया और इस दौरान उससे काम कराया गया।
मामले में परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच कर रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि युवक को किसने और किन परिस्थितियों में रोका था।
पुलिस कार्रवाई को लेकर भी उठे सवाल
मामले में पीड़ित परिवार ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं। परिवार का दावा है कि शिकायत लेकर थाने पहुंचने के बावजूद कई दिनों तक केस दर्ज नहीं किया गया।
परिजनों के मुताबिक, बाद में मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारी यानी DCP के संज्ञान में पहुंचा,
जिसके बाद मुकदमा दर्ज किए जाने की कार्रवाई हुई। अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
पैसे देने के बाद युवक के छूटने का दावा
परिवार का आरोप है कि युवक को कथित तौर पर छुड़ाने के लिए पैसे देने पड़े।
पैसे दिए जाने के बाद युवक के वापस आने की बात कही गई है।
हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस के सामने
अब यह पता लगाने की चुनौती है कि युवक को कहां रखा गया था, उसे
किसने रोका था और पैसे लिए जाने की बात में कितनी सच्चाई है।
2,799 रुपये की EMI ने खड़े किए सवाल
इस मामले में 2,799 रुपये की EMI का जिक्र सबसे ज्यादा चर्चा में है।
छोटी रकम की किस्त नहीं चुका पाने के कारण एक युवक को कथित तौर पर बंधक बनाए जाने के
आरोप ने लोन वसूली के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोन की किस्त जमा नहीं होने की स्थिति में संबंधित संस्थाओं के पास
निर्धारित कानूनी और वित्तीय प्रक्रिया होती है। ऐसे में किसी व्यक्ति को कथित तौर पर
जबरन रोकने या उससे काम कराने के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
निगोहां के राजाराम खेड़ा पुरहिया का मामला
यह मामला निगोहां के राजाराम खेड़ा पुरहिया से जुड़ा बताया जा रहा है।
घटना सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी इसकी चर्चा है। परिवार की शिकायत और
पुलिस में दर्ज मुकदमे के बाद अब जांच के परिणाम का इंतजार है।
पुलिस जांच में यदि युवक को बंधक बनाने, जबरन मजदूरी कराने या पैसे लेकर छोड़ने के
आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल मामले में सामने आए आरोपों को पुलिस जांच के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
आरोपों की पुष्टि और जिम्मेदारी तय होना जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
read this post :बेलघाट में मिशन शक्ति फेज-5 के बहू-बेटी सम्मेलन में शामिल महिलाएं और जागरूकता कार्यक्रम