NEET UG 2026 का परिणाम घोषित होने के बाद देशभर में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस बार सबसे अधिक चर्चा बिहार और कर्नाटक की हो रही है। कारण यह है कि दोनों राज्यों में मेडिकल सीटों की संख्या और प्रतियोगिता में बड़ा अंतर है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में बेहतर रैंक और अधिक अंक लाने के बाद भी सरकारी MBBS सीट मिलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जबकि कर्नाटक में सीटों की अधिक उपलब्धता के कारण अपेक्षाकृत कम अंक पर भी प्रवेश की संभावना बन सकती है।
कर्नाटक क्यों माना जा रहा है बेहतर विकल्प?
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की 2026 सीट मैट्रिक्स के अनुसार, कर्नाटक देश का वह राज्य है जहां सबसे अधिक MBBS सीटें उपलब्ध हैं। यहां सरकारी और निजी दोनों मेडिकल कॉलेजों की संख्या अधिक है, जिससे उम्मीदवारों के पास प्रवेश के कई विकल्प मौजूद रहते हैं।
बिहार में क्यों बढ़ जाती है प्रतिस्पर्धा?
बिहार में मेडिकल कॉलेजों और MBBS सीटों की संख्या कर्नाटक की तुलना में काफी कम है। वहीं, NEET में सफल होने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सीमित सीटों के लिए प्रतियोगिता काफी कठिन हो जाती है। यही वजह है कि कई बार 670 या उससे अधिक अंक लाने वाले अभ्यर्थियों को भी मनपसंद सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं मिल पाता।
देशभर में बढ़ीं MBBS सीटें
NMC ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए देशभर में 9,911 नई MBBS सीटों को मंजूरी दी है। इसके बाद भारत में MBBS सीटों की कुल संख्या बढ़कर 1,36,939 हो गई है। इनमें लगभग 63,296 सरकारी और 73,643 निजी मेडिकल कॉलेजों की सीटें शामिल हैं।
फिर भी हर सीट पर लगभग 8 उम्मीदवार
सीटों में वृद्धि के बावजूद मेडिकल प्रवेश की प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी बनी हुई है। इस वर्ष 11.21 लाख से अधिक उम्मीदवार NEET UG 2026 में सफल हुए हैं, जबकि कुल MBBS सीटें लगभग 1.37 लाख हैं। इसका मतलब है कि औसतन एक MBBS सीट के लिए करीब 8 उम्मीदवार प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
कटऑफ बढ़ने से बढ़ी चिंता
इस वर्ष NEET UG 2026 की कटऑफ में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, कटऑफ बढ़ने से 600 या उससे अधिक अंक लाने वाले कई अभ्यर्थियों को भी सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने को लेकर चिंता बनी हुई है। प्रवेश अब केवल अंकों पर नहीं, बल्कि रैंक, श्रेणी, राज्य कोटा और सीटों की उपलब्धता पर भी निर्भर करेगा।
काउंसलिंग में सही विकल्प चुनना होगा जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार केवल अच्छे अंक लाना ही पर्याप्त नहीं होगा। उम्मीदवारों को काउंसलिंग के दौरान राज्यवार सीटों, सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की उपलब्धता तथा अपनी रैंक के अनुसार सही विकल्प भरने होंगे। सही रणनीति अपनाने वाले अभ्यर्थियों को बेहतर कॉलेज मिलने की संभावना अधिक रहेगी।
क्या सीख मिलती है?
बिहार और कर्नाटक की तुलना यह दिखाती है कि केवल NEET स्कोर ही प्रवेश का आधार नहीं है। राज्य में उपलब्ध मेडिकल सीटें, कॉलेजों की संख्या, आरक्षण नीति और काउंसलिंग प्रक्रिया भी अंतिम एडमिशन को प्रभावित करती है। इसलिए उम्मीदवारों को केवल अंकों पर नहीं, बल्कि पूरी प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी रखनी चाहिए।
निष्कर्ष
NEET UG 2026 के बाद मेडिकल प्रवेश की दौड़ पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है।
कर्नाटक में अधिक MBBS सीटें होने से छात्रों के लिए अवसर अपेक्षाकृत ज्यादा हैं, जबकि बिहार में
सीमित सीटों के कारण प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी बनी हुई है। ऐसे में सफल
अभ्यर्थियों के लिए सही काउंसलिंग रणनीति और कॉलेज चयन बेहद महत्वपूर्ण होगा।
FAQ
Q1. भारत में 2026-27 के लिए कुल कितनी MBBS सीटें हैं?
उत्तर: NMC के अनुसार देशभर में 1,36,939 MBBS सीटें उपलब्ध हैं।
Q2. किस राज्य में सबसे अधिक MBBS सीटें हैं?
उत्तर: कर्नाटक देश में सबसे अधिक MBBS सीटों वाले राज्यों में प्रमुख है।
Q3. बिहार में MBBS प्रवेश कठिन क्यों माना जाता है?
उत्तर: वहां मेडिकल सीटें अपेक्षाकृत कम हैं, जबकि सफल उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने से प्रतियोगिता काफी बढ़ जाती है।
Q4. इस वर्ष कितनी नई MBBS सीटें बढ़ाई गई हैं?
उत्तर: शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 9,911 नई MBBS सीटें जोड़ी गई हैं।
Q5. क्या केवल NEET स्कोर से MBBS एडमिशन मिल जाता है?
उत्तर: नहीं। एडमिशन रैंक, श्रेणी, राज्य कोटा, सीटों की उपलब्धता और काउंसलिंग प्रक्रिया पर भी निर्भर करता है।
Q6. सफल उम्मीदवारों को आगे क्या करना होगा?
उत्तर: उन्हें MCC और संबंधित राज्य की काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेकर अपनी रैंक के अनुसार कॉलेज विकल्प भरने होंगे।
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