कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट
उत्तर प्रदेश के Kanpur में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिस व्यक्ति को यूरो सर्जन बताया जा रहा था वह असल में एक ओटी मैनेजर निकला। इस मामले ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है।
क्या है पूरा मामला
कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के एक मामले की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि डॉ. मुदस्सर अली सिद्दीकी नाम का व्यक्ति, जिसे अब तक यूरो सर्जन बताया जा रहा था, वास्तव में डॉक्टर नहीं बल्कि ऑपरेशन थिएटर मैनेजर है। उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर यह ट्रांसप्लांट किया था।
यह खुलासा तब हुआ जब पुलिस टीम जांच के सिलसिले में दिल्ली के उत्तमनगर स्थित उसके फ्लैट पर पहुंची। वहां उसकी पत्नी ने पुष्टि की कि वह डॉक्टर नहीं बल्कि ओटी मैनेजर है।
कैसे चल रहा था पूरा रैकेट
जांच में सामने आया है कि इस अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में कई लोग शामिल थे जिनमें पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य सहयोगी भी शामिल हैं। मुदस्सर अली की पहचान डॉ रोहित और शिवम अग्रवाल सहित कई लोगों से जुड़ी हुई बताई जा रही है।
रविवार की रात पारुल तोमर और आयुष नामक व्यक्तियों का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। इसके बाद देर रात करीब तीन बजे Ahuja Hospital से दो कारें निकलती देखी गईं जिससे पुलिस को शक हुआ और जांच का दायरा बढ़ाया गया।
पुलिस जांच में तेजी
पुलिस अब मुख्य आरोपी मुदस्सर अली की तलाश में जुटी हुई है। उसकी गिरफ्तारी के लिए
अलग टीमों का गठन किया गया है। साथ ही इस पूरे
नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस रैकेट के
जरिए कितने ट्रांसप्लांट किए गए और इसमें कितने लोग शामिल हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिना योग्य डॉक्टर के इस तरह का संवेदनशील ऑपरेशन किया जाना बेहद चिंताजनक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों को रोकने के लिए सख्त नियम और
निगरानी की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
अवैध अंग तस्करी का बड़ा नेटवर्क
यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं हो सकता बल्कि इसके पीछे एक बड़े अवैध अंग तस्करी
नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। पुलिस अब
इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट मामले में सामने आया यह खुलासा बेहद गंभीर है।
एक ओटी मैनेजर द्वारा खुद को डॉक्टर बताकर
ऑपरेशन करना न केवल गैरकानूनी है बल्कि लोगों की जान से खिलवाड़ भी है। पुलिस की जांच जारी है और
जल्द ही इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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