राकेश शर्मा की रिपोर्टर
गोला BRC पर पांच दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ, गतिविधि आधारित शिक्षण के जरिए बच्चों की समझ विकसित करने पर जोर
गोरखपुर। बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से गोला ब्लॉक संसाधन केंद्र (BRC) पर बुधवार से चौथे चरण का पांच दिवसीय एफएलएन (मूलभूत साक्षरता एवं संख्याज्ञान) प्रशिक्षण शुरू हुआ। इसमें शिक्षकों को कक्षा में भाषा और गणित की आधारभूत क्षमताओं को विकसित करने के लिए गतिविधि आधारित तथा रुचिकर शिक्षण पद्धतियों की जानकारी दी जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षकों ने बताया कि शुरुआती कक्षाओं में विद्यार्थियों की पढ़ने, समझने, बोलने और संख्याओं से संबंधित अवधारणाएं स्पष्ट होना बेहद जरूरी है। यही बुनियादी समझ आगे की पढ़ाई के लिए मजबूत आधार तैयार करती है। इसी उद्देश्य से शिक्षकों को ऐसे तरीकों से परिचित कराया जा रहा है, जिनके माध्यम से बच्चे खेल, गतिविधियों और सहभागिता के जरिए आसानी से सीख सकें।
पांच दिवसीय कार्यक्रम में शिक्षकों को मिल रही नई शिक्षण विधियों की जानकारी
गोला बीआरसी पर आयोजित इस प्रशिक्षण में शिक्षकों को एफएलएन के उद्देश्यों और विद्यालयी कक्षाओं में इसके प्रभावी क्रियान्वयन के बारे में विस्तार से बताया गया। संदर्भदाताओं ने प्रारंभिक स्तर के विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुसार पाठ पढ़ाने के विभिन्न तरीकों पर चर्चा की।
प्रशिक्षण का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि शिक्षक केवल पारंपरिक तरीके से पाठ पढ़ाने के बजाय बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करें। इसके लिए स्थानीय परिस्थितियों और बच्चों की रुचि के अनुरूप गतिविधियों का इस्तेमाल करने के तरीके बताए गए।
भाषा कौशल को मजबूत बनाने पर विशेष जोर
सत्र के दौरान भाषा विकास से जुड़ी कई गतिविधियों पर चर्चा की गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि छोटे बच्चों में शब्दों की पहचान, सुनने, बोलने, पढ़ने और समझने की क्षमता धीरे-धीरे विकसित होती है। ऐसे में कक्षा का वातावरण संवादात्मक और बाल केंद्रित होना चाहिए।
शिक्षकों को बताया गया कि कहानी, बातचीत, चित्र, शब्द गतिविधि और अन्य सरल माध्यमों का उपयोग करके विद्यार्थियों को भाषा सीखने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इससे बच्चों की कक्षा में भागीदारी बढ़ने के साथ उनकी अभिव्यक्ति क्षमता भी बेहतर होती है।
संख्याज्ञान के लिए गतिविधि आधारित तरीका अपनाने की सलाह
गणित की शुरुआती अवधारणाओं को आसान बनाने के लिए भी अलग-अलग गतिविधियों का अभ्यास कराया गया। संदर्भदाताओं ने बताया कि छोटे बच्चों के लिए केवल किताब और लिखित अभ्यास के माध्यम से गणित समझना कई बार कठिन हो सकता है। इसलिए संख्या, गिनती, जोड़-घटाव और अन्य आधारभूत अवधारणाओं को रोजमर्रा की चीजों तथा खेल-आधारित गतिविधियों से जोड़ना उपयोगी है।
इस दौरान शिक्षकों को ऐसे अभ्यास कराए गए, जिन्हें वे विद्यालय पहुंचकर अपने विद्यार्थियों के साथ कक्षा में लागू कर सकते हैं।
बच्चों की सहभागिता बढ़ाने पर प्रशिक्षण में जोर
संदर्भदाता अवनीश नंदन पांडेय, डॉ. विपिन कुमार मिश्र, एआरपी स्वर्ण प्रकाश शुक्ल,
गोविंद पटेल और हरिकेश सिंह ने प्रशिक्षण के विभिन्न
सत्रों में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक कक्षाओं में विद्यार्थियों की
सक्रिय भागीदारी बढ़ाने से सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सहज बनती है।
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की गति अलग हो सकती है।
इसलिए कक्षा में ऐसी गतिविधियां शामिल की जानी चाहिए,
जिनमें सभी विद्यार्थी अपनी क्षमता के अनुसार हिस्सा ले सकें।
शिक्षकों ने खुद गतिविधियों में हिस्सा लेकर किया अभ्यास
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई,
बल्कि विभिन्न गतिविधियों में स्वयं भाग लेकर उनका अभ्यास भी कराया गया।
इसका उद्देश्य शिक्षकों को यह समझाना था कि विद्यार्थियों के
साथ इन तरीकों को किस प्रकार व्यवहारिक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रशिक्षण में विष्णुदत्त मिश्र, श्री नारायण दूबे, पद्माकर मिश्र, प्रदीप श्रीवास्तव,
सुमन तिवारी, पूनम मिश्रा और राधिका देवी समेत अन्य शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।
प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में अहम पहल
प्रशिक्षकों के अनुसार, बच्चों की शुरुआती कक्षाओं में भाषा और संख्याज्ञान की नींव
मजबूत होने से आगे के शैक्षिक स्तर पर उन्हें विषयों को समझने में आसानी होती है। इसलिए एफएलएन
कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को ऐसी तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है, जो बच्चों को
सीखने के लिए प्रेरित करने के साथ उनकी बुनियादी दक्षताओं को मजबूत कर सकें।
गोला बीआरसी पर शुरू हुआ पांच दिवसीय प्रशिक्षण इसी दिशा में शिक्षकों की
क्षमता बढ़ाने और कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने पर केंद्रित है
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