फेस रिकॉग्निशन अटेंडेंस के नए नियमों से संविदा कर्मियों की बढ़ी मुश्किलें, बिजली आपूर्ति पर भी पड़ सकता है असर

राकेश शर्मा की रिपोर्ट

गोरखपुर: अगस्त से लागू होगी नई ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था

गोरखपुर। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) ने अगस्त 2026 से ऑनलाइन फेस रिकॉग्निशन आधारित अटेंडेंस सिस्टम लागू करने का फैसला किया है। विभाग का उद्देश्य कर्मचारियों की उपस्थिति को पूरी तरह पारदर्शी बनाना और अनुशासन बढ़ाना है। नई व्यवस्था के तहत अब कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन ऑनलाइन फेस रिकॉग्निशन अटेंडेंस के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। हालांकि इस निर्णय से संविदा कर्मियों और बिजली उपभोक्ताओं दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं। कर्मचारियों का कहना है कि फील्ड ड्यूटी की वास्तविक परिस्थितियों को देखते हुए इस व्यवस्था से कई व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

क्लॉक-इन और क्लॉक-आउट के लिए लागू हुए सख्त नियम

पीवीवीएनएल द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सभी कर्मचारियों को ड्यूटी शुरू होने पर फेस रिकॉग्निशन के माध्यम से क्लॉक-इन और ड्यूटी समाप्त होने पर क्लॉक-आउट करना अनिवार्य होगा। कर्मचारी निर्धारित समय से अधिकतम 30 मिनट पहले ही क्लॉक-इन कर सकेंगे। इससे पहले दर्ज की गई उपस्थिति स्वतः अमान्य मानी जाएगी। वहीं क्लॉक-आउट के लिए अधिकतम तीन घंटे की समय सीमा तय की गई है। अधिकांश मामलों में क्लॉक-इन और क्लॉक-आउट एक ही मोबाइल डिवाइस से करना भी अनिवार्य रहेगा। विभाग का मानना है कि इससे उपस्थिति प्रणाली अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।

एक मिनट की देरी भी बन सकती है परेशानी

नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव समय की पाबंदी को लेकर किया गया है। पहले नियमित कर्मचारियों को लगभग 10 मिनट और संविदा कर्मियों को 5 मिनट तक की देरी की छूट मिल जाती थी, लेकिन अब यह राहत पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। यदि कोई कर्मचारी निर्धारित समय से एक मिनट भी देर से उपस्थिति दर्ज करता है तो उसकी आकस्मिक अवकाश (सीएल) काटी जा सकती है या उसे अनुपस्थित माना जा सकता है। इससे कर्मचारियों पर समय का दबाव पहले की तुलना में काफी बढ़ जाएगा।

संविदा कर्मियों ने जताई वेतन कटने की आशंका

संविदा कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन लगभग 450 रुपये के मानदेय पर आठ घंटे की ड्यूटी करनी पड़ती है। कई बार बिजली लाइन में खराबी, ट्रांसफार्मर फाल्ट, लाइन ब्रेकडाउन और अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण निर्धारित समय के बाद भी मौके पर रुककर काम करना पड़ता है। यदि ऐसे समय में समय पर क्लॉक-आउट नहीं हो पाया तो वेतन कटने की संभावना बनी रहेगी। कर्मचारियों का कहना है कि सीमित मानदेय और जोखिमपूर्ण कार्य के बीच नई अटेंडेंस व्यवस्था उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक दबाव लेकर आई है।

फाल्ट ठीक करें या समय पर क्लॉक-आउट करें?

बिजली कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे प्राथमिकता किसे दें। यदि वे उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए फाल्ट ठीक करने में लगे रहते हैं तो समय पर क्लॉक-आउट नहीं कर पाएंगे। दूसरी ओर यदि वे समय पूरा होते ही कार्य छोड़ देते हैं तो बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी और आम जनता को घंटों तक परेशानी उठानी पड़ सकती है। कर्मचारियों का कहना है कि फील्ड ड्यूटी को कार्यालय की तरह निश्चित समय सीमा में बांधना व्यावहारिक नहीं है।

बिजली उपभोक्ताओं की भी बढ़ी चिंता

उपभोक्ता दिवाकर राय, बृजनाथ तिवारी, विनय पाण्डेय, आलोक पाण्डेय, रजनीश और नागेंद्र तिवारी का कहना है कि पहले से ही कई फीडरों पर कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। यदि शाम या रात के समय कोई बड़ा फाल्ट हो जाता है और कर्मचारी समय सीमा के कारण मौके पर नहीं रुक पाते हैं तो बिजली आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रह सकती है। इससे आम नागरिकों के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानों और छोटे उद्योगों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

गर्मी और उमस में बढ़ सकती है परेशानी

गर्मी और उमस के मौसम में बिजली की मांग सबसे अधिक रहती है। यदि ऐसे समय में किसी क्षेत्र में फाल्ट हो जाए और उसके निस्तारण में देरी हो तो इसका सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, बीमार मरीजों और आम नागरिकों पर पड़ेगा। लंबे समय तक बिजली कटौती होने से पेयजल आपूर्ति, घरेलू कार्य और छोटे व्यवसाय भी प्रभावित हो सकते हैं।

एसडीओ ने क्या कहा?

एसडीओ रमेश सिंह कुशवाह ने बताया कि शासन द्वारा जारी आदेशों का पालन कराना विभाग की जिम्मेदारी है।

उन्होंने स्वीकार किया कि अतिरिक्त संविदा कर्मियों की उपलब्धता फिलहाल नहीं है।

यदि ड्यूटी समाप्त होने के बाद किसी क्षेत्र में

बड़ा फाल्ट आता है तो उसके निस्तारण में व्यावहारिक कठिनाइयाँ सामने आ सकती हैं।

विभाग का प्रयास रहेगा कि उपभोक्ताओं को कम से कम असुविधा हो।

निष्कर्ष

पीवीवीएनएल की नई फेस रिकॉग्निशन अटेंडेंस प्रणाली पारदर्शिता और

अनुशासन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे डिजिटल

उपस्थिति प्रणाली मजबूत होगी और अनियमितताओं पर रोक लगने की उम्मीद है।

हालांकि संविदा कर्मियों और बिजली उपभोक्ताओं का मानना है कि

यदि फील्ड ड्यूटी की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए

नियमों में व्यावहारिक संशोधन नहीं किया गया तो इसका सीधा असर बिजली आपूर्ति, फाल्ट

निस्तारण और उपभोक्ता सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। आने वाले समय में विभाग के लिए

सबसे बड़ी चुनौती पारदर्शिता और व्यावहारिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना होगी।

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