श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बदलाव की प्रक्रिया के बीच अयोध्या से बड़ी खबर सामने आई है। ट्रस्ट की हालिया बैठक में नई टीम को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। तीन नए न्यासियों की नियुक्ति के साथ राम मंदिर के लिए पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के नाम पर भी सहमति बनी। हालांकि, इस पूरी बैठक में पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र की वापसी को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।
इस घटनाक्रम ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आखिर चंपत राय और अनिल मिश्र की ट्रस्ट में वापसी का रास्ता क्या होगा और क्या भविष्य में दोनों फिर से ट्रस्ट की व्यवस्था का हिस्सा बन सकते हैं?
करीब तीन घंटे चली राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक
रिपोर्ट के अनुसार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक बुधवार को मणिरामदास छावनी में हुई। बैठक करीब तीन घंटे चली और दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक चली। इस दौरान ट्रस्ट की नई व्यवस्था, रिक्त पदों पर नियुक्तियों और राम मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े कई विषयों पर चर्चा की गई।
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में तीन नए न्यासियों की नियुक्ति और राम मंदिर के लिए पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति शामिल रही। इसके साथ ट्रस्ट की नई टीम की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई।
जितेंद्र मिश्र बने राम मंदिर के पूर्णकालिक CEO
बैठक में सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को राम मंदिर का पूर्णकालिक CEO नियुक्त करने पर सहमति बनी। ट्रस्ट के नवनियुक्त महामंत्री गोविंद देव गिरि ने CEO के चयन के लिए गठित समिति की ओर से जितेंद्र मिश्र का नाम प्रस्तावित किया था।
बताया गया कि ट्रस्टियों के सामने जितेंद्र मिश्र की सेवाओं और देश के लिए उनके योगदान से संबंधित जानकारी रखी गई। करीब 40 मिनट तक उनके नाम पर चर्चा हुई और इसके बाद ट्रस्ट के सभी सदस्यों ने उनके नाम का समर्थन कर दिया।
इस नियुक्ति के साथ राम मंदिर के प्रशासनिक संचालन में पूर्णकालिक CEO की भूमिका महत्वपूर्ण होने जा रही है।
तीन नए न्यासियों की भी नियुक्ति
बैठक में ट्रस्ट के रिक्त पदों को भरने के लिए तीन नए न्यासियों की नियुक्ति पर भी चर्चा हुई और उनके नामों पर सहमति बनी। इससे ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की तस्वीर और स्पष्ट हो गई।
बैठक से पहले यह भी चर्चा थी कि ट्रस्ट में कुछ संतों को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। हालांकि, नए न्यासियों के नाम सामने आने के बाद संतों को शामिल किए जाने की अटकलों पर भी विराम लग गया।
चंपत राय और अनिल मिश्र की वापसी पर क्यों नहीं हुई चर्चा?
बैठक का सबसे चर्चित पहलू यही रहा कि पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र की वापसी को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। बैठक में आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल महंत कमलनयन दास ने भी स्पष्ट किया कि दोनों की वापसी को लेकर बैठक में कोई बातचीत नहीं हुई।
यानी फिलहाल ट्रस्ट की नई व्यवस्था में दोनों की वापसी को लेकर कोई औपचारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले दोनों के इस्तीफे और ट्रस्ट की भविष्य की संरचना को लेकर काफी चर्चा रही थी। अब नई टीम के गठन और CEO की नियुक्ति के बाद यह सवाल फिर उठ रहा है कि भविष्य में दोनों की भूमिका क्या होगी।
क्या चंपत राय और अनिल मिश्र की फिर हो सकती है एंट्री?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र की ट्रस्ट में वापसी होगी या नहीं। बैठक में उनकी वापसी पर चर्चा नहीं होने का मतलब इतना जरूर है कि
इस बैठक में उनके लिए कोई नई भूमिका तय नहीं की गई।
आगे यदि ट्रस्ट की संरचना में कोई बदलाव होता है या किसी स्तर पर
उन्हें फिर जिम्मेदारी देने का फैसला लिया जाता है, तभी उनकी वापसी की तस्वीर स्पष्ट होगी।
इसलिए मौजूदा स्थिति में उनकी वापसी को लेकर किसी निश्चित
निष्कर्ष के बजाय ट्रस्ट के आगामी फैसलों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
संतों की संभावित एंट्री पर भी लगा विराम
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक से पहले यह अटकलें भी थीं कि अयोध्या के
कुछ संतों को ट्रस्ट में शामिल किया जा सकता है। माना जा रहा था कि
नए सदस्यों के जरिए संत समाज को ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
लेकिन बैठक में जिन तीन नए न्यासियों की नियुक्ति पर सहमति बनी, उसके बाद
इन अटकलों पर भी विराम लग गया। महंत कमलनयन दास ने भी स्पष्ट किया कि संतों को ट्रस्ट में
शामिल करने और चंपत राय-अनिल मिश्र की वापसी जैसे मुद्दों पर बैठक में चर्चा नहीं हुई।
नई व्यवस्था से क्या बदलेगा?
पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति को राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था के
लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति के बाद मंदिर से
जुड़े प्रशासनिक कार्यों के संचालन में एक स्पष्ट पूर्णकालिक जिम्मेदारी तय होगी।
इसके साथ नए न्यासियों की नियुक्ति से ट्रस्ट के निर्णय लेने वाले ढांचे में भी बदलाव आया है।
अब आने वाले समय में नई टीम के सामने मंदिर की व्यवस्थाओं,
प्रशासनिक संचालन और भविष्य की योजनाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
चंपत राय-अनिल मिश्र पर आगे भी रहेगी नजर
चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र की वापसी पर बैठक में चर्चा नहीं होने के
बाद फिलहाल दोनों को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। एक तरफ ट्रस्ट ने नई
नियुक्तियों और CEO के नाम पर फैसला कर लिया है, वहीं दूसरी ओर दोनों
पूर्व पदाधिकारियों की संभावित भूमिका पर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भविष्य में चंपत राय और अनिल
मिश्र को फिर ट्रस्ट में जगह मिलेगी या नई टीम ही राम मंदिर की व्यवस्था को आगे बढ़ाएगी?
फिलहाल बैठक से इतना स्पष्ट है कि नई व्यवस्था में तीन नए न्यासी और
पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति को प्राथमिकता दी गई है, जबकि दोनों
पूर्व पदाधिकारियों की वापसी का मुद्दा बैठक के एजेंडे में नहीं रहा।
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