लखनऊ में अपर्णा यादव
लखनऊ में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासत अचानक तेज हो गई है। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने विधानसभा के सामने जोरदार प्रदर्शन करते हुए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के झंडे जलाकर विरोध दर्ज कराया। इस घटना ने प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है और बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
महिला आरक्षण बिल लंबे समय से चर्चा में रहा है, लेकिन इसके पारित न हो पाने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अपर्णा यादव ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को घेरते हुए कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार देने में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी साफ नजर आती है।
उनका कहना है कि यह बिल वर्षों से लंबित है और इसे पास न करना महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है।
झंडा जलाकर जताया विरोध
अपर्णा यादव ने विधानभवन के सामने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के झंडे जलाकर विरोध जताया। यह कदम प्रतीकात्मक विरोध के रूप में देखा जा रहा है, जिसका मकसद विपक्ष पर दबाव बनाना है।
इस दौरान राज्य महिला आयोग की अन्य सदस्य भी उनके साथ मौजूद रहीं और उन्होंने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की।
अखिलेश यादव का पलटवार
इस पूरे घटनाक्रम पर अखिलेश यादव ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि अगर महिलाओं को इतना ही प्रतिनिधित्व देना है तो भाजपा अपने संगठन में 12 महिलाओं को आगे क्यों नहीं भेजती।
उनका बयान राजनीतिक माहौल को और गर्म कर गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई।
भाजपा का पक्ष
प्रदेश सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि महिलाओं को उनका अधिकार मिलना जरूरी है। उपमुख्यमंत्री ने भी कहा कि महिला सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
भाजपा का मानना है कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहा है,
जबकि सरकार महिलाओं के अधिकारों को लेकर गंभीर है।
महिला आयोग का बड़ा ऐलान
राज्य महिला आयोग की ओर से यह भी कहा गया है कि
इस मुद्दे को लेकर आगे और बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।
आयोग की सदस्याओं ने समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर भी विरोध प्रदर्शन किया और
इसे आंदोलन का रूप देने की तैयारी की जा रही है।
राजनीतिक असर
इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। महिला आरक्षण
जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सियासी टकराव आने वाले समय में और तेज हो सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मुद्दा आगामी चुनावों में भी बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है,
जहां सभी दल महिलाओं के वोट बैंक को साधने की कोशिश करेंगे।
लखनऊ में अपर्णा यादव का प्रदर्शन और उसके बाद की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं यह दिखाती हैं कि महिला आरक्षण का
मुद्दा सिर्फ नीति नहीं, बल्कि सियासत का भी केंद्र बन चुका है।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि
इस मुद्दे पर सहमति बनती है या सियासी टकराव और बढ़ता है।
