भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम घटनाक्रम बन गया है। भारत की मेजबानी में हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए। भारत मंडपम में आयोजित इस सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, तकनीक और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
सम्मेलन की सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई मुलाकातों को लेकर रही। खासतौर पर मोदी-जिनपिंग बैठक को भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच पिछले वर्षों में सीमा विवाद और व्यापार असंतुलन को लेकर तनाव रहा है, लेकिन अब दोनों पक्ष आर्थिक एवं कारोबारी संबंधों को आगे बढ़ाने के रास्ते तलाश रहे हैं।
BRICS Summit 2026 में मोदी-जिनपिंग मुलाकात क्यों रही खास?
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर रही। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत और चीन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
दोनों नेताओं के बीच व्यापार, बाजार तक पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला और सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने लंबे समय से चीन के साथ व्यापार में मौजूद असंतुलन को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्टों के अनुसार दोनों पक्षों ने व्यापारिक संबंधों को अधिक संतुलित और स्थिर बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
भारत और चीन के बीच 2025 में द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, लेकिन इसमें भारत का आयात चीन को होने वाले निर्यात की तुलना में काफी अधिक रहा। ऐसे में बाजार तक बेहतर पहुंच और व्यापार घाटे को कम करना भारत के लिए अहम मुद्दा बना हुआ है।
सीमा विवाद भी दोनों देशों के संबंधों का संवेदनशील विषय है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण आधार है।
मोदी-पुतिन वार्ता में रक्षा, ऊर्जा और व्यापार पर फोकस
BRICS Summit से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने राजनीतिक और आर्थिक संबंधों के साथ रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल विकास और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की।
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र में भी रूस भारत के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। ऐसे में BRICS के मंच पर दोनों नेताओं की मुलाकात को रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक में पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र की परिस्थितियों सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को प्रभावी रास्ता बताया।
रूस और भारत के बीच औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने की दिशा में भी गतिविधियां देखने को मिलीं। दोनों नेताओं ने भारत में आयोजित पहली Innoprom India औद्योगिक प्रदर्शनी का दौरा किया, जिसे व्यापार और औद्योगिक सहयोग मजबूत करने की दिशा में अहम पहल माना गया।
*BRICS में व्यापार, स्थानीय मुद्रा और डिजिटल पेमेंट पर जोर
BRICS Summit 2026 का एक महत्वपूर्ण मुद्दा वैश्विक व्यापार व्यवस्था और भुगतान प्रणाली रहा। भारत ने BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है।
BRICS Business Forum में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्य देशों से भुगतान प्रणालियों को जोड़ने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की अपील की। उन्होंने डिजिटल व्यापार को
आसान बनाने और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस दिशा में भारत का UPI मॉडल भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत डिजिटल
सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों को BRICS देशों के साथ साझा करने पर जोर दे रहा है।
इसका उद्देश्य सीमा पार भुगतान को आसान, तेज और कम लागत वाला बनाना है।
BRICS के भीतर किसी साझा मुद्रा को लेकर चर्चाएं लंबे समय से होती रही हैं,
लेकिन फिलहाल प्रमुख जोर सदस्य देशों की अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं के
इस्तेमाल और भुगतान प्रणालियों के बीच बेहतर संपर्क पर दिखाई देता है।
नई दिल्ली घोषणापत्र में वैश्विक संकटों पर BRICS का रुख
BRICS Summit 2026 में वैश्विक सुरक्षा और पश्चिम एशिया की स्थिति भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रही।
सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणापत्र को स्वीकार किया, जिसमें पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए
अधिकतम संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय विवादों को बातचीत, परामर्श और कूटनीति के माध्यम से हल करने की
प्रतिबद्धता दोहराई गई। साथ ही व्यापार को प्रभावित करने वाले
एकतरफा शुल्क और गैर-टैरिफ उपायों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई।
भारत ने BRICS अध्यक्ष के तौर पर सम्मेलन में विकासशील देशों की आवाज को
मजबूती देने पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक चुनौतियों के बीच सहयोग, नवाचार, स्थिरता और आपूर्ति
श्रृंखला की मजबूती को महत्वपूर्ण बताया। सम्मेलन में स्वास्थ्य आपात स्थितियों,
आपदा प्रबंधन और सप्लाई चेन से जुड़े सहयोग की दिशा में भी पहल सामने आई।
कुल मिलाकर BRICS Summit 2026 भारत के लिए केवल एक बहुपक्षीय सम्मेलन नहीं,
बल्कि वैश्विक कूटनीति में अपनी भूमिका मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर बनकर सामने आया है।
मोदी-जिनपिंग मुलाकात से भारत-चीन संबंधों में संवाद की संभावनाएं बढ़ी हैं, जबकि मोदी-पुतिन बैठक ने
भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की निरंतरता को रेखांकित किया है।
BRICS Summit 2026 से जुड़े FAQ
Q1. BRICS Summit 2026 कहां आयोजित किया जा रहा है?
BRICS Summit 2026 का आयोजन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में भारत की मेजबानी में किया जा रहा है।
Q2. BRICS Summit 2026 में किन नेताओं की मुलाकात चर्चा में रही?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई
मुलाकातें सम्मेलन के प्रमुख कूटनीतिक घटनाक्रमों में रहीं।
Q3. मोदी-जिनपिंग बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
बैठक में द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, बाजार तक पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला और सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
दोनों पक्षों ने कारोबारी और परिवहन संबंधों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
Q4. BRICS Summit 2026 में भारत की प्राथमिकता क्या रही?
भारत ने बहुपक्षवाद, वैश्विक दक्षिण की आवाज, व्यापार एवं आर्थिक सहयोग, डिजिटल भुगतान,
ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया।
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