
ग्राम पंचायत चुनाव से पहले बड़ा विवाद, प्रधान और उनके परिवार के 65 लोगों के नाम सूची से हटे
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से मतदाता सूची को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। विकासखंड गोला के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कुकुरहा में प्रकाशित नई मतदाता सूची में बड़ी संख्या में लोगों के नाम गायब पाए गए हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि गांव की निर्वाचित ग्राम प्रधान बिंदु देवी का नाम भी सूची में नहीं है। उनके परिवार के कई सदस्यों समेत कुल 65 लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब बताए जा रहे हैं। इस घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और चिंता का माहौल है।
नई वोटर लिस्ट ने बढ़ाई ग्रामीणों की परेशानी
10 जून को नई मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद जब ग्रामीणों ने अपने नामों का सत्यापन किया तो कई लोगों को पता चला कि उनके नाम सूची से हट चुके हैं। जिन लोगों के नाम पहले की सूची में मौजूद थे, वे अब नई सूची में दिखाई नहीं दे रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बिना किसी सूचना या कारण बताए नाम हटाए जाने से लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है। कई लोग अब यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर उनके नाम किस आधार पर सूची से हटाए गए।
ग्राम प्रधान और उनके परिवार का नाम भी गायब
सबसे अधिक चर्चा का विषय यह है कि ग्राम पंचायत की वर्तमान प्रधान बिंदु देवी का नाम भी मतदाता सूची में नहीं है। उनके पति सुरेश पाल, पुत्रों और परिवार के अन्य सदस्यों समेत कुल 65 लोगों के नाम सूची से गायब बताए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गांव की निर्वाचित प्रधान का नाम ही मतदाता सूची में नहीं है तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इससे मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

कई गांवों में सामने आई समान शिकायतें
ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या केवल कुकुरहा ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं है। डाड़ी खास, माफी और पटौहा ग्राम पंचायतों से भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटने की शिकायतें सामने आई हैं।
स्थानीय निवासियों का दावा है कि इन गांवों में भी अनेक पात्र मतदाताओं के नाम सूची में नहीं मिल रहे हैं। इससे लोगों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है और वे प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं।
प्रधान पुत्र ने अधिकारियों से लगाई गुहार
ग्राम प्रधान बिंदु देवी के पुत्र अनुज पाल ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जिलाधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों को शिकायत भेजी है। उन्होंने डाक के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई है तथा तहसील गोला और विकासखंड कार्यालय में आवेदन देकर मतदाता सूची में नाम जोड़ने की मांग की है।
अनुज पाल का कहना है कि यदि निर्वाचित प्रधान और उनके परिवार के नाम ही सूची में नहीं हैं, तो यह एक गंभीर प्रशासनिक त्रुटि हो सकती है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
250 से अधिक मतदाताओं के नाम कटने का दावा
ग्रामीणों का दावा है कि केवल एक परिवार ही नहीं बल्कि पूरे गांव में लगभग 250 लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब हैं।
यदि यह आंकड़ा सही साबित होता है तो आगामी पंचायत चुनावों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो
कई पात्र मतदाता अपने संवैधानिक मतदान अधिकार से वंचित रह सकते हैं।
चुनावी पारदर्शिता पर उठे सवाल
मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है। ऐसे में बड़ी संख्या में
नाम कटने की घटनाओं ने चुनावी पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी लोकतांत्रिक
व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रशासन को मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
बीडीओ ने जांच का दिया आश्वासन
खंड विकास अधिकारी दिवाकर सिंह ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि
मतदाता सूची से संबंधित कार्य बीएलओ और सुपरवाइजरों के माध्यम से संपन्न कराया जाता है।
उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कराई जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुरूप पात्र व्यक्तियों के
नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे और यदि कहीं त्रुटि पाई जाती है तो उसे सुधारा जाएगा।
ग्रामीणों को कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल कुकुरहा और आसपास के गांवों के लोग प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो
बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में शामिल किए जा सकते हैं।
आगामी ग्राम पंचायत चुनावों को देखते हुए यह मामला क्षेत्र में चर्चा का
प्रमुख विषय बन गया है। ग्रामीणों की मांग है कि
निष्पक्ष जांच कराकर सभी पात्र मतदाताओं को उनका अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
गोरखपुर के कुकुरहा गांव में ग्राम प्रधान समेत दर्जनों लोगों के नाम मतदाता सूची से
गायब होने का मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कई लोग मतदान के
अधिकार से वंचित हो सकते हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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