उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद शनिवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के साथ एक बार फिर चर्चा में आ गया। प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही और कलेक्ट्रेट परिसर के पांचों गेट सील कर बाहरी लोगों की एंट्री रोक दी गई।
इसी बीच कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने उन्हें सहारनपुर जाने से रोक दिया। सांसद ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह मामले को लेकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं और जनता की आवाज प्रशासन तक पहुंचाना चाहती थीं।
कलेक्ट्रेट परिसर में भारी सुरक्षा के बीच ध्वस्तीकरण
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को लेकर विवाद काफी समय से चल रहा था। शनिवार सुबह प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस और आरआरएफ के जवान तैनात किए गए थे।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि मस्जिद का निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध रूप से किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
त्योहारों को देखते हुए पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। संवेदनशील और मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस की फुट पेट्रोलिंग और फ्लैग मार्च भी कराया गया।
सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद बढ़ा विवाद
मामले की शुरुआत एक शिकायत के बाद हुई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत के बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पीपी एक्ट के तहत याचिका दाखिल की गई थी।
इसके बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को अवैध करार दिया था। इसी आदेश में 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई। मस्जिद पक्ष ने इस आदेश को जिला जज की अदालत में चुनौती दी थी।
जिला जज की अदालत ने खारिज की अपील
मस्जिद पक्ष की ओर से 20 जुलाई 2026 को जिला जज की अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में 17 तारीखों पर सुनवाई हुई। इसके बाद 2 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी।
इसके बाद प्रशासन की ओर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। अधिकारियों का कहना है कि नोटिस और अपील समेत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया।
इकरा हसन को क्यों किया गया हाउस अरेस्ट?
मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बीच कैराना की सपा सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट किए जाने की बात सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, वह सहारनपुर जाने की तैयारी में थीं। इसी दौरान पुलिस बल उनके आवास पर पहुंचा और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया।
इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उन्हें सहारनपुर पहुंचने से रोकने के लिए नजरबंद किया गया है। उन्होंने कहा कि वह मस्जिद मामले में अधिकारियों से मिलना चाहती थीं और क्षेत्र की जनता की बात प्रशासन के सामने रखना चाहती थीं।
सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि का जनता से जुड़े मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना अपराध है। उन्होंने
लोकतांत्रिक अधिकारों का हवाला देते हुए इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई।
मायावती ने ध्वस्तीकरण पर उठाए सवाल
सहारनपुर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश की
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस मामले पर सवाल उठाते हुए मस्जिदों को
जल्दबाजी में अवैध घोषित कर ध्वस्त करने के कथित अभियान को रोकने की मांग की।
मायावती ने कहा कि सरकार को ऐसे कदमों से बचना चाहिए जिनसे सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका हो।
उन्होंने सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों के सम्मान और सुरक्षा को जरूरी बताया।
उन्होंने लोगों से भी शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
इमरान मसूद ने भी प्रशासन पर लगाए आरोप
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर प्रशासन की
कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद से संबंधित
दस्तावेज प्रशासन को उपलब्ध कराए गए थे, इसके बावजूद कार्रवाई की गई।
इमरान मसूद ने मस्जिद की पुरानी मिल्कियत से जुड़े दस्तावेज होने का दावा करते हुए कहा कि
यह मामला केवल एक धार्मिक स्थल का नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ा है।
उन्होंने वक्फ को मामले में पक्षकार नहीं बनाए जाने सहित कई कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाए।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में आगे हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
प्रशासन ने क्या कहा?
प्रशासन की ओर से मामले में स्पष्ट किया गया है कि ध्वस्तीकरण की
कार्रवाई न्यायिक आदेशों के बाद की गई। सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह के मुताबिक,
नोटिस और अपील समेत निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्रवाई हुई।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे। कलेक्ट्रेट परिसर के
पांचों गेट बंद किए गए और बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ पीएसी तथा आरआरएफ की तैनाती की गई।
अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
सहारनपुर में तनाव के बीच शांति की अपील
मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद मामला राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र बन गया है।
एक तरफ प्रशासन इसे न्यायिक प्रक्रिया के बाद की गई कार्रवाई बता रहा है,
वहीं विपक्षी नेताओं ने इसके तरीके और कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति एवं सामाजिक सौहार्द बनाए रखें।
नोट: इस खबर में प्रशासन और राजनीतिक नेताओं द्वारा किए गए दावों को उनके संबंधित
पक्ष के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मामले से जुड़े कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम आगे भी बदल सकते हैं।
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