एम्स रैन बसेरा समस्या तीमारदार खुले में रात गुजारने को मजबूर

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित एम्स परिसर में इन दिनों तीमारदारों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। अस्पताल में इलाज के लिए दूर-दराज से आने वाले मरीजों के साथ आए परिजनों को रुकने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है।

145 बेड की व्यवस्था, लेकिन जरूरत से कम

एम्स परिसर में तीमारदारों के लिए कुल 145 बेड की व्यवस्था है। सामान्य दिनों में करीब 100 लोग यहां रुकते हैं, लेकिन इन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ने से यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है।

रैन बसेरे के सभी बेड जल्दी भर जा रहे हैं, जिससे देर रात आने वाले लोगों को जगह नहीं मिलती और उन्हें बाहर ही रात बितानी पड़ती है।

पेड़ों के नीचे गुजर रही रात, बढ़ी परेशानी

रैन बसेरे में जगह न मिलने पर कई तीमारदार पेड़ों के नीचे, खुले आसमान के नीचे या अस्पताल परिसर के किनारे चादर बिछाकर रात गुजारने को मजबूर हैं।

दिन में तेज धूप और रात में मच्छरों व उमस के कारण उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।

दूर-दराज से आते हैं मरीज, कई दिन रुकना पड़ता है

एम्स में इलाज के लिए बिहार, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, बस्ती और सिद्धार्थनगर

जैसे जिलों से बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। कई मरीजों को

लंबे समय तक भर्ती रहना पड़ता है, जिससे तीमारदारों की संख्या और बढ़ जाती है।

तीमारदारों की मांग, बढ़ाई जाए सुविधा

देवरिया से आए एक तीमारदार ने बताया कि अस्पताल प्रशासन को बढ़ती भीड़ को देखते हुए

अतिरिक्त बेड और अस्थायी रैन बसेरे की व्यवस्था करनी चाहिए।

वहीं कुछ लोगों ने शिकायत की कि ज्यादा सामान होने के कारण

उन्हें रैन बसेरे में जगह नहीं दी गई, जिससे उन्हें बाहर रहना पड़ा।

बढ़ती भीड़ के अनुसार जरूरी है व्यवस्था

एम्स जैसे बड़े संस्थान में तीमारदारों के लिए पर्याप्त व्यवस्था होना जरूरी है। गर्मी के मौसम में

खुले में रहना बेहद मुश्किल हो जाता है, ऐसे में प्रशासन को जल्द ही ठोस कदम उठाने की जरूरत है।