उत्तर प्रदेश के आलू किसान बंपर उत्पादन
Uttar Pradesh के आलू किसान इस समय गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। बंपर उत्पादन के बावजूद किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि कोल्ड स्टोर पूरी तरह भर चुके हैं, लेकिन फिर भी जगह-जगह खेतों और सड़कों के किनारे आलू के ढेर दिखाई दे रहे हैं।
जिस आलू को किसान “खरा सोना” मानते थे, वही अब उनके सपनों को तोड़ता नजर आ रहा है। किसी किसान के मकान की छत की ढलाई रुक गई है तो किसी को बच्चों की फीस भरने के लिए कर्ज लेने की नौबत आ गई है।
कोल्ड स्टोर फुल, मंडियों में गिरा भाव
Hardoi से लेकर Kannauj, Farrukhabad और Firozabad तक आलू किसानों की स्थिति लगभग एक जैसी है।
कई इलाकों में कोल्ड स्टोर पूरी तरह भर चुके हैं। मजबूरी में किसान खुले मैदानों, बागों और खेतों में आलू रखने को मजबूर हैं। मंडियों में कीमतें केवल 300 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं, जबकि लागत इससे कहीं ज्यादा है।
किसानों का दर्द: सपने टूट गए
हरदोई के जैनापुर गांव के किसान शिवबरन सिंह बताते हैं कि उन्होंने आलू की फसल से घर की छत डलवाने का सपना देखा था, लेकिन अब वह सपना टूट चुका है। उनके खेत के बाहर आलू का ढेर लगा है क्योंकि कोल्ड स्टोर में जगह नहीं बची।
वहीं मोहम्मदाबाद और नगला रायसिंह के किसानों का कहना है कि हर दिन ट्रैक्टर-ट्रॉली से आलू मंडी भेजना पड़ रहा है, लेकिन लागत तक नहीं निकल पा रही।
Aligarh में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे बेटे की फीस को लेकर परेशान किसान मो. अदीब कहते हैं कि आलू ने इस बार पूरी उम्मीद तोड़ दी। अब फीस जमा करने के लिए कर्ज लेना पड़ेगा।
यूपी में कितना आलू स्टोर हुआ?
आलू बेल्ट के रूप में पहचाने जाने वाले जिलों:
- कन्नौज
- फर्रुखाबाद
- इटावा
- औरैया
- फिरोजाबाद
- मैनपुरी
- मथुरा
- आगरा
- अलीगढ़
- हाथरस
में करीब 2363 कोल्ड स्टोर मौजूद हैं। इन स्टोर्स में लगभग 172 लाख मीट्रिक टन आलू स्टोर किया गया है।
इसके बावजूद बड़ी मात्रा में आलू खेतों और मंडियों में पड़ा हुआ है क्योंकि दूसरे राज्यों से मांग कमजोर बनी हुई है।
लागत और कमाई में भारी अंतर
प्रगतिशील किसान सुधीर शुक्ला के मुताबिक एक बीघा आलू की खेती में लगभग 12 से 15 हजार रुपये की लागत आती है। इसके अलावा खुदाई, पैकिंग, मजदूरी और मंडी तक पहुंचाने का खर्च अलग से होता है।
अनुमानित खर्च और कमाई
- खेती की लागत: ₹12,000–₹15,000 प्रति बीघा
- खुदाई और ढुलाई खर्च: ₹2,500–₹3,000
- औसत पैदावार: 30 क्विंटल
- मौजूदा कमाई: लगभग ₹12,000
यानी किसान को सीधा घाटा उठाना पड़ रहा है।
दूसरे राज्यों में कम मांग बनी बड़ी वजह
कोल्ड स्टोर संचालकों का कहना है कि इस बार बंपर उत्पादन के साथ-साथ दूसरे राज्यों में मांग कम होने से संकट और गहरा गया है।
पहले पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में बड़ी मात्रा में आलू भेजा जाता था, लेकिन इस बार निर्यात और सप्लाई कम रही। इसका असर सीधे किसानों की आय पर पड़ा।
आलू प्रसंस्करण फैक्टरी की उठी मांग
विशेषज्ञों और कोल्ड स्टोर संचालकों का मानना है कि अगर आलू पाउडर और चिप्स जैसी प्रसंस्करण (Processing) फैक्ट्रियां लगें, तो किसानों को राहत मिल सकती है।
किसानों की प्रमुख मांगें
- आलू प्रसंस्करण उद्योग शुरू किए जाएं
- न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी व्यवस्था हो
- दूसरे राज्यों में निर्यात बढ़ाया जाए
- कोल्ड स्टोरेज क्षमता बढ़ाई जाए
किसानों का कहना है कि अगर सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठाती, तो हर साल यही संकट दोहराया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के आलू किसानों की हालत इस समय बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
बंपर पैदावार के बावजूद सही दाम न मिलने से किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
खेती की बढ़ती लागत और बाजार में गिरते भाव ने किसानों की उम्मीदों को तोड़ दिया है।
अब सभी की नजर सरकार और कृषि विभाग की अगली रणनीति पर टिकी है।
