कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट
कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का मास्टरमाइंड रोहित तिवारी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। लंबे समय तक पुलिस को चकमा देने वाला यह आरोपी एक छोटी सी गलती के कारण पकड़ा गया—गर्लफ्रेंड से व्हाट्सएप कॉल पर बातचीत।
कैसे हुआ खुलासा?
पुलिस के अनुसार, रोहित तिवारी बेहद शातिर तरीके से काम करता था। वह किसी भी सामान्य कॉल का इस्तेमाल नहीं करता था, ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके।
लेकिन वह व्हाट्सएप कॉलिंग और अन्य ऐप्स के जरिए संपर्क बनाए रखता था। इसी दौरान पुलिस उसकी गर्लफ्रेंड और दिल्ली के एक नर्सिंग होम संचालक तक पहुंची।
इन दोनों से मिले सुराग के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया और उसे गिरफ्तार कर लिया।
कल्याणपुर से गिरफ्तारी
पुलिस ने रोहित को कल्याणपुर के इंदिरानगर इलाके से उस समय गिरफ्तार किया,
जब वह एक अधिवक्ता के घर जाने की तैयारी में था।
कई दिनों से पुलिस की टीमें उसकी तलाश में लगी थीं, लेकिन वह लगातार अंडरग्राउंड रहकर बचता रहा।
‘वन मैन आर्मी’ की तरह करता था काम
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, रोहित तिवारी इस पूरे किडनी रैकेट को लगभग अकेले ही ऑपरेट करता था।
वह अलग-अलग शहरों में नेटवर्क बनाकर काम करता था
कभी सीधे संपर्क में नहीं आता था
सभी गतिविधियां डिजिटल माध्यम से नियंत्रित करता था
इस वजह से उसे पकड़ना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था।
चार मोबाइल नंबरों का खुलासा
जेल में बंद अन्य आरोपियों—शिवम अग्रवाल, परवेज सैफी आदि से पूछताछ के बाद
पुलिस को रोहित के चार मोबाइल नंबरों की जानकारी मिली।
पहला नंबर दिल्ली एनसीआर में इस्तेमाल होता था
दूसरा कानपुर और लखनऊ के लिए
तीसरा नर्सिंग होम संचालकों से संपर्क के लिए
चौथा नंबर केवल गर्लफ्रेंड से बात करने के लिए
इन्हीं नंबरों के जरिए पुलिस उसकी लोकेशन तक पहुंच सकी।
एनसीआर से लेकर लखनऊ तक फैला था नेटवर्क
रोहित तिवारी का नेटवर्क एनसीआर, कानपुर और लखनऊ समेत कई शहरों में फैला हुआ था।
वह नर्सिंग होम संचालकों और एजेंट्स के जरिए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का पूरा खेल संचालित करता था।
पुलिस की बड़ी सफलता
कई दिनों की कड़ी मेहनत और तकनीकी निगरानी के बाद पुलिस को यह सफलता मिली।
अब पुलिस उससे जुड़े पूरे नेटवर्क और अन्य आरोपियों की तलाश में जुट गई है।
यह मामला दिखाता है कि अपराधी कितने भी शातिर क्यों न हों,
एक छोटी सी गलती उन्हें कानून के शिकंजे में ला सकती है।
कानपुर में हुई यह गिरफ्तारी अवैध ट्रांसप्लांट रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
