हरिवंश नारायण सिंह
हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर राज्यसभा के उपसभापति (डिप्टी चेयरमैन) चुने गए हैं। उन्हें लगातार तीसरी बार इस पद पर निर्विरोध चुना गया, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
विपक्ष द्वारा चुनाव का बहिष्कार किए जाने के बाद यह प्रक्रिया आसान हो गई और उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।
निर्विरोध चुनाव क्यों हुआ
इस बार उपसभापति चुनाव को लेकर विपक्ष ने असहमति जताई। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर उनसे कोई सार्थक परामर्श नहीं किया गया।
साथ ही विपक्ष ने लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद लंबे समय से खाली होने का मुद्दा भी उठाया और इसी के विरोध में चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार किया।
इसी कारण हरिवंश नारायण सिंह निर्विरोध चुने गए।
लगातार तीसरी बार बने उपसभापति
हरिवंश नारायण सिंह 2018 से ही राज्यसभा के उपसभापति पद पर कार्यरत हैं।
अब तीसरी बार इस पद पर चुने जाने के साथ उन्होंने एक तरह से निरंतरता और स्थिरता का रिकॉर्ड कायम किया है।
यह भी चर्चा में है कि एक मनोनीत सदस्य के रूप में उनका इस पद पर आना एक खास राजनीतिक संदेश देता है।
शुरुआती जीवन और शिक्षा
हरिवंश नारायण सिंह का जन्म 30 जून 1956 को बलिया में एक साधारण परिवार में हुआ था।
उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। इसके साथ ही
उन्होंने पत्रकारिता में भी डिप्लोमा हासिल किया।
छात्र जीवन में उन पर जयप्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का गहरा प्रभाव पड़ा।
जेपी आंदोलन से जुड़ाव
हरिवंश नारायण सिंह ने 1974 के ऐतिहासिक जेपी आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की थी।
यह आंदोलन भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ था और
इससे जुड़े कई नेताओं ने आगे चलकर देश की राजनीति में अहम भूमिका निभाई।
पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर
राजनीति में आने से पहले हरिवंश नारायण सिंह का लंबा करियर पत्रकारिता में रहा।
वे एक प्रमुख हिंदी अखबार के संपादक भी रहे और अपनी निष्पक्ष छवि के लिए जाने जाते हैं।
उनकी यही सादगी और संतुलित दृष्टिकोण उन्हें राजनीतिक क्षेत्र में भी अलग पहचान दिलाता है।
गठबंधन बदले पर पद बरकरार
दिलचस्प बात यह है कि जिन राजनीतिक समीकरणों के तहत वे राज्यसभा पहुंचे, समय के साथ वे समीकरण बदलते रहे।
फिर भी हरिवंश नारायण सिंह अपने पद पर बने रहे, जो उनकी व्यक्तिगत स्वीकार्यता और संतुलित कार्यशैली को दर्शाता है।
हरिवंश नारायण सिंह का लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति बनना उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता और अनुभव का प्रमाण है।
पत्रकारिता से लेकर राजनीति तक का उनका सफर और संतुलित कार्यशैली उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है।
आने वाले समय में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
