गोरखपुर जिले की गोला तहसील क्षेत्र के ग्राम दीपगढ़ में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के प्रथम दिवस श्रद्धालुओं ने भक्ति और आध्यात्मिकता के अद्भुत संगम का अनुभव किया। कथा व्यास श्रीमती अनुराधा तिवारी ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ भागवत कथा का श्रवण करता है, उसे परम तत्व की प्राप्ति होती है और उसका जीवन सकारात्मक दिशा की ओर अग्रसर होता है।
भागवत कथा मानव जीवन को देती है नई दिशा
कथा व्यास अनुराधा तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में आध्यात्मिक मूल्यों से दूर होता जा रहा है। ऐसे समय में श्रीमद्भागवत कथा व्यक्ति को धर्म, भक्ति और सदाचार का मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ सकता है और भगवान की भक्ति के माध्यम से आत्मिक शांति प्राप्त कर सकता है।
कलियुग में भगवान का नाम ही सबसे बड़ा सहारा
अपने प्रवचन में कथा व्यास ने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण और कथा श्रवण ही सबसे सरल और प्रभावी साधन है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र और शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उनके अनुसार भागवत कथा केवल सुनने का विषय नहीं बल्कि जीवन में उतारने योग्य संदेशों का अमूल्य भंडार है।
बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालु
कथा के प्रथम दिन क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे। महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ कथा का श्रवण किया। कथा पंडाल में भक्ति गीतों और भगवान के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने कथा व्यास के प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया।
भक्ति से ही मिलता है जीवन का वास्तविक सुख
अनुराधा तिवारी ने कहा कि संसार के सभी भौतिक सुख अस्थायी हैं, जबकि भगवान की भक्ति से प्राप्त आनंद शाश्वत होता है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने जीवन में भगवान को सर्वोच्च स्थान देता है, तब उसके जीवन की अनेक समस्याएं स्वतः समाप्त होने लगती हैं। भक्ति, सेवा और सत्संग जीवन को सार्थक बनाने के प्रमुख साधन हैं।
समाज में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देती है भागवत कथा
कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण केवल
धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला महान ग्रंथ है।
इसके माध्यम से समाज में प्रेम, करुणा, सेवा और सद्भाव जैसे मूल्यों का विकास होता है।
उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को अपनाने का आह्वान किया।
आयोजन समिति ने किया स्वागत
कथा के शुभारंभ अवसर पर आयोजन समिति और ग्रामवासियों ने कथा व्यास
अनुराधा तिवारी का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं के लिए बैठने, पेयजल और
प्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था की गई। आयोजकों ने बताया कि कथा के
आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।
दीपगढ़ में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और
प्रेरणा का स्रोत बन रही है। कथा व्यास अनुराधा तिवारी के
अनुसार भागवत कथा का श्रवण मनुष्य को परम तत्व की प्राप्ति कराता है और
उसके जीवन को धर्म, भक्ति तथा सदाचार की राह पर आगे बढ़ाता है। कथा के माध्यम से
श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा भी मिल रही है।
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