गोरखपुर में 10 हजार की रिश्वत लेते जेडी कार्यालय का बाबू गिरफ्तार, रिटायर्ड शिक्षिका के 15 लाख के भुगतान की थी फाइल

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) कार्यालय के एक पटल सहायक को कथित तौर पर 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सेवानिवृत्त महिला शिक्षिका के करीब 15 लाख रुपये के अवकाश नकदीकरण यानी EL Encashment के भुगतान से जुड़ी फाइल आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत मांगी गई थी। एंटी करप्शन टीम ने शिकायत की जांच के बाद जाल बिछाया और आरोपी कर्मचारी को रुपये लेते ही पकड़ लिया।

इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग के कार्यालयों में भी हड़कंप की स्थिति है। एंटी करप्शन टीम ने आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद कैंट थाने में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

रिटायर्ड शिक्षिका के भुगतान की फाइल थी लंबित

मामला कुशीनगर के हाटा स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज से सेवानिवृत्त हुई शिक्षिका सरोज दूबे से जुड़ा है। वह 31 मार्च 2026 को प्रवक्ता और प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं।

जानकारी के अनुसार उनकी GPF, पेंशन और अन्य देयकों का भुगतान हो चुका था, लेकिन 300 दिनों के EL नकदीकरण की करीब 15 लाख रुपये की राशि का भुगतान बाकी था। इस भुगतान से संबंधित पत्रावली संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में पटल सहायक शहनवाज आलम के पास लंबित थी।

आरोप है कि फाइल को आगे बढ़ाने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने के एवज में पटल सहायक ने 10 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी।

बेटे ने एंटी करप्शन टीम से की शिकायत

मामले में सेवानिवृत्त शिक्षिका के बेटे दिव्यांशु पांडेय ने 14 अगस्त को एंटी करप्शन थाना प्रभारी से शिकायत की। शिकायत में कथित रिश्वत मांगने की जानकारी दी गई और कार्रवाई की मांग की गई।

शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन अधिकारियों ने मामले की गोपनीय जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद टीम ने आरोपी को रिश्वत लेते पकड़ने के लिए ट्रैप की योजना बनाई।

पहले शिकायत की हुई गोपनीय जांच

एंटी करप्शन थाना प्रभारी के अनुसार शिकायत मिलने के बाद सीधे गिरफ्तारी करने के बजाय पहले आरोपों की गोपनीय तरीके से जांच की गई। जांच में शिकायत की पुष्टि होने के बाद ट्रैप टीम गठित की गई।

इस कार्रवाई का उद्देश्य आरोपी को रिश्वत की रकम लेते हुए मौके पर पकड़ना था। इसके लिए शिकायतकर्ता को निर्धारित तरीके से आरोपी के पास भेजा गया।

1:19 बजे जेडी कार्यालय पहुंची टीम

बुधवार को एंटी करप्शन टीम दोपहर करीब 1:19 बजे संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय पहुंची। योजना के अनुसार शिकायतकर्ता आरोपी पटल सहायक के पास पहुंचा।

जैसे ही आरोपी ने कथित तौर पर 10 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, आसपास मौजूद एंटी करप्शन टीम ने उसे पकड़ लिया। टीम ने आरोपी के कब्जे से रिश्वत की रकम बरामद की और उसे हिरासत में ले लिया।

इस कार्रवाई के बाद कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों के बीच भी हड़कंप मच गया। टीम आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए कैंट थाने ले गई।

रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर्मचारी की पहचान

गिरफ्तार किए गए पटल सहायक का नाम शहनवाज आलम बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह मूल रूप से कुशीनगर के चौरा खास क्षेत्र के बेलवा खुर्द गांव का रहने वाला है।

आरोप है कि वह सेवानिवृत्त शिक्षिका की भुगतान संबंधी पत्रावली को आगे बढ़ाने और करीब 15 लाख रुपये के EL नकदीकरण का भुगतान कराने के बदले 10 हजार रुपये की मांग कर रहा था।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

15 लाख के भुगतान के बदले 10 हजार की मांग का आरोप

इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि सेवानिवृत्त शिक्षिका की करीब 15 लाख रुपये की वैध देय राशि का भुगतान लंबित था। इसी भुगतान से जुड़ी फाइल को आगे बढ़ाने के बदले कथित तौर पर 10 हजार रुपये मांगे गए।

सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों और शिक्षकों को उनके पेंशन, GPF, अवकाश नकदीकरण और अन्य देयकों का भुगतान समय पर मिलना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में भुगतान प्रक्रिया में रिश्वत की मांग का आरोप गंभीर माना जा रहा है।

एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई से खुला मामला

यदि शिकायतकर्ता एंटी करप्शन टीम से संपर्क नहीं करता तो कथित रिश्वत मांगने का यह मामला सामने नहीं आता। शिकायत के बाद गोपनीय सत्यापन, ट्रैप की तैयारी और मौके पर गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

एंटी करप्शन टीम की यह कार्रवाई सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगने वालों पर कानूनी शिकंजा कसना है।

कैंट थाने में दर्ज हुई प्राथमिकी

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कैंट थाने ले जाया गया। एंटी करप्शन टीम की तहरीर के

आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।

अब जांच में यह भी देखा जा सकता है कि आरोपी ने पहले भी इसी तरह

किसी अन्य व्यक्ति से रिश्वत की मांग की थी या नहीं। हालांकि, इस संबंध में

कोई अतिरिक्त आरोप या निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले तय नहीं किया जा सकता।

सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार पर सवाल

गोरखपुर की इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार और काम के बदले

अवैध रकम मांगने की शिकायतों पर सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के

पेंशन और अन्य भुगतान से जुड़े मामलों में समय पर कार्रवाई की आवश्यकता रहती है।

रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को अपने ही वैध भुगतान के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और

किसी तरह की कथित अवैध मांग का सामना न करना पड़े, इसके लिए पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है।

आगे जांच में क्या सामने आएगा?

फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है और प्राथमिकी दर्ज होने के बाद

कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ रही है। जांच के दौरान रिश्वत मांगने के आरोप,

भुगतान की फाइल, संबंधित दस्तावेज और अन्य तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।

यह भी महत्वपूर्ण होगा कि करीब 15 लाख रुपये के EL नकदीकरण की फाइल किस स्थिति में थी और

उसके भुगतान की प्रक्रिया कहां तक पहुंची थी। जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

निष्कर्ष

गोरखपुर के संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई से रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है।

आरोप है कि सेवानिवृत्त शिक्षिका के करीब 15 लाख रुपये के 300 दिनों के

EL नकदीकरण का भुगतान कराने और फाइल आगे बढ़ाने के बदले 10 हजार रुपये मांगे गए थे।

शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने गोपनीय सत्यापन किया और फिर

ट्रैप लगाकर पटल सहायक शहनवाज आलम को कथित तौर पर 10 हजार रुपये लेते रंगे हाथ

गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

FAQ

1. गोरखपुर जेडी कार्यालय में किसे गिरफ्तार किया गया?

एंटी करप्शन टीम ने जेडी कार्यालय के पटल सहायक शहनवाज

आलम को कथित तौर पर 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।

2. आरोपी पर रिश्वत लेने का आरोप क्यों लगा?

आरोप है कि सेवानिवृत्त शिक्षिका के करीब 15 लाख रुपये के 300 दिनों के

EL नकदीकरण का भुगतान कराने और संबंधित फाइल आगे बढ़ाने के बदले 10 हजार रुपये मांगे गए थे।

3. शिकायत किसने की थी?

सेवानिवृत्त शिक्षिका सरोज दूबे के बेटे दिव्यांशु पांडेय ने 14 अगस्त को एंटी करप्शन थाना प्रभारी से शिकायत की थी।

4. एंटी करप्शन टीम ने आरोपी को कैसे पकड़ा?

शिकायत की गोपनीय जांच के बाद ट्रैप टीम बनाई गई। टीम जेडी कार्यालय

पहुंची और आरोपी द्वारा 10 हजार रुपये स्वीकार करते ही उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।

5. सेवानिवृत्त शिक्षिका को कितनी राशि का भुगतान मिलना बाकी था?

उनके 300 दिनों के EL नकदीकरण की करीब 15 लाख रुपये की राशि का

भुगतान बाकी बताया गया था। GPF, पेंशन और अन्य देयकों का भुगतान हो चुका था।

6. आरोपी के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कैंट थाने ले जाया गया। एंटी करप्शन टीम की

तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

7. क्या आरोपी पर आरोप साबित हो चुके हैं?

नहीं। फिलहाल गिरफ्तारी और आरोपों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।

8. घटना कब हुई?

एंटी करप्शन टीम ने बुधवार को जेडी कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई करते हुए

आरोपी को कथित तौर पर रिश्वत लेते पकड़ा। खबर 20 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुई।

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