गोरखपुर से परशुराम यादव की रिपोर्ट
लोकतंत्र में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ कहा जाता है, क्योंकि मीडिया समाज की आवाज बनकर जनता की समस्याओं को शासन और प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य करता है। लेकिन आज के समय में कुछ लोग अपनी कमियों और विफलताओं को छिपाने के लिए मीडिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगे हैं। जब कोई पत्रकार भ्रष्टाचार, अन्याय और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाता है, तब कुछ स्वार्थी तत्व खबर के तथ्यों पर चर्चा करने के बजाय पत्रकारों को ही निशाना बनाने लगते हैं।
मीडिया समाज का आईना है
मीडिया वही दिखाता है जो समाज में घटित हो रहा होता है। यदि किसी विभाग, संस्था या व्यक्ति की कार्यप्रणाली में खामियां हैं और वह खबर के माध्यम से उजागर होती हैं, तो इसका दोष पत्रकारिता पर नहीं बल्कि उस व्यवस्था पर होना चाहिए जहां समस्याएं मौजूद हैं। पत्रकार का कार्य सच को सामने लाना और जनता को जागरूक करना होता है। यही कारण है कि स्वतंत्र पत्रकारिता को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।

निष्पक्ष पत्रकारिता समाज को देती है सही दिशा
पत्रकारिता केवल समाचार प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को जागरूक करने और आम जनता की आवाज बनने का कार्य भी करती है। निष्पक्ष पत्रकार हर परिस्थिति में सच के साथ खड़ा रहता है, चाहे उसके सामने कितनी भी चुनौतियां क्यों न हों। मीडिया की रिपोर्टिंग से कई बार प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ती है और पीड़ितों को न्याय मिलता है। यही पत्रकारिता की सबसे बड़ी सफलता मानी जाती है।
पहले खुद का आत्ममंथन जरूरी
आज जरूरत इस बात की है कि मीडिया पर उंगली उठाने वाले लोग पहले अपने दायित्वों और कार्यशैली का आत्ममंथन करें। सच को दबाने की कोशिश ज्यादा समय तक सफल नहीं हो सकती। समाज में पारदर्शिता और न्याय बनाए रखने के लिए स्वतंत्र और मजबूत पत्रकारिता बेहद जरूरी है। लोकतंत्र तभी मजबूत रहेगा जब मीडिया बिना दबाव और भय के जनता के मुद्दों को उठाता रहेगा।
पत्रकारिता लोकतंत्र की आत्मा है
पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं बल्कि समाज सेवा का माध्यम है। पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर भी जनता की आवाज उठाने का कार्य करते हैं। इसलिए समाज के हर वर्ग को निष्पक्ष पत्रकारिता का सम्मान करना चाहिए। स्वतंत्र मीडिया ही समाज को सही दिशा देने और लोकतंत्र को मजबूत बनाने का कार्य करता है।
